उनकी एक्शन ड्रामा रोमांस फिल्म सौदागर में दिलीप ताहिल, दीप्ति नवल, जैकी श्रॉफ, गुलशन ग्रोवर, अनुपम खेर, अर्चना पुरण सिंह, शोभा खोटे, मुकेश खन्ना, दीना पाठक, आकाश खुराना, आनंद बलराज, मालविका तिवारी, परवेज़ खान और अभिनय चतुर्वेदी जैसे जाने पहचाने चेहरों का जमावड़ा था।
इस फिल्म से, दो नए चेहरों विवेक मुश्रान और मनीषा कोइराला की नई जोड़ी का बॉलीवुड फिल्म दर्शकों से पहला परिचय करवाया जा रहा था। मनीषा, नेपाल के विख्यात राजनीतिक कोइराला परिवार की बेटी और पोती थी। राजनीति के स्थान पर फिल्मों में रूचि रखने वाली मनीषा कोइराला ने अभिनेत्री की रूप में नेपाली फिल्म फेरी भेटायला से पहली बार कैमरा का सामना किया था। इसके बाद, वह हिंदी फिल्म सौदागर में ली गई।
सौदागर कास्टिंग कू यानि सितारों की उथलपुथल करवाने वाली फिल्म थी। दो कबीलों के प्रमुखों के खूनी इतिहास की पृष्ठभूमि पर सौदागर में रोमांस था। क्योंकि, इन दोनों परिवार के बच्चे एक दूसरे से प्यार करने लगते थे। अपने कबीलों के मुखिया की भूमिका दिलीप कुमार और राजकुमार ने की थी। बॉलीवुड के अभिनय श्रेष्ठ दो अभिनेताओं का परदे पर टकराव अनूठा और रोमांचक अनुभव था। इन दोनों दिग्गज अभिनेताओं का परदे पर टकराव दूसरी बार हो रहा था।
राजकुमार और दिलीप कुमार का पहला टकराव, एस एस वासन की १९५९ में प्रदर्शित फिल्म पैगाम से हुआ था। पैगाम राजकुमार के फिल्म जीवन की मदर इंडिया के बाद ५वी फिल्म थी। वह काफी हद तक नए ही थे। जबकि, दिलीप कुमार उस समय तक स्वयं को स्थापित कर चुके थे। उनका बॉलीवुड में दबदबा था। उनके सामने कैमरा फेस करने में अभिनेता घबड़ाते थे।
इसके बावजूद राजकुमार ने बेधड़क अभिनय किया था। उन्होंने दिलीप कुमार के संवादों का अपनी ख़ामोशी से तक जवाब दिया था। दिलीप कुमार, राजकुमार के ठोस अभिनय से इतना विचलित हो गए कि उन्होंने इसके बाद ३२ साल तक राजकुमार के साथ दूसरी कोई फिल्म नहीं की।
दिलीप कुमार और राजकुमार की परदे की अदावत से आम फिल्म दर्शक परिचित था। इसलिए, जब सौदागर प्रदर्शित हुई तो दर्शक छविगृहों पर टूट पड़ा। जब जब राजकुमार के सामने दिलीप कुमार आये, दर्शकों ने इन दोनों का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।यह फिल्म १९९१ की तीसरी टॉप ग्रॉस करने वाली फिल्म बन गई।

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