Friday, 26 September 2025

#NetflixIndia पर एनिमेटेड श्रृंखला #Kurukshetra



एनीमेशन फिल्म महावतार नरसिंह की बड़ी सफलता के बाद, भारतीय एनीमेशन के भी पुनरुद्धार की आशा अपेक्षा की जा रही थी। इस महावतार श्रृंखला में आठ फिल्मे अभी निर्मित होनी है। किन्तु, एनिमेटेड श्रृंखला की श्रृंखला बनती प्रतीत हो रही है। 





इस दिशा में, नेटफ्लिक्स एक डग आगे रखता दिखाई दे रहा है।  उनकी पहली एनिमेटेड पौराणिक श्रृंखला कुरुक्षेत्र की औपचारिक घोषणा इस श्रृंखला का निर्माण करती प्रतीत होती है। सफर दिनों, नेटफ्लिक्स ने अपनी इस श्रृंखला के स्ट्रीम होने की तिथि की भी घोषणा की। 





विज्ञप्ति के अनुसार यह श्रृंखला, प्रत्येक नौ-नौ एपिसोड वाले दो खंडों में विभाजित होगी। पुष्टि की गई है कि यह कड़िया कुरुक्षेत्र में महाभारत के १८ दिनों के पौराणिक संघर्ष को एक बेहद मानवीय दृष्टिकोण से दर्शाएगी ।




इस महत्वाकांक्षी परियोजना की निर्माता अनु सिक्का, कुरुक्षेत्र के महाभारत को आज के दर्शकों के लिए भावनात्मक रूप से अधिक प्रासंगिक और वर्तमान सन्दर्भ में प्रासंगिक बनाने का प्रयास कर रही है ।




कहा जा रहा है कि १० अक्टूबर से प्रारम्भ होने वाली श्रृंखला कुरुक्षेत्र, महाभारत का केवल एक ग्राफिक रूपांतरण नहीं है। यह एक मार्मिक पुनर्कल्पना है, जो इसके प्रसिद्ध पात्रों की नैतिक जटिलता और भावनात्मक गहराई की पड़ताल करती है। 





निर्माता का उद्देश्य अपने शो से महाकाव्य के कालातीत पाठों को एनीमेशन की दृश्य अपील के साथ जोड़ना है।  एक भावना जो श्रृंखला के चरित्र-आधारित दृष्टिकोण में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।





उजान गांगुली द्वारा निर्देशित और लिखित यह शो महाभारत के १८ प्रमुख योद्धाओं की कहानियों पर आधारित होगा। प्रत्येक एपिसोड में उनके आंतरिक संघर्ष, व्यक्तिगत बलिदान और दुविधाओं को प्रस्तुत किया जाएगा।





अब भविष्य बताएगा कि विष्णु के अवतारों से परिचित होने की इच्छा रखने वाला भारतीय दर्शक महाभारत के अच्छाइयों और बुराइयों से सुसज्जित योद्धा चरित्रों की नैतिक दुर्बलता और इच्छा शक्ति के अभाव को किस सीमा तक जानना चाहता है। 

क्या ताजमहल का सच सामने ला पायेगी #TheTajStory



स्वर्णिम ग्लोबल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और सीए सुरेश झा की आगामी फिल्म द ताज स्टोरी ३१ अक्टूबर २०२५ को दर्शकों के सामने होगी। निर्माता विकास राधेशाम की इस फिल्म को तुषार अमरीश गोयल ने लिखा और निर्देशित किया है। फिल्म में परेश रावल मुख्य भूमिका में हैं।





निर्माता दावा करते हैं कि उनकी यह फिल्म देश के लिए कुछ अछूती सच्चाई को उजागर करेगी। यह दर्शकों को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित स्मारक के पीछे के रहस्यों की एक रोमांचक यात्रा पर ले जाएगी । विश्व का सातवां आश्चर्य माने जाने वाले ताजमहल की संगमरमर की दीवारों और कालातीत सुंदरता के परे एक ऐसी कहानी है, जिस पर यह फिल्म सवाल उठाती है कि क्या ताजमहल वास्तव में शाहजहाँ ने बनवाया था या  यह दुनिया के आश्चर्यों में गिना जाने वाला स्मारक ऐसे राज़ छुपाए हुए है, जिन्हें इतिहास ने कभी उजागर नहीं किया?'





निर्माताओं के अनुसार उनका यह सिनेमाई अन्वेषण देश में उन मान्यताओं को चुनौती देने का साहस करता है, इस किंवदंती की नाटकीयता, गहराई और खोज के साथ उजागर करता है और दुनिया के सबसे बड़े प्रेम के प्रतीक को देखने के हमारे नज़रिए को नए सिरे से परिभाषित करता है।





परेश रावल के नेतृत्व में ज़ाकिर हुसैन, अमृता खानविलकर, स्नेहा वाघ और नमित दास जैसे दमदार कलाकारों से सजी, द ताज स्टोरी एक ज़बरदस्त सामाजिक ड्रामा के रूप में पेश की गई है जो हमारे समय के सबसे उत्तेजक सवालों में से एक को निडरता से उठाती है कि क्या स्वतंत्रता के ७९ साल बाद भी हम अभी भी बौद्धिक आतंकवाद के गुलाम हैं?





द ताज स्टोरी सिर्फ़ एक और ऐतिहासिक या ऐतिहासिक फिल्म नहीं है, बल्कि एक सिनेमाई बहस है। यह फ़िल्म इस विवादास्पद कथा में उतरती है, सामाजिक टिप्पणियों को ऐतिहासिक तथ्यों के पुनर्परीक्षण के साथ मिलाती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि यह जितनी नाटकीय है उतनी ही विचारोत्तेजक भी है। फिल्म का उद्देश्य एक संवाद शुरू करना है, जो दर्शकों को सवाल करने, चिंतन करने और संभवत इतिहास और स्वतंत्रता दोनों को देखने के अपने नज़रिए को बदलने के लिए प्रेरित करे। 

Thursday, 25 September 2025

मानो या न मानो, क्या कोई १४ हजार साल से जीवित रह सकता है ?



निर्माता विजय एम् जैन की योगेश वी पगारे निर्देशित फिल्म मानो या न मानो ७ नवंबर २०२५ को प्रदर्शित होगी। हिंदी फिल्म मानो या न मानो, हॉलीवुड की २००७ में प्रदर्शित क्लासिक विज्ञानं फंतासी ड्रामा फिल्म द मैन फ्रॉम अर्थ की आधिकारिक रीमेक फिल्म है।





रिचर्ड शेंकमैन निर्देशित फिल्म द मैन फ्रॉम अर्थ की पटकथा अपनी काल्पनिक कथा पर पटकथा जेरोम बिग्बी ने अपनी मृत्यु शैय्या पर अप्रैल १९९८ में लिखी थी। फिल्म का कथानक एक विश्ववविद्यालय के प्रोफेसर पर केंद्रित था, जो अपने मित्रों के समक्ष रहस्योद्घाटन करता है कि उसकी आयु वास्तव में ४० साल के बाद से, बढ़नी समाप्त हो गई थी। वह विगत १४ हजार साल से धरती पर रह रहा है।





हिंदी फिल्म मानो या न मानो में हितेन तेजवानी के साथ राजीव ठाकुर, शिखा मल्होत्रा, निहार  ठक्कर, पूर्णिमा नवानी, हांसी श्रीवास्तव, सजीव शुभा श्रीकर प्रमुख भूमिका में है। हॉलीवुड फिल्म का कथानक इतिहास के एक प्रोफेसर की विदाई के लिए उसके घर पहुंचे दोस्तों के वार्तालाप के साथ आगे बढ़ता जाता है। 





हॉलीवुड फिल्म इसीलिए क्लासिक मानी गई, क्योंकि यह फिल्म ड्राइंग रूम में बैठे लोगों के मध्य प्रोफेसर के रहस्योद्घाटन को लेकर प्रोफेसर और उसके साथियों के मध्य बौद्धिक वार्तालाप के साथ आगे बढ़ता जाता है। इसी वार्तालाप में कई सनसनीखेज खुलासे भी होते जाते है। इन्ही से फिल्म में दर्शकों की उत्सुकता बढ़ती चली जाती थी। यही कारण था कि फिल्म द मैन फ्रॉम अर्थ ने दुनिया भर में कई पुरस्कार जीते थे। २०१७ में इस फिल्म का सीक्वल द मैन फ्रॉम अर्थ होलोसने प्रदर्शित हुई।  





फिल्म मानो या न मानो के निर्देशक योगेश पगारे का दावा है कि उन्होंने हॉलीवुड के कथानक को हिंदी सिनेमा के अनुरूप लिखा है।  यह जानना रोमांचक होगा कि क्या वास्तव में कोई व्यक्ति १४ हजार साल से जीवित रह सकता है?  किन्तु, प्रश्न यह है कि संवादों पर आधारित इस फिल्म की रोचकता कितनी बन पाएगी तथा हिंदी दर्शक इस संवाद कथा से प्रभावित होंगे? अब इसका उत्तर तो ७ नवंबर को ही मिल पायेगा। 

Wednesday, 24 September 2025

क्यों फ्लॉप हुई जॉय मुख़र्जी और सायरा बानू की साज़ और आवाज़



सुबोध मुखर्जी निर्देशित संगीतमय प्रेम कथानक वाली हिंदी फिल्म साज़ और आवाज़ में जॉय मुखर्जी, सायरा बानो, मुमताज, पद्मा खन्ना, कन्हैयालाल, असित सेन और लीला मिश्रा ने अभिनय किया था। जॉय मुख़र्जी और सायरा बानू की रोमांटिक जोड़ी बनी थी। इस फिल्म का महूरत ४ फरवरी १९६२ को हुआ था।

 

फिल्म साज़ और आवाज़ का क्लैप १९६२ में दिलीप कुमार के हाथों संपन्न हुआ था।  फिल्म के निर्माता और निर्देशक सुबोध मुख़र्जी हिंदी फिल्म उद्योग के स्थापित नाम थे। उन्होंने, साज़ और आवाज़ से पूर्व मुनीमजी, पेइंग गेस्ट, लव मैरिज, जंगली और अप्रैल फूल जैसी सुपरहिट फ़िल्मों का  निर्देशन किया था। इसके बावजूद, फिल्म साज़ और आवाज़ को पूरी होने में चार साल लग गए। यह फिल्म १९६६ में प्रदर्शित हुई। इससे स्पष्ट है कि फिल्म उद्योग कितना आशंकाओं भरा है। कोई फिल्म समय पर बन पाएगी या नहीं, कहा नहीं जा सकता।

 

साज़ और आवाज़ एक संगीतमय प्रेम कथानक वाली फिल्म थी। प्रतिभाशाली गायक राजेश और दक्ष नृत्यांगना गीता एक दूसरे से मिलते हैं और दोनों में प्रेम हो जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों की जोड़ी स्वर्ग में बनी है कि तभी एक रहस्य उनके जीवन में उथलपुथल ला देता है।

 

इस फिल्म का संगीत नौशाद ने दिया था। गीत खुमार बाराबंकवी ने लिखे थे। इन गीतों को मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर, आशा भोंसले और सुमन कल्याणपुर ने गाया था। फिल्म के अधिकतर गीत श्रोताओं के होंठों पर गूंजते थे। साज हो तुम आवाज़ हूँ मैं पर सायरा बानू का नृत्य दर्शनीय था। इसके बाद भी यह फिल्म बड़ी फ्लॉप हो गई।

 

यह फिल्म १९६० के दशक की म्यूजिकल थ्रिलर फिल्मों की श्रृंखला में लगती थी। क्योंकि, इससे पूर्व की सुबोध मुख़र्जी निर्देशित फिल्मों में थ्रिलर का रोमांस और संगीत के साथ मिश्रण नहीं दिखाई देता था। यह शैली विजय आनंद और राज खोसला की प्रेरणा लगती है। 

 

साज़ और आवाज़, सायरा बानू के फिल्म जीवन की तीसरी फिल्म थी। उस समय तक सायरा ने जंगली (१९६१) के बाद फ्लॉप शादी (१९६२) हुई थी। साज़ और आवाज़, जब १९६६ में प्रदर्शित हुई, उस समय तक सायरा बानू  की शम्मी कपूर के साथ ब्लफमास्टर, राजेंद्र कुमार के साथ आई मिलन की बेला, विश्वजीत के साथ अप्रैल फूल  प्रदर्शित हो कर सुपरहिट हो चुकी थी। सायरा का करियर टॉप पर था कि दिलीप कुमार बीच में आ गए।

 

फिल्म आई मिलन की बेला की शूटिंग के दौरान राजेंद्र कुमार और सायरा बानू के प्रेम के चर्चे फिल्म उद्योग में चर्चित हो रहे थे। दिलीप कुमार को यह समाचार मिला कि फिल्म के ही सेट पर राजेंद्र कुमार और सायरा बानू शादी करने वाले है।  इस शादी को रोकने के लिए दिलीप कुमार ने सायरा की अम्मी नसीम बानु के सामने सायरा से निकाह का प्रस्ताव किया। इसके बाद, सायरा और राजेंद्र कुमार के रोमांस पर तो ब्रेक लगा ही, फिल्म साज़ और आवाज़ के प्रदर्शित होने के वर्ष में सायरा  श्रीमती युसूफ खान बन गई।

 

साज़ और आवाज़,  सुबोध मुख़र्जी की अति महत्वकांक्षी फिल्म थी। उन्हें इस फिल्म के सफल होने की पूरी आशा थी।  किन्तु, फिल्म असफल हुई।  यह सुबोध मुख़र्जी के लिए बड़ा झटका था। इससे व्यथित हो कर सुबोध मुख़र्जी ने अपनी आगामी फिल्म शागिर्द को निर्देशित न करने का निर्णय सुना दिया।  इस फिल्म को समीर गांगुली ने निर्देशित किया।  किन्तु, उनकी बाद की निर्देशित फ़िल्म अभिनेत्री को बड़ी सफलता मिली।

 

साज़ और आवाज़ को विलम्ब से प्रदर्शित होने का नुकसान उठाना पड़ा। इस समय तक जॉय मुख़र्जी की फिर वही दिल लाया हों, इशारा, ज़िद्दी, बहु बेटी, लव इन टोक्यो और यह ज़िन्दगी कितनी हसीं है तथा सायरा बानू  की ब्लफमास्टर, आई मिलन की बेला, अप्रैल फूल जैसी फिल्मे प्रदर्शित हो कर हिट हो चुकी थी। इन फिल्मों की सफलता ने साज़ और आवाज़ के प्रति  दर्शकों में यह दिल मांगे मोर पैदा कर दिया था। परिणामस्वरुप साज़ और आवाज़ कमतर साबित हुई और बॉक्स ऑफिस पर  दर्शकों को आकर्षित न कर सकी।  यह फिल्म बड़ी फ्लॉप सिद्ध हुई।

Tuesday, 23 September 2025

#Papakat का पुचका प्रेमियों को पूजा सरप्राइज़-पुचका खाओ- फुकेट जाओ



इस दुर्गापूजा उत्सव के माहौल में, पुचका प्रेमियों के लिए एक स्वादिष्ट अनोखा टेस्ट और जुड़ रहा है, क्योंकि पापाकैट ने अपने आकर्षक टैगलाइन पुचका खाओ, फुकेत जाओ के साथ अपना अनोखा पूजा पुचका ऑफर पेश किया है। यह रोमांचक प्रतियोगिता पुचका खाने के शौकीनों को अपने पसंदीदा पुचका का स्वाद चखने के साथ थाईलैंड के फुकेत की मनोरम समुद्र तटों पर एक अविस्मरणीय यादगार न भूलने वाला पल बिताने का मौका भी दे रही है।





इस उत्सव में चार चाँद लगाने के लिये लोकप्रिय टॉलीवुड अभिनेत्री दर्शना बानिक को इस प्रतियोगिता का नया एम्बेसडर घोषित किया गया है। अपनी जीवंत स्क्रीन उपस्थिति और स्टाइलिश व्यक्तित्व के लिए जानी जाने वाली, दर्शना अपने आप में अनोखी इस  प्रतियोगिता में अपना आकर्षण बिखेर रही हैं, जो कोलकाता के पसंदीदा स्नैक्स स्कोट्री को एक पसंदीदा छुट्टी के पल के साथ जोड़ता है।




मीडिया से बात करते हुए अभिनेत्री दर्शना बानिक ने कहा, "दुर्गापूजा के वो समय खुशियों भरे पल के साथ आनंद और एकजुटता का प्रतीक है। मैं पापाकैट के साथ मिलकर खुशियाँ फैलाने वाली इस प्रतियोगिता में शामिल होकर काफी खुश हूँ। यह प्रतियोगिता पुचका के शौकीन, पुचका प्रेमियों के प्रेम का जश्न मनाती है, इसके साथ ही खूबसूरत फुकेत द्वीप की यात्रा जीतने का मौका भी दे रही है। यह स्वाद और यात्रा का एक बेहतरीन मेल है!"




इस अवसर पर पापाकैट के निदेशक प्रतीक बांथिया ने कहा, "पापाकैट में हम हमेशा से रोज़मर्रा की ज़िंदगी के बीच लोगों में आपसी मस्ती और उत्साह का तड़का लगाने में विश्वास रखते हैं। इस वर्ष पूजा के दौरान पुचका प्रेमियों के लिए अनोखा ऑफर - पुचका खाओ, फुकेत जाओ के साथ, हम इस यात्रा को और भी ज्यादा रोमांच के साथ आनंद को मिलाकर कोलकाता के उत्सवी उत्साह का उत्सव मनाना चाहते हैं। यह अभियान सिर्फ़ इनामों के बीच सिमटी नहीं है, बल्कि हम इसके जरिए हमारे ग्राहकों के प्रति उनका आभार व्यक्त करने और पूजा के दिनों से लेकर आगे की सुनहरी यादगार पलों को गुजारने का मौका देने का हमारा एक प्रयास भी है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे आसपास रहनेवाले इन मेहनती पुचका वालों का समर्थन करने के उद्देश्य से यह हमारा एक सामाजिक पहल भी है। उनके स्टॉल को फेमस करके हम उनके लिए और अधिक व्यवसाय लाने और त्योहारों के मौसम में उन्हें और भी अधिक कमाई करवाने में मदद करने का प्रयास भी कर रहे हैं।




प्रतियोगिता में भागीदारी का तरीका: पूजो पुचका ऑफर - पुचका खाओ, फुकेत जाओ प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए दुर्गापूजा के दौरान पुचका प्रेमियों को बस अपने पसंदीदा पुचका वाले के साथ एक मज़ेदार सेल्फी क्लिक करनी होगी, फिर सोशल मीडिया में पापाकैट के आधिकारिक पेज पर उन तस्वीरों को टैग करना होगा। टैग की गई प्रत्येक सेल्फी एक प्रविष्टि के रूप में गिनी जाएगी। खाने-पीने के शौकीन पुचका प्रेमियों को उनकी यह सेल्फी इस प्रतियोगिता के जरिए फुकेत में एक अविस्मरणीय छुट्टी बिताने की ओर एक कदम और करीब लाएगी।





पापाकैट के बारे में : पापाकैट एक समकालीन जीवनशैली और एक्सेसरीज़ ब्रांड है, जो अपने स्टाइलिश और कार्यात्मक बैग्स के लिए जाना जाता है। जो आधुनिक डिज़ाइन को रोज़मर्रा की व्यावहारिकता के साथ जोड़ते हैं। आकर्षक क्रॉसबॉडी से लेकर स्मार्ट वॉलेट तक, हर बैग स्लीक डिज़ाइन और रोज़मर्रा की व्यावहारिकता का मिश्रण है। सावधानी से तैयार, टिकाऊ और आकर्षक कीमत पर। पापाकैट आपको ऐसे एक्सेसरीज़ प्रदान करता है जो अपने स्टाइलिश लुक के कारण दिखने में जितने अच्छे लगते हैं, उतने ही आकर्षक भी होते हैं। 

#Masti4 के टीज़र में गायब मस्ती !



इक्कीस साल पहले, ९ अप्रैल २००४ को प्रदर्शित सेक्स कॉमेडी फिल्म मस्ती, नौ साल बाद, १३ सितम्बर २०१३ को ग्रैंड मस्ती बनी और इसके तीन साल बाद, १५ जुलाई २०१६ को ग्रेट ग्रैंड मस्ती बन गई। इस तीसरी फिल्म की सेक्स कॉमेडी में हॉरर भी शामिल हो गया था। अब नौ साल बाद, २१ नवम्बर २०२५ को यह मस्ती ४ शीर्षक के साथ प्रदर्शित हो रही है।





मस्ती (२००४) तीन दोस्तों मीत, प्रेम और अमर की अपनी पत्नियों को धोखा दे कर दूसरी महिलाओं से इश्क लड़ाने की दास्तान थी। इन भूमिकाओ को परदे पर  क्रमशः विवेक ओबेरॉय, आफताब शिवदासानी और रितेश देशमुख ने किया था।  बाद की सभी मस्ती फिल्मों में यही तीनों अभिनेता अपने अपने चरित्र कर रहे थे। 





मस्ती श्रृंखला की उपरोक्त तीनों फिल्मों का निर्देशन इंद्रकुमार ने किया था।  पहली मस्ती में अजय देवगन की भूमिका काफी रोचक और कथानक को नया मोड़ देने वाली थी। इसके परिणामस्वरूप मस्ती बड़ी हिट फिल्म साबित हुई।  ग्रैंड मस्ती को भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छी सफलता मिली। किन्तु, तीसरी ग्रेट ग्रैंड मस्ती हॉरर मिश्रण के बाद भी दर्शकों को आकर्षित नहीं कर पाई। तीसरी मस्ती बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी और पचास करोड़ में बनी फिल्म मात्र १९ करोड़ का ग्रॉस ही कर पाई। 





अब, जबकी चौथी मस्ती प्रदर्शित होने जा रही है, जो न ग्रैंड है, न ही ग्रेट ग्रैंड।  अब यह फिल्म सिर्फ मस्ती ४ ही है। इस फिल्म का निर्देशन इंद्रकुमार के स्थान पर पहली दो मस्ती लेखक मिलाप ज़ावेरी कर रहे है। मिलाप की मस्ती ४ में नया क्या है ? फिल्म के जारी ट्रेलर से ऐसा कुछ नया प्रतीत नहीं होता। वही घिसी हुई कॉमेडी है। संवाद घटिया स्तर के द्विअर्थी है। विवेक ओबेरॉय, रितेश देशमुख और आफताब शिवदासानी अतिरेक से भरा अभिनय कर रहे है।





मस्ती ४ में, पुरुष चरित्रों की सेक्स मस्ती का निशाना श्रेया शर्मा, एल्नाज नौरोजी और रूही सिंह बनी दिखाई देंगी।  यो तो मिलाप ज़ावेरी दावा करते हैं कि वह इंद्रकुमार की विरासत को आगे बढ़ाना चाहते हैं। किन्तु, ट्रेलर देख कर ऐसा प्रतीत नहीं होता। 

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की इंडस्ट्री हिट अभिनेत्री #KalyaniPriyadarshan !



मलयालम फिल्म अभिनेत्री कल्याणी प्रियदर्शन ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने, न केवल सबसे अधिक ग्रॉस करने वाली पहली नारी प्रधान भूमिका वाली  फिल्म दी, बल्कि इसके साथ ही एक इंडस्ट्री हिट फिल्म भी दे दी है। 




सेलुलॉइड के भयावने संसार में हास्य का मिश्रण कर सुपरहिट फिल्म देने वाले मलयाली फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन की बेटी कल्याणी ने विशुद्ध भयावनी फिल्म लोक पार्ट १ चंद्रा को बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट बना दिया है। अभिनेता दुलकर सलमान की फिल्म निर्माण संस्था वेफेअर के अंतर्गत निर्मित फिल्म लोक पार्ट १ चंद्रा के निर्माण में ३० करोड़ व्यय हुए थे। यह फिल्म अब तक पूरी दुनिया में २७५ करोड़ का कुल व्यवसाय कर चुकी है।  और अभी भी बॉक्स ऑफिस पर भीड़ खींच रही है।




कल्याणी प्रियदर्शन की फिल्म लोक पार्ट १ चंद्रा इस दृष्टि से भिन्न है कि मलयाली फिल्म इंडस्ट्री को अभी तक किसी अभिनेत्री ने इतनी बड़ी हिट फिल्म अपने बल पर नहीं दी है।  कल्याणी ने इस मिथ को असत्य घोषित कर दिया है। फिल्म लोक पार्ट १, न केवल नारी प्रधान हिट बन गई, बल्कि इस फिल्म ने मोहनलाल और पृथ्वीराज की इसी साल की हिट फिल्म लूसिफर पार्ट २ के सबसे अधिक २६८ करोड़ के कुल व्यवसाय को भी पीछे धकेल दिया है।  




यहाँ बताते चलें कि कल्याणी के पिता प्रियदर्शन ने, मोहनलाल के साथ हेलो माय डिअर रॉंग नंबर, थालवट्टम, कालापानी, ओप्पम, आदि सुपरहिट फ़िल्में दी है। प्रियदर्शन, अपनी सफलता का श्रेय अपने बचपन के मित्र मोहनलाल के सुपरस्टार को देते है। समाचार यह है कि प्रियदर्शन अपने फिल्म जीवन की १००वी फिल्म मोहनलाल के साथ बनाएंगे। वह कल्याणी को अभिनय के सन्दर्भ में मोहनलाल के अभिनय को देखने की सलाह देते है। 




कल्याणी प्रियदर्शन की फिल्म लोक पार्ट १ इंडस्ट्री हिट ही नहीं, दर्शक संख्या के मामले में भी कीर्तिमान स्थापित कर रही है। अभी तक इस फिल्म के ५० लाख टिकट बिक चुके है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जैसा प्रदर्शन कर रही  है, उससे फिल्म की टिकट बिक्री की संख्या में वृद्धि ही होगी। 





लोक पार्ट १ चंद्रा, केवल कल्याणी की पहली सुपरहिट महिला प्रधान फिल्म या मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की इंडस्ट्री हिट फिल्म नहीं है, बल्कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा में मलयालम फिल्मों के बढ़ते प्रभाव  को भी इंगित करती है। यह फिल्म प्राचीन लोक कथाओं के आधुनिक सन्दर्भों के साथ सफल मिश्रण किये जाने की राह भी खोलती प्रतीत होती है। अब देखने वाली बात होगी कि  लोक पार्ट १ का दूसरा भाग बॉक्स ऑफिस पर किस प्रकार की छाप छोड़ती है!

Monday, 22 September 2025

वी शांताराम को अपनी आँखों के अंधकार में दिखे थे नवरंग के रंग !



घटना १९५७ की है। उस समय, फिल्म निर्माता और निर्देशक वी शांताराम फिल्म दो आँखे  बारह हाथ की शूटिंग कर रहे थे।  यह फिल्म, महाराष्ट्र में उस समय राजा द्वारा शासित स्वतंत्रपुर की खुली जेल के प्रयोग से प्रेरित थी। फिल्म का कथानक हॉलीवुड की फिल्म १९५२ ने निर्मित फिल्म माय सिक्स कन्वीक्ट्स पर आधारित भी बताया जाता है। वी शांताराम की फिल्म भी छह कैदियों के अपने जेल वार्डन से संबंधों का कथानक थी। फिल्म में शांताराम ने जेल वार्डन आदिनाथ की भूमिका की थी।





हाँ तो बात फिल्म दो आँखे बारह हाथ की शूटिंग की हो रही थी।  इस फिल्म में क्लाइमेक्स में वार्डन आदिनाथ को कैदियों को बचाने के लिए एक बैल से लड़ना पड़ता है। इस लड़ाई में आदिनाथ बुरी तरह से घायल हो जाता है और अंत में उसका देहांत हो जाता है। किन्तु, यह लड़ाई अभिनेता वी शांताराम के लिए घातक साबित हुई थी। उनकी एक आँख बुरी तरह से चोटिल हो गई थी।  आँखों की रोशनी लगभग ख़त्म हो चली थी। उनका इलाज हो रहा था। 





गेवाकलर में बनाई गई फिल्म नवरंग का प्रारम्भ श्वेत श्याम होता है। उस समय वी शांताराम, नवरंग के निर्माण के कारणों को बताते हैं। वह बताते हैं कि कैसे उन्हें दो ऑंखें बारह हाथ में  बैल से लड़ाई के दौरान एक आँख में चोट लग जाती है। इस इलाज के दौरान उनकी आँखे चटख रंग देख रही थी।  उस समय वह सोचते थे कि क्या वह ठीक हो पाएंगे! किन्तु, चिकित्सकों के प्रयासों से शांताराम ठीक हो गए और इसके साथ ही नवरंग का जन्म हुआ। 





वी. शांताराम निर्देशित फ़िल्म नवरंग (१९५९) अपने जीवंत टेक्नीकलर के समृद्ध प्रयोग के लिए प्रसिद्ध है।  यह फिल्म शांताराम के दर्शकों को चटकीले रंगों का प्रयोग करने के अपने दृष्टिकोण को समझाते है, तभी फ़िल्म मोनोक्रोम से रंगों के भंडार में परिवर्तित हो जाती है।  उस समय का यह प्रयोग अपने आप में अनूठा अनुभव था। शांताराम ने रंगों की दुनिया का  प्रयोग फिल्म के नायक कवि दिवाकर की कल्पना और काल्पनिक प्रेमिका मोहिनी (जो वास्तव में उसकी पत्नी जमुना ही है) के नृत्य दृश्यों में उपयोग किया गया था। 





वी शांताराम ने, जमुना उर्फ़ मोहिनी के नृत्य गीतों आधा है चन्द्रमा, जा रे तू नटखट, तू छुपी है कहाँ, आदि गीतों में इस प्रमुखता से किया गया था कि संध्या के नृत्य और उनके वस्त्राभरण आकर्षक ही नहीं, आँखों को दावत देने वाले लगते थे। यही शांताराम का आँखों के इलाज के दौरान रंगों का दर्शन था।  फिल्म को, शांताराम की पत्नी संध्या की नृत्य प्रतिभा का भरपूर उपयोग किया गया था। इससे फिल्म कवि दिवाकर की कविताओं की प्रेरणा मोहिनी अपने मोहक रूप में दिखाई देती थी। ऐसी मोहनी की कल्पना कर कौन कवि नहीं बन जायेगा! 




प्रारम्भ में वी शांताराम ने इस कथानक पर श्वेत श्याम में मराठी फिल्म बनाने का निर्णय लिया था। फिल्म में संध्या के साथ मराठी फिल्म अभिनेता अरुण समाइक प्रमुख भूमिका में लिए जाने थे।  किन्तु, बाद में शांताराम में फिल्म नवरंग के रूप में रंगीन माध्यम से हिंदी में बनाने का निर्णय लिया।  फिल्म में संध्या तो बनी रहीं, किन्तु, नायक महिपाल बना दिए गए। 






फिल्म के संगीतकार, राजकमल कलामंदिर के स्थाई संगीतकार वसंत देसाई थे।  किन्तु, संगीत निर्माण के समय वसंत देसाई और वी शांताराम के मध्य रचनात्मक मत वैभिन्य अर्थात क्रिएटिव डिफरेंस पैदा हो गए।  वसंत देसाई ने फिल्म छोड़ दी। उनका स्थान सी रामचंद्र ने ले लिया। रामचंद्र चितलकर ने भी फिल्म के कथानक के अनुरूप संगीत रचना की। फिल्म की सफलता में रामचंद्र के संगीत का बड़ा योगदान था।






यहाँ आपको बताते चलें कि संध्या पर फिल्माए गए गीत चल जा रे नटखट गीत में संध्या के साथ नृत्य कर रहे मुखौटा पहने पुरुष नर्तक आज के अभिनेता जीतेन्द्र बने थे।  इस फिल्म के बाद ही, शांताराम ने जीतेन्द्र को फिल्म गीत गाया पत्थरों ने में अपनी बेटी राजश्री का नायक बनाया।    

#YRF ने जारी किया #RaniMukerji की फिल्म #Mardaani3 का पोस्टर

 


यशराज फिल्म्स ने नवरात्रि के शुभ अवसर पर मर्दानी 3 का नया पोस्टर जारी किया। यह पोस्टर अच्छाई और बुराई के बीच होने वाले महासंग्राम को दर्शाता है!




मर्रादानी ३ में रानी मुखर्जी एक बार फिर साहसी पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय की अपनी बेहद पसंदीदा भूमिका में हैं। ऐगिरि नंदिनी के शक्तिशाली भक्ति मंत्र के साथ रिलीज़ पोस्टर माँ दुर्गा की शक्ति का उत्सव मनाता है। जब माँ राक्षस महिषासुर का वध करती हैं।  यह संकेत है कि कैसे शिवानी को एक क्रूर मामले को सुलझाने के लिए अपने पूरे संकल्प की आवश्यकता होगी और इसके लिए अपनी जान भी जोखिम में डालनी होगी।





मर्दानी सीरीज़ की फ़िल्में, जो भारत की एकमात्र हिट महिला प्रधान फिल्म फ्रैंचाइज़ी है, ने अपने कठोर कथानकों से दर्शकों के दिलों को लगातार छुआ है। यह फिल्म समाज को अपराध के प्रति उनकी आँख खोलने का काम करती हैं और सभी को देश में हर दिन होने वाले जघन्य अपराधों को स्वीकार करने के लिए विवश करती हैं।





मर्दानी श्रृंखला फिल्म का प्रारंभ २०२४ में प्रदर्शित फिल्म मर्दानी से हुआ था। मर्दानी और मर्दानी २ (२०१९) जैसी दो बड़ी हिट फिल्मों के बाद, यह तीसरा अध्याय और भी गहरा और गंभीर होने का वादा करता है, जो दर्शकों को एक बेहतरीन नाटकीय अनुभव प्रदान करेगा।





अभिराज मीनावाला द्वारा निर्देशित और आदित्य चोपड़ा द्वारा निर्मित, वाईआरएफ की प्रतिष्ठित महिला-पुलिस फ्रैंचाइज़ी की तीसरी किस्त २७ फरवरी २०२६ को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के लिए तैयार है।

#KantaraChapter1 की भव्यता का प्रदर्शन करता हिंदी ट्रेलर



दादा साहब फाल्के #Mohanlal की फिल्म Drishyam3 की शूटिंग शुरू

  
















#HrithikRoshan जारी करेंगे #KantaraChapter1 का हिंदी ट्रेलर



कन्नड़ फिल्म अभिनेता ऋषभ शेट्टी द्वारा निर्देशित और अभिनीत फिल्म कंटारा: चैप्टर १ का  कथानक  तटीय कर्नाटक के कदंब राजवंश काल में स्थापित लोककथाओं की पौराणिक उत्पत्ति पर आधारित है। इस दृष्टि से यह फिल्म २०२२ में प्रदर्शित ऋषभ शेट्टी द्वारा ही अभिनीत और निर्देशित फिल्म कांतारा की पूर्व कथा फिल्म है। पूर्व कथा फिल्म अर्थात प्रीक्वेल में ऋषभ शेट्टी ही नायक है और फिल्म का निर्देशन भी कर रहे है। 




आज २२ सितम्बर को दोपहर १२.४५ पर फिल्म के भिन्न भाषाओँ में ट्रेलर अनावृत होंगे। चार भाषाओँ में जारी हो रहे इन ट्रेलरों को हिंदी ट्रेलर ऋतिक रोशन, तेलुगु ट्रेलर प्रभास, तमिल ट्रेलर शिव कार्तिकेयन और मलयालम ट्रेलर पृथ्वीराज सुकुमारन जारी करेंगे।  





भिन्न भाषाओँ में ट्रेलर रिलीज़ की सूचना देते हुए फिल्म के निर्देशक ऋषभ शेट्टी और निर्माता होम्बले फिल्म्स ने एक्स पर पोस्ट किया। 





तेलुगु ट्रेलर प्रभास द्वारा जारी किये जाने की सूचना देते हुए ऋषभ शेट्टी ने एक्स पर लिखा- जब एक दिग्गज की दहाड़ एक विद्रोही सितारे की शक्ति से मिलती है। कांतारा चैप्टर १ का तेलुगु ट्रेलर प्रतिष्ठित विद्रोही सितारे प्रभास द्वारा लॉन्च किया जाएगा।





हिंदी ट्रेलर बॉलीवुड अभिनेता हृथिक रोशन द्वारा किये जाने की सूचना देते हुए ऋषभ शेट्टी ने एक्स पर लिखा - जब प्रकृति की शक्ति का सामना एक सुपरस्टार की आग से होता है। कांतारा चैप्टर १ का हिंदी ट्रेलर अद्भुत हृथिक रोशन सर द्वारा जारी किया जाएगा। और भी किंवदंतियाँ। और भी भाषाएँ। 





फिल्म का मलयालम ट्रेलर मलयाली फिल्म अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन द्वारा जारी किये जाने की सूचना देते हुए ऋषभ शेट्टी ने एक्स पर लिखा - लोककथाओं की धरती से, जहाँ कहानियाँ साँस लेती हैं और किंवदंतियाँ विचरण करती हैं. कांतारा चैप्टर १ का मलयालम ट्रेलर स्वयं उस्ताद [पृथ्वीराज सुकुमारन द्वारा जारी किया जाएगा। दिव्यता में निहित एक गाथा अब हर जुबान पर बोलती है। गर्जना फिर से शुरू! कांतारा की दहाड़ अब दुनिया भर में गूंजेगी। 





फिल्म का तमिल  ट्रेलर तमिल फिल्म अभिनेता शिवकार्तिकेयन द्वारा जारी किये जाने की सूचना देते हुए ऋषभ शेट्टी ने एक्स पर लिखा - विश्वास, क्रोध और आग की कहानी... एक सितारा दहाड़ को आगे बढ़ाता है। शक्तिशाली अभिनेता शिवकार्तिकेयन कांतारा चैप्टर १  का तमिल ट्रेलर जारी करते हैं। और किंवदंतियाँ। और भाषाएँ। दहाड़ बढ़ती ही जा रही है।

Sunday, 21 September 2025

#RelianceEntertainment रिलीज़ होगी #DeviChowdhurani



देवी चौधुरानी : बैंडिट क्वीन ऑफ़ बंगाल, निर्देशक शुभ्रजीत मित्र की बांगला भाषा की पीरियड एक्शन-एडवेंचर फिल्म का शीर्षक है। बंकिम चंद्र चटर्जी के लिखे और १८८४ में प्रकाशित बांगला उपन्यास देबी चौधुरानी पर आधारित यह फिल्म एडीटेड मोशन पिक्चर्स (यूएसए) के बैनर तले अनिरुद्ध दासगुप्ता और अपर्णा दासगुप्ता द्वारा निर्मित और एचसी फिल्म्स लिमिटेड (यूके) के बैनर तले हसन चौधरी द्वारा सह-निर्मित है।





इस फिल्म में, श्राबंती चटर्जी ने देवी चौधुरानी की मुख्य  भूमिका की हैं। उनके साथ प्रोसेनजीत चटर्जी (भवानी चरण पाठक), सब्यसाची चक्रवर्ती (हरबल्लभ रे), एलेक्स ओ'नेल (कप्तान मुनरो), अर्जुन चक्रवर्ती (रंगराज), बिब्रिती चटर्जी (निशि), किंजल नंदा (ब्रजेश्वरी), दर्शन बनिक (सागर), कार्ल हार्टे और डॉ. प्रियदर्शनी जी रॉय (दीबा) की महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।





फिल्म देवी चौधुरानी, १८वी शती के कालखंड की, भोली-भाली प्रफुलमुखी के शक्तिशाली डाकू रानी देवी चौधुरानी बनने की है। बंगाल की रॉबिनहुड की तरह विख्यात देवी चौधुरानी अंग्रेज सत्ता के विरुद्ध भी हथियार उठाती है। 





शरतचंद्र चटर्जी के इस उपन्यास पर कई फिल्में बनाई गई है। किन्तु, यह सभी बांगला भाषा में भी बनाई गई।  इस उपन्यास पर पहली बार फीचर फिल्म देवी चौधुरानी १९४९  में बनाई गई थी। जिसमें सुमित्रा देवी ने देवी चौधुरानी की मुख्य भूमिका निभाई थी।





इसके बाद,  दीनन गुप्ता द्वारा निर्देशित और सुचित्रा सेन की मुख्य भूमिका में देबी चौधुरानी का निर्माण १९७४ में किया गया था। फिल्म में रंजीत मल्लिक ने ब्रजेश्वर, काली बनर्जी ने हरबल्लभ और बसंत चौधरी ने भवानी पाठक की भूमिका निभाई थी।





देवी चौधुरानी की पटकथा स्वयं निर्देशक ने लिखी है। उन्होंने ही फिल्म के संवाद भी लिखे है।  बजट की दृष्टि से यह फिल्म सबसे महंगी बांगला फिल्म कही जा सकती है। इस फिल्म का कुल बजट २५ करोड़ बताया गया है। 





इस फिल्म का वितरण रिलायंस एंटरटेनमेंट द्वारा किया जा रहा है। फिल्म दुर्गा पूजा के उत्सव के दौरान प्रदर्शित की जाएगी।  समाचार है कि फिल्म देवी चौधुरानी को बांगला भाषा के अतिरिक्त तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी में भी प्रदर्शित किया जायेगा।  

#Mohanlal को २०२३ का दादा साहब फाल्के पुरस्कार



सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आज २० सितंबर २०२५ को घोषणा की कि मलयालम फिल्म  अभिनेता मोहनलाल विश्वनाथन नायर (उर्फ़ मोहनलाल) को २०२३ का भारत का सर्वोच्च फिल्म सम्मान, दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।





यह पुरस्कार विभिन्न भाषाओं में उनकी ३४० से अधिक फिल्मों में, उनके चार दशक के श्रेष्ट  फिल्म जीवन को मान्यता देने वाला है। इस पर अभिनेता को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अतिरिक्त मलयालम फिल्म अभिनेता ममूटी और बॉलीवुड  फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार जैसी उद्योग जगत की हस्तियों ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा और सांस्कृतिक प्रभाव के लिए बधाई दी।





यह पुरस्कार २३ सितंबर को ७१ वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रदान किया जाएगा। इसके बाद, मोहनलाल निर्देशक अदूर गोपालकृष्णन के बाद यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले दूसरे मलयाली फिल्म व्यक्तित्व  बन जाएँगे।





मोहनलाल को, दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिए जाने की घोषणा के साथ ही, मोहनलाल को सभी ओर से बधाइयों का ताँता लग गया। तेलुगु फिल्म अभिनेता चिरंजीवी ने मोहनलाल के साथ अपने चित्र को लगते हुए लिखा- मेरे प्यारे लालेत्तन (मोहनलाल को इस सम्बोधन  से भी बुलाया जाता है), प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई। आपकी उल्लेखनीय यात्रा और उत्कृष्ट अभिनय ने भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया है। सचमुच, यह एक सराहनीय सम्मान है।





तेलुगु फिल्म अभिनेता जूनियर एनटीआर ने लिखा- महान कलाकार मोहनलाल सर को प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई। भारतीय सिनेमा के एक सच्चे प्रतीक, वे इस सम्मान के पूर्णतः हकदार हैं।





मलयालम फिल्मों के एक अन्य प्रतिष्ठित अभिनेता माम्मूटी ने लिखा- एक सहकर्मी, एक भाई और एक कलाकार से कहीं बढ़कर, जिसने दशकों से इस अद्भुत सिनेमाई यात्रा पर कदम रखा है। दादा साहब फाल्के पुरस्कार सिर्फ़ एक अभिनेता के लिए नहीं, बल्कि एक सच्चे कलाकार के लिए है जिसने सिनेमा को जिया और साँस ली है। लाल, मुझे आप पर बहुत खुशी और गर्व है। आप सचमुच इस ताज के हक़दार हैं।




मलयालम फिल्म अभिनेता दुलकर सलमान ने लिखा- हमारे अपने लालेत्तन मोहनलाल को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर बधाई! मलयाली और भारतीय सिनेमा के लिए यह सचमुच गर्व का क्षण है! 




फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन ने लिखा - मेरे प्रिय मित्र लाल को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई। इस सम्मान का इससे बड़ा हकदार अन्य कोई नहीं है। देश को आपकी असाधारण प्रतिभा का जश्न मनाते देखकर गर्व महसूस हो रहा है। एक अत्यंत योग्य दिग्गज को पहचानने और सम्मानित करने के लिए जूरी का आभारी हूँ।





अक्षय कुमार ने लिखा - हार्दिक बधाई, मोहनलाल सर, दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर। जब भी मुझे आपसे मिलने या आपका काम देखने का मौका मिला, मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अब तक के सबसे महान अभिनय विद्यालय की अग्रिम पंक्ति में बैठा हूँ। यह सम्मान पूरी तरह से आपका अधिकार है। सम्मान और प्यार। 





बॉलीवुड अभिनेता रितेश देशमुख ने लिखा - मोहनलाल सर को सिनेमाई उत्कृष्टता के लिए प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई! आपके सूक्ष्म, भावपूर्ण अभिनय ने पीढ़ियों को प्रेरित किया है। एक सच्चे दिग्गज, भारत के प्रिय प्रतीक के रूप में आपकी विरासत सदैव चमकती रहेगी!





फिल्म निर्देशक रामगोपाल वर्मा की टिप्पणी अजीबोगरीब थी।  उन्होने X  पर लिखा- मुझे दादा साहेब फाल्के के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं पता, सिवाय इसके कि उन्होंने पहली फ़िल्म बनाई थी, जिसे मैंने नहीं देखा और न ही मैं किसी ऐसे व्यक्ति से मिला जिसने इसे देखा हो, लेकिन मैंने जो देखा और जाना है, उसके आधार पर मुझे लगता है कि दादासाहेब फाल्के को मोहनलाल पुरस्कार दिया जाना चाहिए।




मोहनलाल ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद् देते हुए लिखा - दादा साहब फाल्के पुरस्कार पाकर मैं बेहद विनम्र और गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के स्नेहपूर्ण शब्दों और आशीर्वाद के लिए मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने मुझे प्रोत्साहन और आनंद से भर दिया है। मैं सिनेमा की कला और उन सभी लोगों का सदैव ऋणी रहूँगा जिनकी प्रेरणा और सहयोग ने मेरे सफ़र को रोशन किया। 

चुप रिवेंज ऑफ़ द आर्टिस्ट : आर बल्कि की पहली क्राइम थ्रिलर सनी देओल के साथ



चीनी कम,  पा, षमिताभ, कि एंड का और पैडमैन जैसी रोचक कथानक वाली फ़िल्में निर्देशित करने वाले लेखक निर्देशक आर बल्कि की सनी देओल के साथ पहले फिल्म चुप : रिवेंज ऑफ़ द आर्टिस्ट का कथानक भी अत्यंत रोचक था। इस साइकोलॉजिकल थ्रिलरक्राइम  फिल्म मुंबई की फिल्म नगरी बॉलीवुड की पृष्ठभूमि पर थी। एक सीरियल किलर एक के बाद एक फिल्म समीक्षकों की हत्या करता जाता  है, जो पैसा लेकर किसी फिल्म को अच्छा या न मिलने पर खराब लिखते है।  





सनी देओल की पुलिस अधिकारी की भूमिका वाली फिल्म चुप रिवेंज ऑफ़ द आर्टिस्ट २३ सितम्बर २०२५ को प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म में बॉलीवुड और दक्षिण के कई प्रतिभाशाली कलाकार थे।  इनमे दुलकर सलमान, श्रेया धन्वन्तरि, पूजा भट्ट, आदि जैसे डेढ़ दर्जन सितारों के  नाम उल्लेखनीय है। किन्तु, दर्शकों को कदाचित फिल्म का कथानक असामान्य सा लगा कि कोई इतनी छोटी बात पर समीक्षकों की ह्त्या कर सकता है। कदाचित यही कारण था कि लम्बी स्टारकास्ट के बाद भी, चुप के प्रति दर्शक चुप रहे और फिल्म फ्लॉप हो गई।  इस फिल्म ने १० करोड़ के छोटे बजट के विरुद्ध अपने निर्माताओं को १३.२४ करोड़ का ग्रॉस ही वापस किया। 





इस फिल्म का घटनाक्रम किसी लगातार हत्याकांड पर आधारित नहीं था। किन्तु, आर बल्कि ने फिल्म में, गुरुदत्त की फिल्म कागज़ के फूल का उल्लेख फ्लॉप फिल्म बनाने वाले लेखक निर्देशक के मुंह  से करवा कर किया था।  बल्कि भी निजी जीवन में गुरुदत्त से प्रभावित थे।  उन्होंने अपनी फिल्म चुप रिवेंज ऑफ़ द आर्टिस्ट का टीज़र गुरुदत्त के जन्मदिन के सप्ताहांत में रिलीज़ कर, गुरुदत्त की फिल्म कागज़ के फूल को श्रद्धांजलि दी थी।  फिल्म में गुरुदत्त की एक अन्य क्लासिक फिल्म प्यासा का ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है का उपयोग किया था। 




बॉलीवुड के फिल्म  समीक्षकों को केंद्र में रख कर बनी फिल्म चुप रिवेंज ऑफ़ द आर्टिस्ट को, फिल्म समीक्षकों ने सामान्य श्रेणी में रखा था।  इंडिया टुडे के समीक्षक ने इस फिल्म को देखने की संस्तुति की। पिंकविला ने इसे अनोखी फिल्म बताया किन्तु नॉट क्रिटिक प्रूफ के साथ।  एक समीक्षक ने इसे ब्रिटिश फिल्म थिएटर ऑफ़ ब्लड से प्रेरित बताया।  बॉलीवुड हंगामा ने इसे इसके कलाकारों के अभिनय के कारण सराहा। द गार्डियन के समीक्षक ने फिल्म को पांच में से चार सितारे देते हुए लिखा - चुप ने  ने केवल फिल्म निर्माता/आलोचक संबंध के तनाव को सफलतापूर्वक उजागर किया है, बल्कि यह भी बखूबी समझा है कि अपनी उंगली को सबसे अच्छी सुई पर कहां रखना है। आईएमडीबी पर इसे १० में ७.५ की रेटिंग दी गई है।




फिल्म चुप रिवेंज ऑफ़ द आर्टिस्ट से न केवल गुरुदत्त की फिल्म को श्रद्धांजलि दी गई थी, बल्कि भारतीय सिनेमा के ११० साल और अमिताभ बच्चन के ८० साल को भी आंकलित किया गया था। यहाँ बताते चलें कि आर बल्कि की पहली निर्देशित फिल्म चीनी कम के अतिरिक्त फिल्म पा और षमिताभ के नायक भी अमिताभ बच्चन ही थे। जहाँ, अमिताभ बच्चन बल्कि की पहली तीन फिल्मों के नायक थे, वही बाद की तीन फिल्मों कि एंड का, पैडमैन और चुप रिवेंज ऑफ़ द आर्टिस्ट में उनका कैमिया था। उनकी विगत प्रदर्शित फिल्म घूमर के नायक अमिताभ बच्चन के बेटे और फिल्म पा में अमिताभ बच्चन के चरित्र के पिता अभिषेक बच्चन थे। 




इस फिल्म में सनी देओल और पूजा भट्ट १९९५ में प्रदर्शित फिल्म अंगरक्षक के बाद एक साथ आये थे।  यद्यपि इन दोनों ने फिल्म बॉर्डर में भी अभिनय किया था। किन्तु, इन दोनों ने एक साथ कैमरा का सामना नहीं किया था। 





चुप रिवेंज ऑफ़ द आर्टिस्ट की विशेषता थी कि इस फिल्म की पूरी शूटिंग बांद्रा मुंबई में हुई थी तथा फिल्म के एक लेखक प्रसिद्द फिल्म समीक्षक राजा सेन थे। अब तक पारिवारिक फिल्म बनाने वाले आर बल्कि की फिल्म चुप पहली क्राइम थ्रिलर फिल्म थी।  यह, सनी देओल की ब्लेंक २०१९ के बाद की वापसी फिल्म थी। 

राष्ट्रीय सहारा 21 September 2025

 



Friday, 19 September 2025

सुपरहिट लव स्टोरी के बावजूद फ्लॉप विजयेता पंडित !


 

२७ फरवरी १९८१ को, एक रोमांटिक फिल्म लव स्टोरी प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म के निर्माता तत्कालीन हिंदी फिल्म उद्योग के जुबली कुमार राजेंद्र कुमार थे। उन्होंने यह फिल्म अपने बेटे कुमार गौरव का हिंदी फिल्म उद्योग से परिचय कराने के लिए बनाई थी।





इस फिल्म में कुमार गौरव की नायिका संगीतकार जोड़ी जतिन-ललित और फिल्म अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित की बहन विजयेता पंडित थी। फिल्म बड़ी हिट साबित हुई थी।  इस फिल्म के बाद उस समय के तमाम स्थापित अभिनेताओं के अपने बच्चो को फिल्म अभिनेता- अभिनेत्री बनाने का चलन प्रारंभ हो गया था। अब यह बात दूसरी है कि लव स्टोरी के दोनों युवा कलाकारों का फिल्म जीवन लंबा नहीं चल सका। 





इस फिल्म की नायिका विजयेता पंडित पर तो बड़ी बुरी बीती। वह फिल्म में, कुमार गौरव का रोमांस बनी थी। किन्तु, कैमरा के सामने, कुमार गौरव से रोमांस करते करते,वह कुमार से कैमरा के बाहर भी रोमांस करने लगी। यहाँ तक कि फिल्मों में अपना करियर संवारने के स्थान पर वह कुमार घराने की बहु बनने के सपने देखने लगी।





इस रोमांस और विजयेता के इरादों का पता राजेंद्र कुमार को भी चला। वह विजयेता से बहुत नाराज हुए। किन्तु, उन्होंने विजयेता या कुमार गौरव से तो कुछ नहीं कहा, किन्तु विजयेता के फिल्म जीवन को बिलकुल तबाह कर दिया। हिट फिल्म लव स्टोरी की नायिका को नई फिल्म का प्रस्ताव न मिलना आश्चर्य की बात होनी चाहिए।  किन्तु, यह आश्चर्य राजेंद्र कुमार ने कर दिखाया। विजयेता को, अगली फिल्म मिलने में चार साल लग गए। उनकी अगली फिल्म मोहब्बत १९८५ में प्रदर्शित हुई। इस बीच उनकी फिल्मे शुरू होती और बंद हो जाती। फिल्म रिहाई और मानसी ऎसी ही फिल्मे थी। 





विजयेता पंडित को गायिकी के क्षेत्र में अपना करियर बनाने में अपने परिवार तक का सहारा नहीं मिला। भाई जतिन- ललित ने भी उनकी कोई मदद नहीं की। निर्माताओं से विजयेता की सिफारिश नहीं की। यहाँ तक कि विजयेता का गाया पहला नशा पहला खुमार गीत भी उनसे छीन कर साधना सरगम से गवाया गया। विजयेता की शादी आदेश श्रीवास्तव से हुई थी। किन्तु, आदेश श्रीवास्तव ने भी उनकी कोई मदद नहीं की। 





विजयेता पंडित का पारिवारिक जीवन भी दुखद रहा। उनकी बड़ी बहन सुलक्षणा पंडित गहरे अवसाद में चली गई। उनका करियर ख़त्म हो गया।  विजयेता की दूसरी बड़ी बहन संध्या अकस्मात् लापता हो गई। वह उस दिन चालिस लाख की ज्वेलेरी ले कर लॉकर में रखवाने निकली थी। उनचास दिनों बाद उनकी सड़ी हुई लाश मिली। इन पारिवारिक आघातों ने विजयेता को तोड़ कर रख दिया। 





१९९० में विजयेता का विवाह संगीतकार आदेश श्रीवास्तव से हुआ था।  दोनों आपस में बहुत खुश थे। किन्तु, आदेश श्रीवास्तव को कैंसर हो गया। वह लम्बे समय तक कैंसर से जूझते रहे। कैंसर से उबरे. २०१५ में उनका निधन हो गया। तब तक विजयेता का गायिका और अभिनेत्री के रूप में करियर बिलकुल ख़त्म हो चुका था। 

#Atlee की #AlluArjun के साथ ८०० करोड़ की AA22xA6



समाचार है कि फिल्म निर्देशक एटली ने फिल्म अल्लू अर्जुन के साथ अपनी फिल्म AA22xA6 (कार्यकारी शीर्षक) की पटकथा तैयार करने के लिए पंद्रह प्रमुख पटकथा लेखकों को नियुक्त किया है । वह पटकथा लेखकों की इस विशाल टीम की सहायता से फिल्म के विषय की भव्यता के अनुरूप एक ब्लॉकबस्टर स्क्रिप्ट लिखवा पाने में सफल होंगे ।





दूसरा नवीनतम समाचार यह है कि अटली ने अबू धाबी के शूटिंग कार्यक्रम के लिए अल्लू अर्जुन का लुक टेस्ट पूरा कर लिया है । यह कार्यक्रम अक्टूबर में प्रारंभ होगा। इसमें फिल्म के सभी मुख्य कलाकार सम्मिलित होंगे। बताया जा रहा है कि फिल्म का एक शूट कार्यक्रम हैदराबाद में भी है । यह कितने दिनों का है, इसका कोई संकेत नहीं है । इस कार्यक्रम में फिल्म की एक अभिनेत्री दीपिका पादुकोण अक्टूबर के अंत या नवंबर में सम्मिलित होंगी ।





उल्लेखनीय है कि निर्देशक एटली और अल्लू अर्जुन ने अगस्त में मुंबई में एक बड़ा शेड्यूल पूरा किया है। इस कार्यक्रम में एक डांस सीक्वेंस भी फिल्माया गया था ।




अक्टूबर में, यूनाइटेड अरब अमीरात में होने वाला फिल्म का अगला कार्यक्रम बहुत ही रोचक और गहन होगा । यहां लीवा ओऐसिस के रेतीले टीलों के बीच एक्शन सीन शूट किए जाएंगे । दीपिका पादुकोण भी इस शेड्यूल से जुडने वाली हैं ।





फिल्म से जुड़े जो समाचार छन छन कर आ रहे है, उससे पता चलता है कि एटली की फिल्म दो काल खण्डों में विभाजित होगी । प्राचीन काल खंड में फिल्म का कथानक विकसित होगा, जो भविष्य काल को नियंत्रित और संचालित करेगा । बताते हैं कि इस काल खंड में, फिल्म निर्माता विज्ञानं फंतासी का तत्व डालेंगे । प्राचीन काल खंड में दीपिका पादुकोण का योद्धा रूप सामने आएगा ।





दीपिका पादुकोण ने अल्लू अर्जुन के साथ अपनी इस फिल्म के लिए पूरी गंभीरता से तैयारी शुरू कर रखी है। इसके लिए अभिनेत्री ने अपनी डेट डायरी में १०० दिन सुरक्षित रखे हैं। इस सौ दिन के कार्यक्रम में, दीपिका पादुकोण पर एक्शन दृश्य तो फिल्माए ही जायेंगे, बल्कि कई गहन भावनात्मक दृश्य भी फिल्माए जायेंगे । इनमे से अधिकांश दृश्यों में दीपिका पादुकोण के साथ अल्लू अर्जुन भी होंगे ।





सूत्र बताते हैं कि फिल्म एए२२Xए6 में, दीपिका पादुकोण अपने विगत फिल्मों से बिलकुल अलग अवतार में होंगी । दीपिका ने प्रभास के साथ फिल्म कल्कि २८९८एडी में प्राचीन काल की सुमति की भूमिका की थी । किन्तु, इसमें एक्शन या सुपर हीरो वाला तड़का नहीं था । एटली की फिल्म में वह सुपर हीरो चरित्र में होगी तथा अनोखे और भारी भारी अस्त्र शास्त्रों का प्रयोग करती दिखाई देंगी। फिल्म की टीम ने दीपिका के चरित्र के योद्धा वेश को विशिष्ट रूप देने की ठान ली है। उन्हें अनोखे हथियार भी पकडाए जायेंगे । इसी के अनुरूप दीपिका की तैयारी भी है । यह भी बताते हैं कि दीपिका के चरित्र को स्वाभाविक बनाने के लिए वीएफएक्स का अधिक प्रयोग किया जायेगा ।





समाचार हैं कि  फिल्म एए२२Xए६ की शूटिंग सितम्बर २०२६ तक होती रहेगी । इसके बाद, फिल्म के विशेष प्रभाव पर काम किया जायेगा । यद्यपि, फिल्म की टीम मुंबई कार्यक्रम को पूरा करके एटली और अल्लू अर्जुन के साथ अमेरिका चली गई हैं, जहाँ वीएफएक्स पर काम किया जा रहा है । यहाँ स्पष्ट करते चलें कि अल्लू अर्जुन की यह फिल्म बहुत महंगी फिल्म है । इस कारण से सबसे बड़ी फिल्म है । इस फिल्म पर निर्माता ८०० करोड़ व्यय करेंगे । इसे देखते हुए अल्लू अर्जुन ने अपना अच्छा खासा समय इस शिड्यूल के लिए निर्धारित कर दिया है





फिल्म अल्लू अर्जुन की भूमिका को लेकर रोचक समाचार है   बताया जा रहा है कि फिल्म में अल्लू अर्जुन की भूमिका फिल्म के दोनों काल खण्डों में विस्तृत है   यह भी कहा जारहा है  कि  फिल्म में अल्लू के चार  अलग अलग रूप दिखाए जायेंगे।  वह फिल्म में दादा, पिता और दो बच्चों की भूमिका कर रहे है। समाचार है कि एटली  को अल्लू अर्जुन के चारों भूमिकाएं करने पर शंका थी। किन्तु, अल्लू अर्जुन ने इन चारों चरित्रों को स्वयं करने पर बल दिया। फिर एटली ने अर्जुन का लुक टेस्ट किया। इसमें संतुष्ट हो जाने के बाद ही अल्लू अर्जुन को चारों भूमिकाएं सौंप दी गई। 





फिल्म एए२२Xए६ में अल्लू अर्जुन और दीपिका पादुकोण के अतिरिक्त योगी बाबू, कोवाइ सरला, रम्या कृष्णन, मृणाल ठाकुर, जाह्नवी कपूर और रश्मिका मन्दाना भी फिल्म में महत्वपूर्ण चरित्र कर रहे है । इस फिल्म में विजय सेतुपति की मेहमान भूमिका की भी चर्चा है। 

Wednesday, 17 September 2025

प्रधान मंत्री #NarendraModi के जीवन पर #MaaVande !



प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरक जीवन पर एक आत्मकथा फिल्म माँ वन्दे की घोषणा की गई है। लोकप्रिय मलयालम फिल्मों के अभिनेता उन्नी मुकुन्दन इस फिल्म में नरेंद्र मोदी की भूमिका करेंगे। फिल्म का निर्माण वीर रेड्डी एम् और निर्देशन क्रांति कुमार सीएच कर रहे है। 




माँ वन्दे के निर्माता की इच्छा फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने की है। इसलिए, इस फिल्म को भारतीय भाषाओँ के अतिरिक्त अंग्रेजी में भी बनाया जायेगा। फिल्म में नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत जीवन के अतिरिक्त राजनीतिक यात्रा और उपलब्धियों का चित्रण किया जाएगा। फिल्म में माँ हीरा बेन के साथ मोदी के संबंधों का भी विशेष चित्रण किया जाएगा। 




 

फिल्म की तकनीकी टीम में छायांकन केके सेंथिलकुमार ने किया है। प्रोडक्शन डिज़ाइनर साबू सिरिल, संगीतकार रवि बसूर, संपादन श्रीकर प्रसाद और एक्शन किंग सोलोमन है।सेंथिलकुमार ने बाहुबली का छायांकन किया था।  वहीँ रवि बसूर के संगीत का केजीएफ की सफलता में बड़ा योगदान है।




इस महत्वकांक्षी फिल्म को बड़े  पैमाने पर बनाया जा रहा है। इस फिल्म को १०५ करोड़ के भारी भरकम बजट से बनाया जाएगा। 




 

इस फिल्म से पूर्व, २०१९ में विवेक ओबेरॉय की केंद्रीय भूमिका वाली फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी भी प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म में नरेंद्र मोदी की जीवन यात्रा में माँ हीरा बेन, आरएसएस और स्वामी विवेकानंद के प्रभाव का सतही चित्रण हुआ था। इसलिए फिल्म दर्शकों को प्रभावित कर पाने में असफल रही थी। 





२०१८ की एक लघु फिल्म चलो जीते है में नरेंद्र मोदी के बचपन के अनुभवों पर आधारित फिल्म थी।  इस फिल्म का निर्माण मंगेश हडवाले ने किया था। २०१९ में एक वेब सीरीज मोदी अ जर्नी ऑफ़ अ कॉमन मैन का निर्देशन एरोस नाउ के लिए उमेश शुक्ल ने किया था।


Tuesday, 16 September 2025

हेमा मालिनी और परवीन बाबी पर फिल्माया गया था रज़िया सुल्तान का लेस्बियन किस



निर्माता निर्देशक कमाल अमरोही के मन में जब, भारत की पहली और इकलौती मुस्लिम महिला शासक रज़िया सुल्तान पर फिल्म बनाने का विचार आया तो उन्होंने इस पर काफी शोध किया। वह विदेशो में जा कर रज़िया सुल्तान के बारे में जानकारी एकत्र करते ताकि उनकी फिल्म में रज़िया को लेकर तथ्यात्मक त्रुटियां न रहे। 






इस शोध के दौरान, कमाल के संज्ञान में आया कि रज़िया सुल्तान समलैंगिक महिला थी। उन्होंने अधिक गहराई से छानबीन की तो मालूम हुआ कि रज़िया सुल्तान के अपनी दासी से समलैंगिक सम्बन्ध थे। कमाल अमरोही ने, रज़िया सुल्तान के जीवन के काले अध्याय को अपनी फिल्म में शामिल भी किया। किन्तु, बड़ी बारीकी से। 





आज के दिन १९८३ में प्रदर्शित हुई रज़िया सुल्तान में कमाल अमरोही ने, रज़िया सुल्तान के जीवन के अन्य प्रसंगों को सम्मिलित करने के साथ साथ उनकी अपने हब्शी गुलाम याकूत  जमालुद्दीन से प्रेम प्रसंग को महत्त्व दिया। इस भूमिका को परदे पर हेमा मालिनी और धर्मेंद्र ने रियल लाइफ जोड़ी होने के कारण बखूबी निभाया भी। 




इस प्रेम प्रसंग के साथ साथ, कमाल अमरोही ने रज़िया के समलैंगिक संबंधों का चित्रण भी किया, एक गीत के माध्यम से। ख्वाब बन के आएगा मुखड़े वाला यह गीत नौका विहार को निकली रज़िया सुल्तान और उसकी गुलाम खाकूम पर फिल्माया गया था। फिल्म में हेमा मालिनी की रज़िया की खाकून फिल्म अभिनेत्री परवीन बाबी बनी थी। इसी गीत के एक दृश्य में याकूत की मोहब्बत में डूबी रज़िया सुल्तान पर पंखा झलती खाकूम रज़िया के चेहरे पर झुकती है और उनके होंठों को चूमती है। यद्यपि, सेंसर के भय से इस दृश्य को विस्तार से न दिखा कर, हेमा पर झुकी हुई परवीन बॉबी के होंठों का हेमा मालिनी के होंठो से स्पर्श से पहले ही मोर पंख वाला पंखा कैमरा के सामने आ जाता था। 




अब यह बात दूसरी है कि सिनेमाघरों में बैठे रज़िया सुल्तान के दर्शकों को यह समझ में आ गया था कि परवीन बाबी ने झक कर हेमा मालिनी के होंठों का चुम्बन किया है।