Wednesday, 15 October 2025

हिन्दी फ़िल्मों में हेलेन की जोड़ीदार अभिनेत्री मधुमती का निधन



मधुमती का जन्म 1938 में महाराष्ट्र में हुआ था और उन्होंने 1957 में एक अप्रदर्शित मराठी फिल्म से एक नर्तकी के रूप में अपना करियर शुरू किया था। एक पारसी परिवार से आने के कारण उनके जन्म का नाम हुतोक्सी रिपोर्टर था। वह भरतनाट्यम, कथक, मणिपुरी और कथकली की प्रशिक्षित नर्तकी थीं । 






जो लोग नहीं जानते, उनकी जानकारी के लिए बता दें कि मधुमती ने 'आंखें', 'शिकारी', 'मुझे जीने दो', 'टावर हाउस' जैसी फिल्मों में अभिनय किया था। 







मधुमती का विवाह हिन्दी फ़िल्मों के कोरियोग्राफर और नर्तक दीपक मनोहर से हुआ था, जो उस समय के एक प्रतिष्ठित नर्तक थे। जब, माधुमती ने दीपक से शादी की, उस वह 19 वर्ष की थीं। दीपक चार बच्चों के पिता थे और उनकी पहली पत्नी का निधन हो चुका था। मधुमती दीपक से शादी करने के लिए तैयार नहीं थीं, लेकिन अपनी माँ की इच्छा के कारण उन्होंने उनसे शादी कर ली। 






भारतीय सिनेमा में अविस्मरणीय छाप छोड़ने वाली दिग्गज अभिनेत्री और कुशल नृत्यांगना मधुमती का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मधुमती के निधन ने वास्तव में पूरे फिल्म उद्योग को सदमे में डाल दिया है। अक्षय कुमार, बिंदु दारासिंह, चंकी पांडेय, आदि अभिनेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।  







हिन्दी फिल्म दर्शक मे दशकों से मधुमती को न केवल पर्दे पर उनके उल्लेखनीय अभिनय के लिए, बल्कि नृत्य में उनकी सुंदरता और निपुणता के लिए भी जाना जाता रहा है। हेलेन जैसी निपुण नर्तकी से अक्सर तुलना की जाने वाली मधुमती ने हर भूमिका और प्रदर्शन में अपनी अलग प्रतिभा का परिचय दिया और एक ऐसी विरासत छोड़ी जो कलाकारों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।







1938 में महाराष्ट्र में जन्मी मधुमती को बहुत कम उम्र से ही नृत्य का शौक था। लय और गति के प्रति उनके आकर्षण ने उन्हें भरतनाट्यम, कथक, मणिपुरी और कथकली सहित कई शास्त्रीय नृत्य शैलियों का प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया। वर्षों से, उनके प्रदर्शन, चाहे मंच पर हों या कैमरे पर, तकनीकी सटीकता और अभिव्यंजक भावना का एक दुर्लभ संयोजन प्रदर्शित करते थे जिसने उन्हें अपनी पीढ़ी के सबसे सम्मानित नर्तकों में से एक के रूप में खड़ा किया।

महाभारत के कर्ण पंकज धीर का देहांत !



बी.आर. चोपड़ा रचित महाकाव्य महाभारत में कर्ण की भूमिका के लिए प्रसिद्ध अभिनेता पंकज धीर का लंबे समय तक कैंसर से जूझने के बाद आज १५ अक्टूबर, २०२५ को देहांत हो गया। वह ६८ वर्ष के थे ।





पंकज धीर का जन्म ९ नवंबर १९५६ को हुआ था।  उनकी फिल्म यात्रा, १९८१ में प्रदर्शित फिल्म पूनम से प्रारम्भ हुई थी। उन्होंने एमएस सथ्यू की कन्नड़ और हिंदी भाषा में प्रदर्शित फिल्म सूखा में अनंत नाग के साथ अभिनय किया था। उन्हें हिंदी फिल्म जीवन एक संघर्ष में अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित के साथ काम किया। किन्तु, उन्हें सही अर्थों में पहचान मिली बीआर चोपड़ा की श्रृंखला महाभारत से।  इस सीरीज में कर्ण की भूमिका ने उन्हें अमर कर दिया। 





महाभारत को पूरे दो वर्ष देने के  बाद,पंकज धीर पुनः फिल्मों में वापस लौटे।  उन्होंने, अक्षय कुमार की पहली फिल्म सौगंध में एक खल भूमिका की थी।  इस फिल्म के बाद, वह सलमान खान की सुपरहिट फिल्म सनम बेवफा में भी वह खलनायक थे। पंकज धीर ने सड़क, मिस्टर बांड, जाग्रति, परदेसी, अशांत, आशिक आवारा, आदि ९५ फिल्मों और सीरीज में अभिनय किया।





पंकज धीर ने, अभिनय के अतिरिक्त निर्माण और  निर्देशन के क्षेत्र में भी काम किया। भारत की पहली एडल्ट फिल्म बॉम्बे फैंटसी  के निर्देशक पंकज धीर ही थे। यह उनकी पहली निर्देशित फिल्म थी।  इस फिल्म में के एन सिंह के पुत्र विभूषण सिंह नायक थे।





पंकज धीर अभिनीत फ़िल्में सौदा ज़िन्दगी का, वजूद, विवश, आदि कुछ रील बनने के बाद बंद कर दी गई। पंकज धीर ने, साड्डा मुक्कदर और सीरीज माय फादर गॉड फादर का निर्देशन भी किया।  पंकज धीर ने, गूफी पेंटल के साथ अभिनय अकादमी और शूटिंग स्टूडियो की स्थापना भी की। 





उनके बेटे निकितन धीर दक्षिण की फिल्मों के प्रतिष्ठित और स्थापित अभिनेता है।  

दिलीप कुमार के निर्देशन की खुजली का खामियाजा भुगता था लीडर ने !



विजय खन्ना कानून का स्नातक है और एक टेबलायड का संपादन करता है। आम चुनाव के समय प्रचार कर रही राजकुमारी सुनीता से वह प्रेम करने लगता है।  सुनीता भी उसे प्रेम करती है। इसी चुनाव प्रचार के समय एक नेता की हत्या हो जाती है।  इस हत्या के अपराध के लिए विजय खन्ना को दोषी ठहराने का प्रयास किया जाता है। अब विजय खन्ना और सुनीता को मिल कर हत्यारों और उनके षड़यंत्र का पर्दाफास करना है।





यह कथानक, २७ मार्च १९६४ को प्रदर्शित हिंदी फिल्म लीडर का है।  इस फिल्म की कथा को हिंदी फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार ने लिखा था। उनकी कथा को पटकथा का रूप राम मुख़र्जी और हरीश मेहरा ने दिया था।  फिल्म के संवाद हरीश के साथ वजाहत मिर्ज़ा ने लिखे थे।  इस फिल्म का निर्देशन राम मुख़र्जी ने किया था। 




 

निर्माता शशधर मुख़र्जी की फिल्म  लीडर में, दिलीप कुमार ने विजय खन्ना और वैजयंतीमाला ने राजकुमारी सुनीता की भूमिका की थी।  मोतीलाल ने आचार्य की भूमिका की थी, जिनकी हत्या के अपराध में विजय खन्ना को दोषी ठहराया जाता है।  फिल्म में अन्य भूमिकाओं में डीके सप्रू, हीरालाल, जयंत, लीला मिश्रा और नज़ीर हुसैन थे।  फिल्म में संगीत नौशाद ने दिया था तथा गीत शकील बदायुनी ने लिखे थे।  





मुग़ल ए आज़म और गंगा जमुना जैसी बड़ी हिट फिल्म देने के बाद, लीडर जैसी औसत से भी कम व्यवसाय करने वाली लीडर दिलीप कुमार  की बॉक्स ऑफिस अपील पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगाती थी।  यह एक प्रकार से, दिलीप कुमार के फिल्म जीवन के अवसान का एक संकेत भी थी। क्योंकि, इस फिल्म के बाद, दिलीप कुमार की फिल्म राम और श्याम ही बड़ी हिट फिल्मों में गिनी जाती है।  इसके बाद, दिलीप कुमार की फिल्मे दर्शकों पर अपनी पकड़ खोती चली गई।





लीडर, पोलिटिकल थ्रिलर फिल्म थी। यह स्वातंत्रयोत्तर भारतीय सिनेमा की पहली राजनीतिक फिल्म थी।  इससे पहले किसी भी निर्माता ने राजनीती को केंद्र में रख कर फिल्में  नहीं बनाई थी। यहाँ तक कि स्वतंत्रता पूर्व भी निर्मित फिल्मों में परोक्ष रूप से अंग्रेज सरकार को निशाना बनाया गया था। लीडर तो राजनीती में अपराध का  चित्रण करने वाली फिल्म थी।







लीडर के बाद, किसी अन्य निर्माता ने राजनीतिक फिल्म बनाने का प्रयास नहीं किया।  लीडर के बाद, राजनीतिक रुझान वाली पहली फिल्म गुलजार की मेरे अपने थी। इस फिल्म के बाद, गुलजार ने फिल्म आंधी में इंदिरा गाँधी को अपने निशाने पर रखा था।  मेरे अपने और आंधी के निर्माण के बाद, गुलजार ने कोई राजनीतिक रुझान  वाली फिल्म नहीं बनाई। 





लीडर तीन घंटा लम्बी फिल्म थी।  इसलिए, यह फिल्म अपनी गति खो देती थी। दिलीप कुमार ने फिल्म की कहानी तो लिख दी थी। किन्तु, फिल्म के पटकथाकार अपना काम अच्छी तरह से नहीं कर पाए थे।  इसलिए फिल्म अपनी पकड़ खो बैठी थी।  फिल्म के निर्देशन में दिलीप कुमार का हस्तक्षेप भी फिल्म की सेहत के लिए अच्छा नहीं रहा।  दिलीप कुमार को ऐसा लगता था कि निर्देशक राम मुख़र्जी अपना काम ठीक नहीं कर पा रहे है। यही कारन था कि फिल्म अपना प्रभाव खो बैठी। 





फिल्म लीडर के निर्माण में ८५ लाख खर्च हुए थे।  फिल्म को उस समय की उच्च तकनीक पर बनाया गया था।  लीडर के निर्माण के दौरान शशधर मुख़र्जी ने जॉय मुख़र्जी और साधना के साथ फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना का निर्माण भी किया था। एक मुसाफिर एक हसीना श्वेत श्याम फिल्म थी।  जबकि, शशधर मुख़र्जी ने लीडर को उस समय की उच्च सिनेमा तकनीक टैक्नीकलर और सिनेमास्कोप में बनाया था।  इसके बावजूद लीडर ने बॉक्स ऑफिस पर औसत से कम व्यवसाय किया।  

Tuesday, 14 October 2025

#SanjayDutt को #FilmfareAwards दिलाने वाली #VastavTheReality



एक बार, एक साक्षात्कार में, बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त ने स्वीकार किया था कि उन्हें गैंगस्टर चरित्र भाते है।  परदे पर गैंगस्टर चरित्र करना, उनकी सोहबत का परिणाम भी था। बड़ी फिल्म अभिनेत्री नरगिस और अभिनेता सुनील दत्त के महाराष्ट्र की राजनीति में शाख रखने वाले दत्त परिवार के सबसे बड़े बेटे की सोहबत गैंगस्टर में उठने बैठने की थी। बॉम्बे के उस समय के दाऊद इब्राहिम, आदि जैसे कुख्यात गैंगस्टर उनके घनिष्ट मित्र थे।





तभी तो बॉम्बे बम ब्लास्ट के बाद, बॉलीवुड से संजय दत्त ही धरे गए, क्योंकि उनके घर से हथियार मिले थे।  कुछ कहते हैं कि संजय दत्त ने एके ४६ राइफल गला दी थी। एजेंसियों ने भी इस तथ्य को कांग्रेसी सरकारों के दबाव में चार्ज शीट से हटा दिया था।  अन्यथा संजय दत्त को कारवास के बजाय फांसी हो गई होती।  





बहरहाल, संजय दत्त की फिल्मों के गैंगस्टर की।  संजय दत्त ने, अपनी खलनायक जैसी फिल्मों में दुष्ट चरित्र किये थे। किन्तु, उन्होंने वास्तविक गैंगस्टर की भूमिका महेश मांजरेकर निर्देशित फिल्म वास्तव में की थी।  वास्तव, अंग्रेजी टैग लाइन द रियलिटी के साथ शीर्षक वाली इस फिल्म में संजय दत्त ने छोटा राजन की भूमिका की थी।  





गैंगस्टर फिल्म वास्तव ने, संजय दत्त के समाप्ति की ओर अग्रसर फिल्म जीवन को नया जीवन दिया था।  वास्तव से पहले और खलनायक के बाद, संजय दत्त की प्रदर्शित फिल्में जमाने से क्या डरना, आंदोलन, विजेता, नमक, दौड़ और कारतूस एक के बाद एक बॉक्स ऑफिस पर ध्वस्त हो रही थी।  छह असफल  फिल्मों के बाद, वास्तव द रियलिटी ने संजय दत्त के फिल्म जीवन को ही नहीं संवारा, बल्कि उन्हें फिल्मफेयर का श्रेष्ठ अभिनेता का पहला पुरस्कार भी मिला। इससे पूर्व, संजय दत्त फिल्म साजन और खलनायक के लिए भी इस श्रेणी में नामित हुए थे।  





ऐसा प्रतीत होता है कि फिल्म पुरस्कारों को भी गैंगस्टर फ़िल्में भाति है।  क्योंकि, वास्तव से एक साल पूर्व प्रदर्शित फिल्म सत्या ने, फिल्मफेयर में छः क्रिटिक अवार्ड जीते थे।  जिनमे श्रेष्ठ फिल्म और अभिनेता के पुरस्कार भी सम्मिलित थे। मनोज बाजपेई ने तो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी प्राप्त किया था।  इसके बाद, संजय दत्त भी गैंगस्टर चरित्र कर वास्तव के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार ले उड़े। 





बताते हैं कि फिल्म के लिए संजय दत्त से मिलने होटल गए महेश मांजरेकर को शूटिंग के कारण प्रतीक्षा करनी थी।  सो उन्होंने शराब पीते पीते फिल्म का पहला दृश्य लिख डाला।  इसके बाद, उन्होंने संजय दत्त के आने तक फिल्म के २२ दृश्य लिख लिए।  संजय दत्त ने, फिल्म की कहानी को सुनने के दस मिनट में फिल्म पर अपनी सहमति जता दी।





फिल्म की कहानी, निःसंदेह गैंगस्टर थी। किन्तु, फिल्म का अंत मदर इंडिया की नक़ल में था।  मदर इंडिया में संजय  दत्त की माँ नरगिस उनके पिता फिल्मी डाकू बेटे बने सुनील दत्त को गोली मार देती है।  वास्तव द रियलिटी में, संजय दत्त के रघु को उनकी रील लाइफ माँ  माथे पर बन्दूक सटा कर मार डालती है।





फिल्म में, संजय दत्त के पिता और माँ की भूमिका शिवजी साटम और रीमा लागू ने की थी।  उस समय शिवजी साटम, संजय दत्त से कुछ साल ही बड़े थे।  जबकि, रीमा लागू केवल एक साल बड़ी थी।




 

मराठी फिल्म आई से निर्देशक की कुर्सी पर बैठने वाले महेश मांजरेकर की पहली हिंदी फिल्म निदान थी।  इस फिल्म की शूटिंग महेश मांजरेकर ने प्रारम्भ कर दी थी, जब वह वास्तव के लिए संजय दत्त से मिलने गए। होनी को देखिये कि जिस फिल्म वास्तव की शूटिंग बाद में हुई, वह पहले प्रदर्शित हो गई। जबकि, निदान एक साल बाद, २००० में प्रदर्शित हुई थी। 






यहाँ एक बात निदान के विषय में। निदान एड्स की समस्या पर फिल्म थी। इस फिल्म में, वास्तव में संजय दत्त के माता पिता रीमा लागू और शिवजी साटम प्रमुख भूमिका में थे।  यह चरित्र अपनी एड्स से पीड़ित बेटी के अधिकारों के लिए संघर्ष करते थे। इसी फिल्म में, संजय दत्त ने स्वयं की भूमिका में कैमिया किया था।  क्योंकि, फिल्म की एड्स की शिकार लड़की बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की प्रशंसक थी। 





फिल्म वास्तव द रियलिटी का सेट बॉम्बे में सायन के पास चूनाभट्टी में लगा कर शूट हुई थी।  महेश मांजरेकर ने, बाद में अपनी दो फिल्मों तेरा मेरा साथ रहे और प्राण जाए पर शान न जाये की शूटिंग भी इसी सेट पर हुई थी। 

Monday, 13 October 2025

क्या #Prabhas की फिल्म #Fauji का #prequel बनेगा ?



हनु राघवपुड़ी निर्देशित स्वातंत्रय पूर्व भारत के इतिहास की पृष्ठभूमि पर काल्पनिक युद्ध ड्रामा फिल्म फ़ौजी का महूरत विगत वर्ष अगस्त में हुआ था।  इस फिल्म का कथानक, १९४० के स्वतंत्रता पूर्व के भारत के एक सैनिक की वीरता और संघर्ष पर था। यह फिल्म औपनिवेशिक संघर्ष और सैन्य वीरता को दर्शाने वाले सैनिक की फिल्म है। इस भूमिका को परदे पर तेलुगु फिल्मों के रिबेल स्टार प्रभास कर रहे है।




  

फिल्म में, प्रभास की जोड़ी नवोदित अभिनेत्री इमानवी इस्माइल कर रही है। वह लॉस एंजेल्स  कैलिफ़ोर्निया की रहने वाली है। वह अभिनय, नृत्य और कोरियोग्राफी में प्रशिक्षित है।  वह भारतीय मूल की अभिनेत्री है। उनके माता पिता भारत से गए अमेरिकी नागरिक है।  इमानवी को नृत्य विधा की सनसनी माना जाता है।





फिल्म फौजी में, बॉलीवुड फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती और जयाप्रदा भी अभिनय कर रहे है। फिल्म की निर्माता मित्री मूवी मेकर्स और टी सीरीज है। फिल्म की शूटिंग अक्टूबर २०२५ तक पूरी हो जाएगी।  फिल्म को १५ अगस्त २०२६ को प्रदर्शित किया जाएगा।  






इसके साथ ही, फिल्म फौजी की प्रीक्वेल फिल्म बनाये जाने की चर्चा भी होने लगी है।  कहा जा रहा है किं  निर्देशक हनु राघवपुड़ी, फौजी यूनिवर्स का विस्तार करना चाहते है।  इससे कथानक की सुदृढ़ आधारशिला रखी जा सकेगी। यह स्वतंत्रता पूर्व युग में स्थापित होगी।  एक सैनिक की एक्शन और भावनात्मक प्रेम को दर्शाने वाली यात्रा होगी। 





फौजी के प्रीक्वेल की अटकलों को बढ़ावा इस कारण भी लगा कि फिल्म निर्माण कंपनी मित्री मूवी मेकर्स भी, प्रीक्वल की अवधारणा को लेकर उत्साहित है। पुष्पा फ्रैंचाइज़ी जैसी विगत फ़िल्मों की सफलता ने एक सिनेमाई ब्रह्मांड बनाने में उनकी रुचि को बढ़ाया है, जिसमें फौजी संभवतः शुरुआती बिंदु के रूप में काम कर सकती है। यह निर्माण कंपनी जानती है कि यूनिवर्स बनाने का लाभ यह होगा कि इस पर सीक्वल-प्रीक्वेल या स्पिन ऑफ बनाए जा सकेंगे।  ऎसी फिल्मे दर्शकों को भी आकर्षित करने वाली होती है। 






यद्यपि, प्रीक्वल अभी भी वैचारिक चरण में है। कहा जाता है कि हनु राघवपुडी फौजी की रिलीज़ के बाद स्क्रिप्ट पर काम  करेंगे। फौजी को १४ अगस्त, २०२६ को प्रदर्शित किया जायेगा । निर्देशक का लक्ष्य समृद्ध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का लाभ उठाते हुए, मुख्य फिल्म की समयरेखा तक ले जाने वाले पात्रों और घटनाओं की पृष्ठभूमि का पता लगाना है। प्रीक्वेल में फौजी के फौजी से पूर्व के जीवन, परिवार और फौजी बनने की तैयारियों और संघर्ष पर प्रकाश डाला जायेगा। 






किन्तु, यह सब सरल नहीं होगा।  पूर्व कथा को  बुनते समय यह ध्यान रखना होगा कि पूर्व प्रदर्शित फौजी के कथानक से प्रीक्वेल के तार जुड़े रहे। अर्थात प्रीक्वल में कथा विस्तार में कथा सुसंगत हो। अनावश्यक संतृप्तता से बचना होगा।  





फौजी की ६० प्रतिशत शूटिंग पूरी हो चुकी है।  प्रभास का ३५ दिनों  का काम शेष है। इस फिल्म को पूरा करने के बाद, प्रभास फिल्म स्पिरिट और कल्कि २८९८ एडी के सीक्वल की शूटिंग प्रारम्भ करेंगी।  फ़ौजी की प्रीक्वेल उनकी तिथियां उपलब्ध होने पर निर्भर करेगी। इसलिए, वर्तमान में रघु फिल्म फौजी  को समय पर प्रदर्शित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे है।  

क्या १००० ग्रॉस कर पायेगी #RishabShetty की फिल्म #KantaraChapter1?



ऋषभ शेट्टी की २०२२ की हिट फिल्म कान्तारा की प्रीक्वल फिल्म कान्तारा चैप्टर १ लीजेंड, २  अक्टूबर को रिलीज़ होने के दस दिनों के अन्दर दुनिया भर में  छः सौ करोड़ से अधिक की कमाई कर चुकी है।  इस प्रकार से यह फिल्म  2025 की दूसरी सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बन गई है।






कांतारा चैप्टर १ गाँधी जयंती के विस्तारित सप्ताहांत में २ अक्टूबर २०२५ को प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म की सीधी टक्कर वरुण धवन और जान्हवी कपूर की फिल्म सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी से थी। इसके बाद भी, कांतारा ने पहले आठ दिनों अर्थात विस्तारित सप्ताहांत में न केवल सभी भाषाओँ में ३३७.४ करोड़ का विशुद्ध व्यवसाय किया, बल्कि हिंदी पेटी में बीच शतक मारते हुए १०८.७८ करोड़ का व्यवसाय कर लिया। 






कांतारा लीजेंड का लीजेंड जलवा दूसरे सप्ताह में भी जारी रहा। फिल्म ने दूसरे सप्ताहांत में  सभी भाषाओं में शतक मारते हुए १०१.२५ करोड़ का व्यवसाय कर लिया। फिल्म के हिंदी संस्करण ने तो मूल कन्नड़ संस्करण से अधिक ३५.७५ करोड़ का विशुद्ध व्यवसाय कर लिया।  जबकि, इस अवधि में कन्नड़ संस्करण ने इस सप्ताहांत में ३१.३ करोड़ का व्यवसाय किया।  इस प्रकार से, कांतारा चैप्टर १ ने पहले ११ दिनों में १३७ करोड़ का विशुद्ध व्यवसाय कर लिया है। 







ट्रेड विश्लेषक तरन आदर्श ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा है कि कांतारा चैप्टर १  ने अपने दूसरे सप्ताहांत में शानदार कमाई की है। शनिवार और रविवार को शानदार वृद्धि देखी गई। दिवाली २१ अक्टूबर से पहले फिल्म को एक और ओपन सप्ताहांत मिल रहा है।  इससे फिल्म को अच्छी कमाई करने में सहायता मिलेगी।  







कांतारा चैप्टर १ ने वर्ल्डवाइड ६०० करोड़ का ग्रॉस कर लिया है। २०२५ में ऐसा कर सकने वाली कांतारा १ दक्षिण की पहली फिल्म बन गई है। अभी इस फिल्म का व्यवसाय अच्छा चल रहा है। यह फिल्म पूरे विश्व में ६५५ करोड़ का ग्रॉस कर चुकी है।  यदि यह गति बनी रही तो  फिल्म दूसरे सप्ताह के अंत तक ७०० करोड़ का आंकड़ा छू लेगी।







कांतारा पार्ट १ को, अब केवल २०० करोड़ का और व्यवसाय करना है। तब यह फिल्म विक्की कौशल की फिल्म छावा, जो इस समय ८०७ करोड़ के ग्रॉस के साथ  शीर्ष पर हैं, को पराजित कर  २०२५ में शीर्ष का व्यवसाय करने वाली फिल्म बन जाएगी। दिवाली में यदि फिल्म ने अच्छी दर्शक संख्या पा ली तो फिल्म १००० करोड़ का विश्वव्यापी आंकड़ा छू सकती है। 

#JioHotstar पर १७ अक्टूबर से #LokahChapter1



छविगृहों में देखने से वंचित रह गए दर्शकों के लिए सुसमाचार।  प्रियदर्शन की बिटिया कल्याणी प्रियदर्शन की हॉरर फिल्म लोका चैप्टर १ चंद्रा अब ओटीटी पर प्रदर्शित होने जा रही है। इस फिल्म के, डिजिटल प्लेटफार्म जिओ हॉटस्टार पर १७ अक्टूबर २०२५ से स्ट्रीम होने की संभावना है।






अभी लोका पार्ट १ के हिंदी संस्करण के स्ट्रीम होने पर थोड़ा संदेह है। ऐसा इसलिए कि लोका पार्ट १ २८ अगस्त २०२५ को छविगृहों में प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म का हिंदी संस्करण एक सप्ताह बाद ही प्रदर्शित हो सका था।  फिल्म निर्माताओं और प्रदर्शकों के समझौते के अनुसार कोई हिंदी फिल्म या हिंदी संस्करण में फिल्म प्रदर्शन के आठ सप्ताह बाद ही ओटीटी पर प्रदर्शित हो सकती है।  अन्य भाषाओँ में फ़िल्में केवल चार सप्ताह बाद ही ओटीटी पर आ सकती है।




 

इस दृष्टि से, लोका के मलयालम, तेलुगु और तमिल संस्करणों को छविगृहों में अधिक सपताह तक प्रदर्शित होने का अवसर मिला। समझौते के अनुसार फिल्म १९ सितम्बर या इसके आसपास प्रदर्शित हो सकती थी। किन्तु छविगृहों में फिल्म को दर्शकों से मिल रहे  प्यार को देखते हुए, फिल्म को छविगृहों में चलने देने का  निर्णय लिया गया।  इसीलिए लोका पार्ट १ का हिंदी संस्करण १७ अक्टूबर को प्रदर्शित होने में संदेह है।






लोका पार्ट १ ने अपने प्रदर्शन के पश्चात् कीर्तिमान स्थापित किये थे। यह सबसे अधिक व्यवसाय करने वाली मलयालम फिल्म बन चुकी है।  इस फिल्म ने मोहनलाल की मलयालम फिल्म थुद्रुम को पीछे धकेल दिया था। इस फिल्म ने  पहले सात दिनों में ही १०० करोड़ का व्यवसाय कर डाला।  फिल्म ने अपनी चंद्रा अर्थात कल्याणी प्रियदर्शन को मलयालम फिल्मों की सुपरस्टार बना दिया। 






लोका चैप्टर १ चंद्रा एक स्त्री सुपरहीरो चंद्रा की  कहानी है। फिल्म का निर्माण मलयालम फिल्म अभिनेता दुलकर सलमान ने किया है।  वह इस फिल्म को पांच भागों में निर्मित करना चाहते है।  यही कारण है कि पहले चैप्टर के छविगृहों से विदा लेने से पूर्व ही फिल्म के दूसरे हिस्से की शूटिंग भी प्रारम्भ हो चुकी है।






लोका चैप्टर १ चंद्रा ने,  वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर ३०० करोड़ का ग्रॉस पार कर लिया है। ऐसा कर अपने वाली यह पहली मलयालम फिल्म बन गई है।  इससे पहले मोहनलाल की मलयालम फिल्म एमपुराण २ ने वर्ल्डवाइड २३५ का व्यवसाय किया था। केरल में फिल्म ने १२० करोड़ का व्यवसाय किया।  बाकी देश में फिल्म ने ६० करोड़ से अधिक का व्यवसाय किया।  स्पष्ट रूप से निर्देशक डॉमिनिक अरुण ने स्त्री सुपरहीरो का भारतीय अवतार सृजित कर दिया है।  

#HorroCom #Thamma में #MalaikaArora और #NoraFatehi के साथ #RashmikaMandanna का #ItemSong




मैडॉक फिल्म्स के हॉरर कॉमेडी यूनिवर्स की पांचवी फिल्म थम्मा, इस साल दिवाली पर दर्शकों को हंसाने और डराने आ रही है।  इसी महीने ठीक आठ दिनों बाद २१ अक्टूबर को प्रदर्शित होने जा रही इस फिल्म में आयुष्मान खुराना और सुपरस्टार अभिनेत्री रश्मिका मंदना की पिशाच जोड़ी डराएगी और नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी और परेश रावल की जोड़ी दर्शकों को हँसाने का प्रयास करेगी। स्पष्ट रूप से, निर्माता दिनेश विजन की यह हॉररकॉम फिल्म छुट्टियों में दर्शकों का मनोरंजन करने में सफल होगी। 





किन्तु, इस हॉरर कॉमेडी फिल्म में आइटम सांग्स का क्या काम ! यह फिल्म लोककथाओं में निषिद्ध प्रेम की पिशाच प्रेम गाथा है। आयुष्मान खुराना के साथ रश्मिका मंदाना पिशाचनी बनी है। यह जोड़ी रोमांटिक है तो हिंदी फिल्मों की परंपरा में रोमांटिक गीत होने ही चाहिए। किन्तु, इस रोमांस में तुम मेरे न हुए जैसे आइटम ट्रैक की क्या आवश्यकता है? 






तुम मेरे न हुए को आइटम सांग इसलिए कहा गया कि यह गीत आयुष्मान खुराना के साथ रश्मिका मंदाना पर फिल्माया गया है।  गीत में रश्मिका पूरी उत्तेजना पैदा करती हुई, अपने शरीर के उतार चढ़ाव का झटकेदार प्रदर्शन कर रही है।  ऐसा नृत्य, सामान्य  रूप से कोई नायिका नहीं करती।  इसके लिए किसी आइटम गर्ल को लिया जाता है। 






मैडॉक फिल्म्स की हॉररकॉम फिल्मों में ऐसे आइटम सांग अवश्य रखे जाते है। उदाहरण के लिए स्त्री (२०१८) में एक आइटम गीत था। किन्तु, यह गीत नायिका श्रद्धा कपूर पर नहीं फिल्माया गया था। बल्कि, इसके लिए नोरा फतेही को लिया गया था।  नोरा ने इस कमरिया गीत पर अपनी कमर ही नहीं सारा बदन तोड़ मरोड़ डाला था।  स्त्री २ के आइटम गीत आज की रात को भी तमन्ना भाटिया पर फिल्माया गया था।  श्रद्धा कपूर पर नहीं। 






किन्तु, तुम मेरे न हुए को नायिका रश्मिका मंदना पर फिल्माया गया है।  रोचक तथ्य यह है कि फिल्म की नायिका पर आइटम सांग रखने के बाद भी एक अन्य आइटम सांग के लिए नोरा फतेही को लिया गया है। दिलबर की आँखों का बोल वाला इस रीमिक्स गीत में, नोरा फतेही अपनी चिरपरिचित झटके दे रही है और कमर हिला रही है। 





नोरा फतेही का यह गीत फिल्म का तीसरा आइटम गीत है। एक महीना पहले फिल्म से एक गीत रतिया प्रदर्शित किया गया था। इस गीत में बॉलीवुड की कभी की प्रसिद्द आइटम गर्ल मलाइका अरोड़ा थिरक रही है। गीत में मलाइका के साथ आयुष्मान खुराना भी है। स्पष्ट रूप से फिल्म में तीन गीत आइटम गीत है। 






 मैडॉक फिल्म्स के हॉररकॉम यूनिवर्स में तीन आइटम सांग (यदि फिल्म रिलीज़ होते होते कोई चौथा गीत न सामने आ जाए) क्या जताते हैं ? कहीं यह आइटम के तड़के की अधिकता तो नहीं ! प्रतीत ऐसा ही होता है।






तभी तो दिनेश विजन ने, नोरा फतेही और मलाइका अरोड़ा के आइटम के अतिरिक्त रश्मिका मन्दाना का आइटम दर्शकों को चौंकाने के लिए प्रतीत होता है कि दर्शक उत्सुक हों, बॉलीवुड और टॉलीवूड में समान रूप से सफल अभिनेत्री रश्मिका भी आइटम कर रही है। 

Sunday, 12 October 2025

फिल्म #Jatadhara मे #ShreyaSharma का #PalloLatke

 


सुधीर बाबू और सोनाक्षी सिन्हा के अभिनय से सजी और ज़ी स्टूडियोज़ और प्रेरणा अरोड़ा द्वारा प्रस्तुत बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जटाधारा', के विजुअली शानदार टीज़र और ‘धन पिशाची’ गीत के बाद, मेकर्स ने अब पेश किया है फिल्म का सबसे ज़बरदस्त डांस नंबर ‘पल्लो लटके’, जो अपने हाई-एनर्जी बीट्स और जोशीले मूव्स के साथ हर डांस फ्लोर को जगमगाने के लिए तैयार है।






‘पल्लो लटके’ गीत में जहां सुधीर बाबू अपने स्टाइलिश लुक और दमदार स्क्रीन प्रेज़ेन्स से दिल जीत ले रहे हैं, वहीं श्रेया शर्मा अपनी ग्रेस और एनर्जी से हर फ्रेम में चार चांद लगा रही हैं। भव्य स्केल पर शूट किए गए इस गाने में विजुअली स्टनिंग कोरियोग्राफी के साथ दोनों की कैमिस्ट्री इस गाने को और भी धमाकेदार बना रही है। अगर यह कहें तो गलत नहीं होगा कि सुधीर बाबू के बेमिसाल मूव्स और स्वैग के साथ श्रेया शर्मा का जोशीला डांस दर्शकों के लिए एक विज़ुअल ट्रीट होगा।






लोकप्रिय राजस्थानी लोकगीत ‘पल्लो लटके’ को 'जटाधारा' में एक नए अंदाज़ में पेश किया गया है, जहां पारंपरिक मेलोडी को आधुनिक बीट्स और कटिंग-एज कोरियोग्राफी के साथ जोड़ा गया है। यह गाना परंपरा और आधुनिकता का शानदार संगम पेश करता है, जो भारतीय आत्मा से जुड़ी डिजिटल जेनरेशन को भी खूब भाएगी। ऐसे में इसका कैची रिदम, फूट-टैपिंग ग्रूव और सोशल मीडिया पर छाने वाले विज़ुअल मूव्स इसे इस साल का अल्टीमेट डांस एंथम बना देते हैं।






'जटाधारा' में सुधीर बाबू और सोनाक्षी सिन्हा के साथ दिव्या खोसला, शिल्पा शिरोडकर, इंदिरा कृष्णा, रवि प्रकाश, नवीन नेनी, रोहित पाठक, झांसी, राजीव कनकला और सुभलेखा सुधाकर जैसे कई दिग्गज कलाकार हैं। फिल्म अच्छाई बनाम बुराई, प्रकाश बनाम अंधकार और मानव इच्छाशक्ति बनाम ब्रह्मांडीय भाग्य की रोमांचक लड़ाई को पेश करती है।






ज़ी स्टूडियोज़ और प्रेरणा अरोड़ा द्वारा प्रस्तुत जटाधारा का निर्माण उमेश कुमार बंसल, शिविन नारंग, अरुणा अग्रवाल, प्रेरणा अरोड़ा, शिल्पा सिंघल और निखिल नंदा ने किया है। फिल्म के सह-निर्माता अक्षय केजरीवाल और कुसुम अरोड़ा हैं, जबकि क्रिएटिव प्रोड्यूसर दिव्या विजय और सुपरवाइजिंग प्रोड्यूसर भावना गोस्वामी हैं। फिल्म का दमदार म्यूज़िक ज़ी म्यूज़िक कंपनी द्वारा तैयार किया गया है।





फिल्म 'जटाधारा' 7 नवंबर को हिंदी और तेलुगु में रिलीज़ होगी।

एसएस राजामौली की फिल्म ईगा में जब 'मक्खी' बन गया इंसान

 


नानी बिंदु से प्यार करता है।  लेकिन बिंदु के पीछे पागल सुदीप उसे मार देता है। अपनी हत्या का बदला लेने और नानी की कुदृष्टि से बिंदु को बचाने के लिए  नानी एक मक्खी के रूप में पुनर्जन्म लेता है। वह बिंदु के साथ मिलकर सुदीप की ज़िंदगी नर्क बना देता है। 






यह कथानक, २०१२ में प्रदर्शित तेलुगु फिल्म ईगा का था, जो हिंदी पेटी में मक्खी शीर्षक के साथ हिंदी में डब कर प्रदर्शित की गई थी। ईगा को, देश विदेश में प्रशंसा और पुरस्कार मिले थे। किन्तु, हिंदी दर्शकों का एक इंसान का मक्खी बन जाना और उस मक्खी का एक व्यक्ति से बदला लेना गले नहीं उतरा। 






मक्खी की असफलता का एक अन्य कारण फिल्म के अपरिचित सितारे भी थे। यद्यपि यह सितारे अपने अपने  फिल्म उद्योग के प्रतिष्ठित और स्थापित नाम थे।  फिल्म के नायक और मक्खी तेलुगु फिल्म अभिनेता नानी थे।  हालाँकि, सुदीप उस समय तक रामगोपाल वर्मा की फिल्मों फूँक और फूँक २, अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म रण और रक्त चरित्र १ और  रक्त चरित्र २ कर चुके थे। किन्तु, दबंग ३ के सलमान खान को चुनौती देने वाले खलनायक का स्वागत करने वाले दर्शकों ने सुदीप को मक्खी के खलनायक के रूप महत्त्व नहीं दिया।  फिल्म में, आज की  ऊ बोलेगा साला ऊ ऊ बोलेगा गर्ल सामंथा रुथ प्रभु को भी दर्शक उस समय तक नहीं पहचानता था। 






सबसे आश्चर्य की बात यह है कि ईगा के मात्र तीन साल बाद बाहुबली द बिगिनिंग की भव्यता और तकनीकी श्रेष्ठता को सराहने वाले हिंदी दर्शक ने, निर्देशक एसएस राजामौली द्वारा निर्देशित फिल्म ईगा उर्फ़ मक्खी की  उपेक्षा की।  यद्यपि, यह फिल्म कथानक और तकनीक की दृष्टि से श्रेष्ठ फिल्म थी।  







यहाँ बताते चलें कि ईगा का विचार, फिल्म के लेखक और राजामौली के पिता केवी विजयेंद्र प्रसाद को १९९० के दशक में आया। उस समय तक राजामौली ने फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में प्रवेश नहीं  किया था।  उस समय विजयेंद्र प्रसाद अपने पुत्र से घरेलु मक्खी का इंसान से बदला लेने का मजाक कर रहे थे। किन्तु, शीघ्र ही इस विचार ने कागज में अवतार ले लिया। 






ईगा भारतीय सिनेमा के इतिहास का अमूल्य पृष्ठ बन गई। क्योंकि, इस फिल्म में सिनेमा के इतिहास में  लाइव-एक्शन एनीमेशन और विज़ुअल इफेक्ट्स का प्रचुरता से उपयोग किया गया। यह विशेष प्रभाव वाले दृश्य वीएफएक्स कंपनी मकुटा इफेक्ट्स के राहुल वेणुगोपाल, एडेल आदिली और पीट ड्रेपर के पर्यवेक्षण में तैयार किये गए थे ।







ईगा कोऑस्कर में भेजने के लिए तेलुगु फिल्म के रूप में चुना गया था। किन्तु, इस फिल्म को रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा की फिल्म बर्फी पर महत्त्व नहीं दिया गया।  फिर भी ईगा ने विदेशी पुरस्कार  जीतने के अतिरिक्त राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में श्रेष्ठ तेलुगु फिल्म होने का  सम्मान प्राप्त किया।  यद्यपि, हिंदी दर्शकों ने मक्खी को ठुकरा दिया। किन्तु, इसके बाद भी अन्य भाषाओँ में ईगा ने १२५ करोड़ का व्यवसाय कर के उद्योगों का ध्यान आकर्षित किया था। 







बताते हैं कि तेलुगु और तमिल में  साथ निर्मित ईगा की दस दिनों की शूटिंग के बाद, राजामौली को फिल्म के वीएफक्स  प्रत्येक स्थान पर उपयुक्त नहीं लगे। विशेष रूप से फिल्म की मक्खी का बदला लेने के लिए अंग सञ्चालन।  इससे मक्खी की भावनाएं दर्शकों तक नहीं पहुँच पा रही थी। इस लिए निर्देशक ने फिल्म को बंद करने की सोची थी । किन्तु, बाद में राजामौली को ध्यान आया कि फिल्म पर आठ करोड़ रुपये  व्यय हो चुके है। इसलिए उन्होंने फिल्म के वीएफएक्स नए सिरे से संशोधित करने का निर्णय लिया।  






मक्खी के हावभाव स्वभाविक बनाने के लिए राजामौली ने फिल्म के नायक नानी से एक कपड़ा ओढ़ कर मक्खी के रूप में भिन्न हावभाव प्रदर्शित करने के लिए कहा। इन हावभावों को वीएफएक्स टीम ने रिकॉर्ड कर, तदनुसार मक्खी के हावभाव स्वाभाविक बनाये।  






चूँकि एक घरेलू मक्खी का सिर लगभग पूरी तरह से आँखों से बना होता है और बहुत कम मांसपेशियाँ होती हैं, इसलिए मक्खी के रूप में भावनाओं को व्यक्त करना बेहद मुश्किल था। इस पर काबू पाने के लिए, एस.एस. राजामौली ने शारीरिक भाषा का इस्तेमाल किया।  उन्होंने नानी को अपना शरीर पूरी तरह से कपड़े से ढकने को कहा और उन्हें शारीरिक भाषा के माध्यम से ही मनुष्य की विभिन्न भावनाओं को व्यक्त करने को कहा। यह जानकारी एनीमेशन टीम को दी गई, जिन्होंने फिर मक्खी के लिए सभी गतिविधियाँ और शारीरिक भाषा तैयार की।







यह कहा जाता है कि ईगा का कथानक, नवीन निश्चल की १९८२ में प्रदर्शित बीआर इशारा निर्देशित फिल्म दूसरा रूप से प्रेरित थी। इस फिल्म में कुछ लोग एक महिला से बलात्कार करते हैं।  वह स्त्री आत्महत्या कर लेती है। मरने के बाद, वह स्त्री कुत्ते का जन्म लेती है और अपने बलात्कारियों से एक एक कर बदला लेती है। अब यह बात दूसरी है कि हिंदी दर्शकों ने इस फिल्म को नकार  दिया था।  







तेलुगु फिल्म ईगा को, तमिल में नान ई शीर्षक के साथ प्रदर्शित किया गया था। फिल्म मलयालम में ईचा और हिंदी में मक्खी के शीर्षक से प्रदर्शित किया गया था।  यह फिल्म थाई भाषा में डब कर प्रदर्शित की गई थी। फिल्म में, अजय देवगन और काजोल ने हिंदी संस्करण का  परिचय दर्शकों से कराया था।  







आज ईगा (मक्खी) को प्रदर्शित हुए १२ साल हो गए है। 

Saturday, 11 October 2025

नंदा ने सफल बनाया था राजेश खन्ना को सुपरस्टार बनाने वाली इत्तेफाक को !



निर्माता बीआर चोपड़ा के बैनर बीआर फिल्म्स के अंतर्गत निर्मित और १० अक्टूबर १९६९ को प्रदर्शित फिल्म इत्तेफ़ाक़ रहस्य रोमांच से भरपूर अनोखी हत्या रहस्य फिल्म थी।  इस फिल्म में जान डाल दी थी फिल्म के कलाकारों ने।  वास्तविकता तो यह है कि इत्तेफ़ाक़ को बड़ी सफलता इन्ही कलाकारों की छवि के कारण ही मिली। 




फिल्म इत्तेफ़ाक़ का निर्देशन बीआर चोपड़ा के छोटे भाई यश चोपड़ा ने किया था। यश चोपड़ा उस समय तक धूल का फूल, धर्मपुत्र, वक़्त और आदमी और इंसान का निर्देशन कर चुके थे।  उनकी निर्देशित यह पांचवी फिल्म उनकी अब तक निर्देशित फिल्म विधा से भिन्न विधा वाली फिल्म थी।  इस फिल्म की कथा-पटकथा जीआर कामथ ने लिखी थी। संवाद लेखक अख्तर उल ईमान थे।  फिल्म का संगीत सलिल चौधरी ने दिया था। 



१९६५ में प्रदर्शित अमेरिकी अपराध रहस्य फिल्म साइनपोस्ट पर आधारित इत्तेफ़ाक़ में, राजेश खन्ना और नंदा की मुख्य भूमिका के अतिरिक्त सुजीत कुमार, बिंदु, मदन पूरी, गजानन जागीरदार और इफ़्तेख़ार सह भूमिकाओं में थे।  पूरी फिल्म एक मकान पर केंद्रित फिल्म थी।  फिल्म की कुल अवधि १०५ मिनट थी। इन १०५ मिनटों में दर्शकों को कुछ सोचने का अवसर नहीं मिलता था। 



पूरी फिल्म दिलीप रॉय नाम के भगोड़े  कैदी का पीछा करती थी। उस पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप है तथा वह पागलखाने से भागता है। दिलीप रॉय भागता हुआ एक अकेली स्त्री रेखा के मकान में आ घुसता है। उस मकान में आने के बाद, दिलीप रॉय क्या बच पाता है या उसके चारो और अपराध का एक अन्य जाल बुन दिया जाता है।  यही फिल्म इत्तेफ़ाक़ का रहस्य और रोमांच था। यह रहस्य फिल्म का अंत आते आते दर्शकों को स्तब्ध कर देता है। वह चकित रह जाता है। 



इत्तेफ़ाक़ में दिलीप रॉय की भूमिका राजेश खन्ना ने की थी। इस फिल्म से पूर्व राजेश खन्ना ने आखिरी खत, राज़, औरत, बहारों के सपने, ख़ामोशी और डोली जैसी फिल्मे की थी। उस समय तक राजेश खन्ना की उनको हिंदी फिल्मों का पहला  सुपरस्टार बनाने वाले छवि नहीं बनी थी। किन्तु, इस फिल्म के बाद, राजेश खन्ना को अपने नाम अनोखा कीर्तिमान बनाने का अवसर दिया।



फिल्म में रेखा की भूमिका अभिनेत्री नंदा ने की थी।  नंदा उस समय की प्रतिष्ठित और स्थापित अभिनेत्री थी। उनकी साफ़ सुथरी छवि थी। वह रोमांटिक या बहन की भूमिका में दर्शकों की प्रिय अभिनेत्रियों में थी। 


 
फिल्म में एक मनोवैज्ञानिक डॉक्टर त्रिवेदी की भूमिका भी थी। इसे गजानन जागीरदार ने किया था। दिलीप रॉय पर पत्नी की हत्या का आरोप उसकी साली रेनू की गवाही के कारण लगता है। इस भूमिका को बिंदु ने किया था। इत्तेफ़ाक़, बिंदु के फिल्म जीवन की पांचवी फिल्म थी। वह इस फिल्म में पहली बार राजेश खन्ना का साथ अभिनय कर रही थी। इस फिल्म की शूटिंग के समय, वह राजेश खन्ना के साथ एक अन्य फिल्म दो रास्ते में भी अभिनय कर रही थी।



इत्तेफ़ाक में कोई गीत नहीं थे। यह उस समय की हिंदी फिल्मों और हिंदी दर्शकों की रूचि से हट कर फिल्म थी। इसके बाद भी इत्तेफ़ाक़ बॉक्स पर सुपरहिट साबित हुई। यह हिंदी में बनी, बिना गीतों वाली चौथी हिट फिल्म थी। इससे पूर्व तीन अन्य फिल्मे नौजवान (१९३७), मुन्ना (१९५४)और कानून (१९६०)ही बिना किसी गीत के भी दर्शकों द्वारा पसंद की गई। कानून का निर्माण भी बीआर फिल्म्स ने किया था। इस फिल्म में नंदा अभिनय कर रही थी। वह यश चोपड़ा की निर्देशक के रूप में पहली  फिल्म धूल का फूल की भी नायिका थी।  



फिल्म इत्तेफ़ाक़ का निर्देशन यश चोपड़ा ने खाली समय का उपयोग करने की दृष्टि से किया था। उन दिनों, वह धर्मेंद्र, फ़िरोज़ खान और सायरा बानू की फिल्म आदमी और इंसान का निर्देशन कर रहे थे। फिल्म की शूटिंग, नायिका सायरा बानू की सर्जरी के कारण रुक गई थी। इसलिए इस प्रतीक्षा के समय का उपयोग करने के लिए यश चोपड़ा ने इत्तेफ़ाक़ का निर्देशन स्वीकार किया। 



इत्तेफ़ाक़ एक छोटे बजट की क्विकी फिल्म थी। फिल्म की पटकथा जीआर कामथ ने मात्र सात दिनों में लिख डाली थी। इस फिल्म का फिल्मांकन २८ दिनों में किया गया। यह फिल्म मात्र तीन महीनो में प्रारम्भ कर प्रदर्शित कर दी गई। अब यह बात दूसरी है कि यश चोपड़ा ने इत्तेफ़ाक़ के बाद बड़े भाई बीआर चोपड़ा की किसी दूसरी फिल्म का निर्देशन नहीं किया। 



फिल्म में, नंदा का चुनाव विवादित था । नंदा की छवि को देखते हुए, फिल्म उद्योग की हस्तियों को विश्वास नहीं था कि दर्शक रेखा की भूमिका में नंदा को स्वीकार करेंगे। आईएस जोहर ने तो बीआर चोपड़ा को पागल हो गए हो क्या कह दिया था। स्वयं यश चोपड़ा भी राखी को रेखा की भूमिका देना चाहते थे। किन्तु, राखी जीवन मृत्यु के कारण राजश्री प्रोडक्शन के अनुबंध में बंधी थी। बाद में उनके दिमाग में धूल का फूल की बिन ब्याही माँ माला सिन्हा आई। किन्तु, तब तक बीआर चोपड़ा ने द ट्रैन में राजेश खन्ना की नायिका नंदा को ले लिया था । इससे यश चोपड़ा थोड़ा रुष्ट भी थे।



दर्शक साक्षी हैं कि रेखा की भूमिका में नंदा ने, इत्तेफ़ाक़ को इतनी बड़ी हिट फिल्म बना दिया। वास्तविकता तो यह है कि फिल्म में खूनी कौन के रहस्य को नंदा ही बनाये रख पाई थी। क्योंकि, दर्शकों को विश्वास नही था कि इत्तेफ़ाक़ की कातिल नंदा हो सकती है। बताते हैं कि फिल्म के प्रीव्यू के बाद, यश चोपड़ा ने नंदा से व्यक्तिगत रूप से क्षमा याचना की कि उन्होंने उनकी प्रतिभा को कम आँका। 


 
इत्तेफ़ाक़ की रेखा के चरित्र को लेकर उस समय संचार था कि रेखा की भूमिका करने के लिए साधना और माला सिन्हा ने मना कर दिया था। क्योंकि, यह अभिनेत्रियां अपनी छवि को चकनाचूर कर हत्यारिन स्त्री का चरित्र नहीं करना चाहती थी।  तमाम आलोचनाओं के दृष्टिगत बीआर चोपड़ा भी नंदा के चुनाव से सशंकित हो रहे थी। किन्तु, नंदा ने उन्हें आश्वासन दिया कि मैंने पहले ही दृश्य में अपनी मासूम इमेज को चकचूर कर दिया है। इस पहले दृश्य में नंदा शिफॉन की साडी में रोमांटिक अंदाज में खिड़की की ओर चलती दिखाई गई थी। यह दृश्य नंदा की अब तक बनी छवि को नष्ट करने वाला दृश्य था। 



इत्तेफ़ाक़ की सफलता ने राजेश खन्ना का सुपरस्टार बना दिया।  इत्तेफ़ाक़ के बाद, राजेश खन्ना ने एक के बाद एक निरंतर पंद्रह हिट फिल्मे दी।  यह सभी फिल्मों के वह एकल नायक थे। इन फिल्मों में आराधना, दो रास्ते, बंधन, आन मिलो सजना, सच्चा झूठा, सफर, कटी पतंग, आनंद, हाथी मेरे साथी, अंदाज़, अमर प्रेम, दुश्मन, आदि फिल्मों के नाम  सम्मिलित है।  

Friday, 10 October 2025

#Vrusshabha में दोहरी भूमिकाओं में #Mohanlal



अभिनेता मोहनलाल ने एक्स पोस्ट पर अपनी फिल्म वृषभा के प्रदर्शन की तिथि की घोषणा करते हुए लिखा - धरती हिल रही है। आकाश जल रहा है। नियति ने अपना योद्धा चुन लिया है। वृषभा ६ नवंबर को आ रही है। इस सूचना के साथ उनकी फिल्म का पोस्टर भी दिया गया था, जिसमे वह युगों युगों से प्रतिशोध लेने के लिए भटक रहे योद्धा के चरित्र में दिखाई दे रहे थे।   





पौराणिक सौंदर्यबो कराने वाला यह पोस्टर मोहनलाल की पोस्ट के अनुरूप प्रज्ज्वलित आकाश, स्वर्ण सिंहासन और सर्प जैसी आकृतियों का प्रयोग कर महाकाव्य की नियति  को उजागर करने वाला है।





बालाजी टेलीफिल्म्स और कनेक्ट मीडिया की नंद किशोर निर्देशित फिल्म वृषभा मोहनलाल के साढ़े चार दशक के दीर्घ फिल्म जीवन में, साल २०२५ में प्रदर्शित होने वाली चौथी फिल्म है। इस साल, मोहनलाल की अब तक तीन फिल्मे थुद्रुम, कन्नप्पा और हृदयपूर्वं प्रदर्शित हो चुकी है।  





अनुमान लगाया जा रहा है कि वृषभा में मोहनलाल की दोहरी भूमिकाएँ हैं।  नंद किशोर द्वारा निर्देशित फिल्म वृषभा पुनर्जन्म और बदले की कहानी पर आधारित है, जिसमें मोहनलाल जीवन में परस्पर जुड़े दो चरित्र कर रहे हैं।  यह पुनर्जन्म पर आधारित फिल्म है, जिसमे विगत जन्म के कट्टर शत्रु पुनर्जन्म में पिता  बनते है। क्या इस पिता-पुत्र के रिश्ते में भी दोनों की पूर्व जन्म की शत्रुता बनी रहेगी ?  यह कथानक प्रेम, संघर्ष और मुक्ति के जटिल अंतर्संबंध का रोचक चित्रण प्रतीत होता है।





मोहनलाल एक कुशल अभिनेता हैं।  उन्होंने भिन्न विधा की फिल्मे स्वभाविकता से की है। लूसिफर का स्टीफ़न नेदुमपल्ली  एक निर्मम चरित्र हैं, जो किसी की हत्या करने से नहीं हिचकता।  वही दूसरी ओर फिल्म हृदयपूर्वम में वह संदीप बाळकृषणन के भावुक भावों सूक्ष्म प्रदर्शन कर ले जाते थे।  अटकलें हैं कि वृषभा में मोहनलाल की दोहरी भूमिका उनकी इस प्रतिभा का प्रदर्शन कर पायेगी।  




    

दृश्य प्रस्तुति: पहली झलक वाले पोस्टर में मोहनलाल एक आकर्षक दोहरे व्यक्तित्व में दिखाई दे रहे हैं। ऊपरी भाग में उन्हें एक प्रभावशाली योद्धा के रूप में दर्शाया गया है, जो शाही, युद्ध के लिए तैयार पोशाक में, लहराते बालों और कठोर दृष्टि के साथ, पिछले जन्म का अवतार का प्रतीत  होता है। निचले भाग में मोहनलाल को आधुनिक पोशाक में सिंहासन पर बैठे हुए दिखाया गया है, जो अधिकार और शांति का भाव प्रदर्शित करता प्रतीत होता हैं। यह उनके पुनर्जन्म का संभवतः वर्तमान चरित्र प्रतीत होता है। इस द्वंद्व को अग्निमय आकाश और स्वर्णिम सिंहासन द्वारा और भी उभारा गया है, जो महाकाव्यात्मक, पौराणिक स्वर को और भी पुष्ट करता है।





वृषभा, मोहनलाल की ऐसी एक्शन है, जिसमे वीएफएक्स प्रभाव वाले दृश्यों की भरमार  है।  इसीलिए  वृषभा १००  करोड़ रुपये के बजट के कारण महंगी फिल्मों में गिनी जा रही है।  






फिल्म में पिता पुत्र के चरित्रों का साथ देने वाले कलाकारों में समरजीत लंकेश, रागिनी द्विवेदी और नयन सारिका सहित कुछ दूसरे कलाकारों को सम्मिलित किया गया है। इन कलाकारों की भूमिकाएँ संभवतः अतीत और वर्तमान समयरेखाओं को जोड़ती होंगी । 






यहाँ स्पष्ट करते चलें कि मोहनलाल की दोहरी भूमिका वाली फिल्म वृषभा पूरे देश के दर्शकों के लिए मलयालम, तेलुगु, हिंदी, कन्नड़ भाषाओँ में प्रदर्शित की जाएगी।  

भारतीय हॉरर फिल्में : आधुनिक तकनीक से संवरा भयावना संसार





महेश भट्ट, आनंद पंडित और विक्रम भट्ट की तिकड़ी भयावनी फिल्मों के दर्शकों को अतीत के भूतों का दर्शन कराने जा रहे है। हॉन्टेड 3डी: घोस्ट्स ऑफ़ द पास्ट शीर्षक वाली फिल्म २०११ में प्रदर्शित भयावनी फिल्म हॉन्टेड 3डी की सीक्वल फिल्म है। महाक्षय चक्रवर्ती  उर्फ़ मिमोह की मुख्य भूमिका वाली सुपरनैचरल थ्रिलर हॉरर फिल्म हॉन्टेड ३डी घोस्ट्स ऑफ़ डी पास्ट २१ नवंबर २०२५ को प्रदर्शित होने जा रही है।  चेतना पांडे को इस सीक्वल में सम्मिलित किया गया हैं।





मूल भयावनी फिल्म हॉन्टेड ३डी भी मिमोह की भयावनी फिल्म थी। इस फिल्म को भारत की पहली 3डी स्टीरियोस्कोपिक हॉरर फिल्म होने का गौरव प्राप्त हुआ था । इस फिल्म में विक्रम भट्ट की प्रिय अभिनेत्री टिया बाजपेई मिमोह की नायिका थी। फिल्म ने 13 करोड़ के बजट में दुनिया भर में 37 करोड़ की कमाई करके बॉक्स ऑफिस पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। यद्यपि, समीक्षकों ने महाक्षय के अभिनय की आलोचना की थी और उनकी कमियां गिनाई थी। 





हॉन्टेड ३डी घोस्ट्स ऑफ़ द पास्ट, हॉरर फ्रैंचाइज़ी की निरन्तरता बनाये रखने का प्रयास लगती है। क्योंकि, विक्रम भट्ट ने घोस्ट (२०१९) की असफलता के बाद, हॉरर फिल्मों से किनारा कर लिया था। इसीलिए १९२० होर्रोर्स ऑफ़ द हार्ट का निर्देशन उन्होंने स्वयं नहीं किया। किन्तु, २०२३ की इस फिल्म की सफलता के बाद, वह महेश भट्ट और आनंद पंडित की हॉन्टेड टीम के साथ हॉंटेड ३डी की सफलता को भुनाना चाहते है।  





देखा जाये तो सुपरनैचुरल हॉरर थ्रिलर फिल्मों का सिलसिला तो बना हुआ है। यह सिलसिला भारतीय लोककथाओं और मिथकों भूत चुड़ैल और शापित वस्तुओं को कहानी में समेटे हुए दिखाई देता है।२०१८ में प्रदर्शित तुम्बाड और स्त्री जैसी फ़िल्मों में पारंपरिक भारतीय लोककथाओं को आधुनिक कथानक के साथ सफलतापूर्वक मिश्रित किया है। इसका परिणाम हुआ है कि हॉरर फ़िल्में अधिक प्रासंगिक और सांस्कृति से जुड़ी बन गई हैं।





भारतीय फिल्मों में हॉरर कॉमेडी लोककथा और भूत चुड़ैलों का मिथ अन्य भाषाओँ में बानी फिल्मों में भी दिखाई देता है। विगत दिनों प्रदर्शित गुजराती फिल्म वश और इसकी सीक्वल भारतीय मान्यताओं में निहित भूत-प्रेत और भूत-प्रेत के विषयों पर आधारित है। मलयालम फिल्म लोका चैप्टर १ चंद्रा भी एक अन्य उदाहरण है।  रोचक तथ्य यह है कि ऎसी सभी फिल्मों को दूसरी भाषाओँ का दर्शक भी अपनी भाषा में देखना पसंद कर रहा है। 





यहाँ उल्लेखनीय है हॉरर में हास्य।  यद्यपि, यह मिश्रण प्रियदर्शन ने अपनी अक्षय कुमार के साथ फिल्म भूल भुलैया में १८ वर्ष पहले ही कर दिया था। किन्तु, यह मिश्रण अब विगत कुछ वर्षों से सफल होता प्रतीत होता है। क्योंकि, भूल भुलैया की सीक्वल फिल्म भूल भुलैया २ को बनने में १५ साल लग गए।  इसी मिश्रित शैली  में निर्देशक अमर कौशिक ने फिल्म स्त्री भी बनाई थी। स्त्री की सफलता के पश्चात् इस फिल्म का सीक्वल स्त्री २, २०२४ में प्रदर्शित हुई तथा सफल भी हुई।  इस सफलता से उत्साहित हो कर निर्माता ने मैडॉक सुपरनैचुरल यूनिवर्स की स्थापना कर भेड़िया, मुँज्या और स्त्री २ जैसी फिल्मों का निर्माण किया।  यह सभी फिल्में सफल भी हुई।  





 

हॉरर शैली की फिल्मों को नया आयाम तकनीकी प्रगति और उत्कृष्ट दृश्य प्रभाव के कारण भी मिला। आधुनिक  सीजीआई, ध्वनि डिज़ाइन और छायांकन तकनीक का प्रयोग  करने से भारतीय हॉरर फ़िल्में अधिक प्रभावशाली और दृश्यात्मक रूप से आकर्षक बन गई हैं। उदाहरण के लिए हॉन्टेड 3डी में  3डी स्टीरियोफोनिक तकनीक का उपयोग कर दिखाया था।  इसकी सीक्वल हॉन्टेड 3डी: घोस्ट्स ऑफ़ द पास्ट भी इस तकनीक को  स्थापित करने वाली है। 





यहाँ २०२४ में प्रदर्शित अजय देवगन और माधवन की हॉरर फिल्म शैतान भी भय के अनुभव को बेहतर और परिष्कृत दृश्य प्रभावों का उपयोग करते हुए दर्शकों को आकर्षित कर पाने में सफल होती थी ।  





भारतीय हॉरर फ़िल्में मनोवैज्ञानिक और सामाजिक टिप्पणियां करती भी प्रतीत होती है। ऎसी हॉरर फिल्मों में सामान्य रूप से मनोवैज्ञानिक तत्व और सामाजिक टिप्पणियाँ शामिल होती हैं, जो लिंग, जाति और सामाजिक मानदंडों जैसे मुद्दों को संबोधित करती हैं। निर्देशक और लेखक अन्विता दत्ता की २०२० में प्रदर्शित पीरियड  हॉरर फिल्म बुलबुल अलौकिक कथानक के अंतर्गत पितृसत्ता और दुर्व्यवहार के विषयों की पड़ताल करती थी । इसी क्रम में निर्देशक विशाल फुरिआ की नुसरत भरुचा अभिनीत हॉरर फिल्म छोरी सरोगेसी और महिला अधिकारों के मुद्दों को प्रस्तुत करती थी । 





भारत की भयावनी फिल्मों ज़ॉम्बी और विनाश ने भी अपना स्थान बनाना प्रारम्भ कर दिया है। यद्यपि,  हॉलीवुड की फिल्मों में यह तत्व प्रारम्भ से ही है।  गो गोवा गॉन भारत की पहली ज़ोम्बी फिल्म थी। यह फिल्म इस दृष्टि से मौलिक थी कि ज़ॉम्बी के भय में हास्य का बढ़िया मिश्रण किया गया था। किन्तु, ज़ॉम्बी फिल्मों की निरंतरता नहीं बन सकी। गो गोवा गॉन १२ साल पहले प्रदर्शित हुई थी। इसके सीक्वल की घोषणा अब जा कर हुई है। इस कड़ी में कार्तिक आर्यन की ज़ॉम्बी फिल्म उल्लेखनीय है। इस फिल्म को कार्तिक के लिए शेरशाह के निर्देशक विष्णुवर्द्धन बना रहे है।  



   

यह कहा जा सकता है कि वर्त्तमान में भारतीय हॉरर फ़िल्में पारंपरिक और आधुनिक तत्वों, तकनीकी प्रगति और विविध कथानक पर केंद्रित होगी, जो स्थानीय और वैश्विक दोनों दर्शकों को आकर्षित करती है। सांस्कृतिक समृद्धि, तकनीकी नवाचार और अंतर्राष्ट्रीय रुझानों के प्रभाव से प्रेरित होकर यह शैली निरंतर विकसित हो रही है। 

राख से उठ खड़े होने वाले फ़ीनिक्स है #HrithikRoshan



हृथिक रोशन को, उनकी विगत तीन फिल्मों विक्रम वेधा, फाइटर और वॉर २ के बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन के आधार पर, पतन की ओर अभिनेता  बताया जा रहा है।  क्या वास्तव में हृथिक रोशन का फिल्म यात्रा समाप्त होने जा रही है ? क्या किसी अभिनेता को लेकर ऐसी भविष्यवाणी उपयुक्त है ? 





इसमें कोई संदेह नहीं कि हृथिक रोशन की फिल्म विक्रम वेधा और वॉर २ बॉक्स ऑफिस पर असफल रही थी।  फाइटर भी बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। किन्तु, इन सभी फिल्मों में, विशेषकर विक्रम वेधा में हृथिक रोशन का अभिनय अतुलनीय था।  वह अपने चरित्र को सजीव कर ले गए थे।  फाइटर और वॉर २ में भी, उन्होंने अपने अभिनय से कोई कसर नहीं छोड़ी थी। तब इन फिल्मों के लिए हृथिक रोशन को उत्तरदाई ठहरना कितना उचित है?





 किसी अभिनेता का, किसी फिल्म की सफलता या असफलता के आधार पर आंकलन करना उपयुक्त नहीं।  उनकी फ़िल्में अच्छी न गये हों, किन्तु, इन फिल्मों में उनके अभिनय की ईमानदारी पर कोई संदेह नही है। किसी फिल्म की सफलता के लिए अभिनेता के सर पर ताज पहनाना उचित नहीं।  इसी तरह से उसकी असफलता का दोष मढ़ना भी ठीक नहीं।  फिल्म निर्माण टीम वर्क है। इसकी सफलता-विफलता का श्रेय अभिनेता के अतिरिक्त निर्देशक, कहानीकार, लेखक, संवाद लेखक, संपादक, आदि को भी दिया जाना चाहिए। 




यह भी कहा जाता है कि हृथिक रोशन अपने काम के प्रति उदासीन रहते है।  वह अपना शतप्रतिशत नहीं देते।  यह भी कहा जाता है कि वह निर्देशक के काम में हस्तक्षेप करते हैं।  सह कलाकारों को निर्देशित करने एक प्रयास करते है। इसके लिए जोधा अकबर का उदाहरण दिया जाता हैं, जहाँ वह सेट पर आशुतोष गोवारिकर को शॉट के बारे में बताते थे। वह ऐश्वर्या राय के अभिनय में भी कमी निकालते थे। किन्तु, यहाँ यह नहीं भूलना चाहिए कि जोधा अकबर एक बड़ी हिट फिल्म थी।  उनका अकबर दर्शकों को प्रभावित कर गया था। तो स्पष्ट है कि हृथिक रोशन का सुझाव स्वस्थ रहा होगा, जिसे आशुतोष को मानना या न मानना था। 





हृथिक रोशन को बड़े बजट की फिल्मों का विध्वंशक बताया जाता है।  कहा जाता है कि  फाइटर का बजट २५० करोड़ था तथा वॉर २ तो ४०० करोड़ की थी। इसके बाद भी यह दोनों फ़िल्में फ्लॉप हुई। फाइटर ने बॉक्स ऑफिस पर मात्र ३४४ करोड़ और वॉर २ ने अब तक  कठिनाई से ३०० करोड़ का व्यवसाय ही किया है। किन्तु, इसमें इकलौते हृथिक रोशन का दोष क्यों ? वॉर २ में अनिल कपूर, एनटीआर जूनियर और किआरा अडवाणी भी थी। फिल्म फाइटर के लिए अनिल कपूर का दोष क्यों नहीं होना चाहिए ? दीपिका पादुकोण को क्यों बरी किया जाए ?





इसके विपरीत, हृथिक रोशन ने अपनी योग्यता स्थापित की है। उनकी फिल्म काबिल का बजट ३५ करोड़ था। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर २०८ करोड़ का व्यवसाय किया।  इतना ही व्यवसाय ६० करोड़ में बनी फिल्म सुपर ३० ने भी किया था। यहाँ स्मरण रखना होगा कि इन दोनों फिल्मों के नायक हृथिक रोशन थे तथा दोनों फिल्में उनके कंधो पर ही टिकी हुई थी। स्पष्ट रूप से, सफल फिल्मों के इकलौते नायक हृथिक ही रहे है।





हृथिक रोशन, फ़ीनिक्स की तरह है। वह राख से उठ जाने में पटु हैं। अपनी पहली फिल्म कहो न प्यार है से वह ग्रीक गॉड बन कर उभरे।  कहो न प्यार है का बजट १० करोड़ का था।  फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ८० करोड़ का व्यवसाय किया। इस फिल्म के बाद, हृथिक की दो फिल्में फ़िज़ा और मिशन कश्मीर असफल हुई।  इन दोनों फिल्मों में हृथिक रोशन आतंकवादी की भूमिका में थे।  दर्शको को एक लवर बॉय का आतंकी बनना पसंद नहीं आया।  पर, हृथिक रोशन अगली फिल्म कभी ख़ुशी कभी गम में अमिताभ बच्चन और शाहरुख़ खान की उपस्थिति में भी दबंग साबित हुये।  ध्यान रहे कि कभी ख़ुशी कभी गम अमिताभ और शाहरुख़ के बाप बेटे पर ही केंद्रित थी। 




 कभी ख़ुशी कभी गम के बाद, ह्रितिक रोशन की निरंतर चार फिल्में आप मुझे अच्छे लगने लगे, न तुम जानो न हम, मुझसे दोस्ती करोगे और मैं प्रेम की दीवानी हूँ धराशाई हो गई। किन्तु, कोई मिल गया में उनके सुपरहीरो  न उनका रंग जमा दिया। इसके बाद, उन्होंने लक्ष्य, कृष, धूम २, जोधा अकबर जैसी एक के बाद एक हिट फ़िल्में दी। काइट्स और गुज़ारिश की असफलता के बाद वह ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा में चमक गए। अग्निपथ, कृष ३ और बैंग बैंग  हिट हुई।  असफल  मोहन जोदड़ो के बाद, उन्होंने काबिल, सुपर ३० और वॉर जैसी बड़ी हिट फिल्में दे दी।  क्या इस बार भी ऐसा नहीं होगा ?





 हृथिक रोशन अभी ५१ साल के हैं। वह खान अभिनेताओं से १० साल के लगभग छोटे है। उनमे सम्भावनाये बनी हुई है।  उनका प्रशंसकों का विस्तारित आधार है। वह एक ब्रांड है। उन पर निर्माताओं का विश्वास अभी डिगा नहीं है।  समाचार यह है कि केजीएफ चैप्टर १ और २, कांतारा फिल्मों और सालार पार्ट १ के निर्माता होम्बले फिल्म्स ने हृथिक रोशन के साथ एक अखिल भारतीय फिल्म का निर्माण करने की घोषणा कर रखी है।





यह भी समाचार है कि कृष ४ का निर्माण प्रारम्भ होने जा रहा है। इस फिल्म का निर्देशन भी हृथिक रोशन ही करेंगे।  इस फिल्म में उनकी कृष २ और अग्निपथ की जोड़ीदार प्रियंका चोपड़ा वापसी कर रही है। विश्वास कीजिये, हृथिक रोशन भी दमदार वापसी करेंगे।  वह बॉलीवुड के ग्रीक गॉड ही नहीं, राख से उठ जाने वाले फ़ीनिक्स भी है। 

Thursday, 9 October 2025

Mastiii 4’ — Masti is Loaded 4 Times Over!




The cult comedy franchise Masti is back with a bang — and this time, the madness is multiplied by four! Waveband Productions has just dropped the vibrant new poster of Mastiii 4, written and directed by Milap Milan Zaveri, and it’s already bringing back a wave of nostalgia for the original blockbuster.






The colourful, high-energy poster instantly reminds fans of the mischievous charm of Masti 1 — the laughter, the chaos, the friendship, and the sheer fun that made it iconic. Reuniting the OG trio — Riteish Deshmukh, Vivek Oberoi, and Aftab Shivdasani — as Amar, Meet, and Prem, Mastiii 4 promises to take audiences on a wild, laugh-out-loud ride when it releases on November 21, 2025.







With its quirky title font, cheeky tagline “Love Visa”, and the return of fan-favourite characters, Mastiii 4 captures the same spirit that made the Masti franchise a pop-culture favourite — loved for its humor, chemistry, and endless mischief.






Joining the laughter brigade this time are Shreya Sharma, Ruhii Singh, and Elnaaz Norouzi, adding a fresh, sparkling energy — plus a few surprise cameos that are bound to thrill long-time fans.






Presented by Zee Studios and Waveband Productions, in association with Maruti International and Balaji Telefilms, Mastiii 4 is produced by A. Jhunjhunwala and Shikha Karan Ahluwalia (Waveband Productions), with Indra Kumar and Ashok Thakeria (Maruti International), Shobha Kapoor and Ekta Kapoor (Balaji Motion Pictures), and Umesh Bansal.





With Milap Milan Zaveri’s trademark humour, the OG boys back together, and four times the madness, Mastiii 4 is all set to be Bollywood’s biggest laughter riot of 2025 — proof that some franchises only get funnier with time!