Friday, 29 August 2025

फिल्म मन का मीत को वुमन का मीट कहा था समीक्षकों ने



मन का मीत ! यह ६ फरवरी १९६९ को प्रदर्शित फिल्म का शीर्षक है।  इस फिल्म में नायिका के मांसल बदन और उसके द्वारा अपने भारी स्तनों के प्रदर्शन के कारण, फिल्म को समीक्षकों ने मन का मीत के स्थान पर वुमन का मीट कहा। इसे लेकर  मुझे जीने दो और यह रास्ते हैं प्यार के जैसी फिल्में बना कर प्रशंसा बटोर चुके सुनील दत्त की कड़ी आलोचना हुई। 





अभिनेता सुनील दत्त ने, अपने छोटे भाई सोम दत्त को हिंदी फिल्मों का नायक बनाने के विचार से फिल्म मन का मीत का निर्माण किया था।  इस एक्शन थ्रिलर फिल्म से सोम दत्त के अतिरिक्त विनोद खन्ना और लीना चंद्रावरकर का भी डेब्यू हुआ था। एक अन्य अभिनेत्री संध्या रॉय ने भी लीना चद्रावरकर की सहेली की भूमिका की था। 





मन का मीत, १९६६ में प्रदर्शित जे जयललिता की तमिल फिल्म कुमारी पेन्न की रीमेक थी।  इस फिल्म का निर्देशन ए सुब्बाराव ने किया था।  फिल्म का कथानक स्वतंत्र विचार धारा वाली युवती आरती का था ।  वह अपने माता पिता द्वारा शादी करने पर जोर दिए जाने के कारण गाँव के युवक सोमू को मिलाती है।  इसी कथानक में रोमांस था और विनोद खन्ना के विलेन के कारण एक्शन और थ्रिल भी शामिल हो गया था। 





विडम्बना देखिये कि सुनील दत्त ने, जिस भाई का फिल्म जीवन बनाने के लिए मन का मीत का निर्माण किया था, उसका फिल्म करियर नहीं बन सका। उसे फिल्म निर्माण तक सीमित रह जाना पड़ा। वास्तविकता तो यह थी कि सुनील दत्त को स्वयं सोम दत्त में प्रतिभा नहीं दिखाई देती थी। वह उन्हें अभिनय से दूर रह कर अजंता आर्ट्स के प्रोडक्शन में काम करते रहने को कहा करते थे। तब सोम दत्त के कहने पर माँ ने सुनील दत्त से फिल्म बनाने के लिए कहा।  सुनील दत्त माँ का कहना टाल नहीं सके। 





मन का मीत से फिल्म के खलनायक विनोद खन्ना ने बड़ी सफलता प्राप्त की। एक समय वह अमिताभ बच्चन के लिए खतरा बन गए थे। सबसे अधिक सफलता लीना चंद्रावरकर को मिली। उन्होंने इस फिल्म के बाद लगातार सफलता प्राप्त करते हुए, उस समय के सभी बड़े अभिनेताओं के साथ फ़िल्में की। फिल्म की दूसरी नायिका संध्या तो फिल्म के बाद कहीं खो गई। इस फिल्म से परिचय पाने वाले रणजीत को भी हिंदी फिल्मों में विलेन के रूप में सफलता मिली।






विनोद खन्ना भी मन का मीत के विलेन के लिए सुनील दत्त की पहली पसंद नहीं थे। वह उस समय के विलेन मनमोहन को लेना चाहते थे।  किन्तु, व्यस्तता के कारण मनमोहन ने  मना कर दिया। किन्तु, उन्होंने ही इस भूमिका के लिए विनोद खन्ना का नाम सुझाया। फिल्म में विनोद खन्ना के विलेन का नाम प्राण था। जो उस समय के प्रतिष्ठित खल और चरित्र अभिनेता थे। 

Thursday, 28 August 2025

रज़िया सुल्तान : निर्माता की विनाशक कमाल अमरोही की अंतिम फिल्म !



तुर्की के गुलाम वंश की अंतिम शासक रज़िया सुल्तान दिल्ली सल्तनत की इकलौती महिला शासक थी। रज़िया सुल्तान ने चार साल से भी कम  समय तक दिल्ली सल्तनत पर राज किया।  किन्तु, वह कभी शांतिपूर्वक शासन नहीं कर सकी। उनका जीवन विवादों से भरा रहा। उनके हब्शी गुलाम से प्रेम संबंधों का मुस्लिम आबादी ने भारी विरोध किया। उन्हें समलैंगिक शासक के रूप में भी याद किया जाता है।





फिल्म निर्देशक कमाल अमरोही ने इस विवादित और अनोखे चरित्र पर फिल्म बनाने का बीड़ा उठाया। कमाल अमरोही की आदत किसी फिल्म को बनाने में काफी लम्बा समय लेने की थी। उन्हें इस फिल्म को बनाने में आठ साल लगे। यद्यपि, उन्होंने फिल्म बनाने के लिए काफी शोध किया। इसके बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर टें बोल गई। 





रज़िया सुल्तान की रज़िया हेमा मालिनी थी।  उनके हब्शी गुलाम याकूत धर्मेंद्र बने थे।  रज़िया के शौहर आमिल अल्तुनिअ की भूमिका विजयेंद्र घाटगे ने की थी।  रज़िया के अब्बा हुजूर सुल्तान इल्तुमिश की भूमिका प्रदीप कुमार ने की थी।  सोहराब मोदी रज़िया के वजीर बने थे।





रज़िया सुल्तान की मैराथन शूटिंग आठ साल तक शुरू और बंद होती रही।  इस फिल्म के निर्माण में, निर्माता एके मिश्रा के अनुमानित सात से दस करोड़ तक व्यय हुए थे। लेकिन, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन ही धड़ाम हो गई ।  पूरे देश में इसके शो कैंसिल होना शुरू हो गए।  फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर मात्रा दो करोड़ का ग्रॉस किया।  मिश्रा जी को फिल्म ले डूबी।





कमाल अमरोही की फिल्म रज़िया सुल्तान की असफलता के क्या कारण थे ? रज़िया सुल्तान १६ सितम्बर १९८३ को प्रदर्शित हुई थी।  यह अमिताभ बच्चन का दौर था।  उनकी फिल्मे बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट हुआ करती थी। यह समय, हेमा मालिनी के सौतेले बेटे सनी देओल के बॉलीवुड में प्रवेश का साल था। १९८३ की सफल फिल्मों में कुली, बेताब, हीरो, हिम्मतवाला, महान, अंधा कानून, मवाली, पुकार, नौकर बीवी का, जस्टिस चौधरी बॉक्स ऑफिस पर टॉप का कारोबार कर रही थी।  ऐसे बदलते समय में, एक प्राचीन कथानक वाली फिल्म को कौन देखने जाता। 





कमाल अमरोही ने फिल्म में उस समय के बिकाऊ कलाकारों हेमा मालिनी, धर्मेंद्र, प्रदीप कुमार, बीना, सोहराब मोदी और परवीन बाबी को लिया था।  ऐसी स्टारकास्ट वाली फिल्म का दर्शकों को आकर्षित करना स्वभाविक था। किन्तु, इन्ही बड़े सितारों ने फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर असफल भी बना दिया। 





वास्तविकता यह थी कि १९८३ में अंधा कानून, जस्टिस चौधरी और नास्तिक जैसी सुपर हिट फिल्म देने वाली हेमा मालिनी फिल्म के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हुई।  वह रज़िया के चरित्र के लिए बिलकुल मिसफिट थी।  उनकी संवाद अदायगी बहुत ख़राब थी। कठिन उर्दू फारसी शब्द बोलने में उन्हें शब्दों को चबाना पड़ रहा था। वह रज़िया सुल्तान की घटिया नक़ल साबित हुई थी।





 

फिल्म रज़िया सुल्तान के याकूत धर्मेंद्र थे।  उनके चेहरे पर लगी कालिख ने फिल्म को काला कर दिया। अपने समय की इस रोमांटिक जोड़ी बिलकुल भी रोमांटिक नही हो पा रही थी।  यद्यपि, धर्मेंद्र की संवाद अदायगी ठीक-ठाक थी। किन्तु, वह याकूत के रूप में बिलकुल फब नहीं रहे थे।  फिल्म में हेमा मालिनी के साथ उनकी केमिस्ट्री जम नहीं पाई थी।





फिल्म का सबसे नकारात्मक पक्ष इसके संवाद थे। ठेठ अरबी भाषा में संवाद, मुस्लिम कथानक होने के कारण तो  उपयुक्त थे। किन्तु, आम जन के समझ से बाहर थे।  मुग़ल ए आज़म (१९६०) के बाद रज़िया सुल्तान के प्रदर्शन होने तक २३ सालों में अरब सागर में बहुत सा पानी बह गया था।  फारसी मिश्रित उर्दू समझने वाली पीढ़ी कब का मरखप गई थी। उस पर हेमा मालिनी के संवादों में कच्चापन फिल्म को असफलता के सागर में डुबो गया।




 

रज़िया सुल्तान, फिल्म के निर्देशक और निर्माता की अंतिम फिल्म तो थी ही।  यह फिल्म अभिनेता सोहराब मोदी के फिल्म जीवन की भी अंतिम फिल्म बन गई।  गीतकार जां निसार अख्तर की भी यह अंतिम फिल्म थी। इस फिल्म के निर्माण के समय ही उनका निधन हो गया था। 




रज़िया सुल्तान की शूटिंग के समय हेमा मालिनी गर्भवती थी। इस फिल्म में पहले उनके याकूत अमिताभ बच्चन और शौहर कबीर बेदी  बनने वाले थे। किन्तु, तारीखों की समस्या के कारण यह भूमिकाएं धर्मेंद्र और विजयेंद्र घाटगे के पास चली गई। 

ओडिया फिल्म #RamRajya-#TheKatakSagaContinues की झलकियाँ !




Tuesday, 26 August 2025

#Prabhas की #TheRajaSaab से #RanveerSingh का #Dhurandhar टकराव?



प्रभाष की हॉरर कॉमेडी फिल्म द राजासाब, घोषणा के साथ ही चर्चा में आ गई थी। आज भी इस फिल्म के प्रति जानकारी के लिए प्रभास के प्रशंसक इंटरनेट खंगालते रहते हे। किन्तु, इस फिल्म के प्रदर्शन की तिथि को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। भिन्न दावे हैं और भिन्न तिथियां हैं। एक दावा यह है कि फिल्म २०२६ की संक्रांति को प्रदर्शित होगी। इसमें कितनी सच्चाई है !




 

इस फिल्म को, २०२५ में ५ दिसंबर को प्रदर्शित होना था। इस तिथि को रणवीर सिंह की स्पाई थ्रिलर एक्शन फिल्म धुरंधर के प्रदर्शन की तिथि तय थी। इस टकराव को पूरे देश के दर्शक उत्सुकता से देख रहे थे। क्योंकि, प्रभास जहाँ आल वर्ल्ड अभिनेता है, रणवीर सिंह की बॉलीवुड दर्शकों में अच्छी पकड़ है। उन्हें अभी तक हलकीफुलकी एक्शन रोमांस और हास्य फिल्मों के लिये ही जाना जाता रहा है। धुरंधर उनके करियर को सशक्त आधार दे सकती थी।




 

धुरंधर में वह रॉ एजेंट की भूमिका कर रहे है। यदि, धुरंधर का प्रभास की फिल्म द राजसाब से टकराव होता तो निश्चित ही दर्शकों के प्रिय हॉरर कॉमेडी शैली के कारण द राजसाब पहली पायदान पर रहती। इसका, रणवीर सिंह की धुरंधर को पहले ही दिन से नुकसान हो सकता था।




 

बताते हैं कि रणवीर सिंह ने, प्रभास के दरबार में गुहार लगाई। उन्होंने अपने करियर की दुहाई देते हुए, प्रभास की सहानुभूति चाही। बताते हैं कि दरियादिल प्रभास ने द राजसाब को ५ दिसंबर के स्थान पर २०२६ की संक्रांति में प्रदर्शित करने पर सहमति दे दी। चूंकि, द राजसाब की निर्माता कंपनी डीवीवी एंटरटेनमेंट और पीपल मीडिया फैक्ट्री ने, आज फिल्म के १४१ दिन बाद प्रदर्शित होने की घोषणा की है, इससे ऐसा लगता है कि फिल्म संक्रांति २०२६ में ही प्रदर्शित की जाएगी।





 

यहाँ स्पष्ट करते चले कि रणवीर सिंह की धर्मपत्नी दीपिका पादुकोण ने, प्रभास की फिल्म कल्कि २८९८एडी में महत्वपूर्ण भूमिका की थी। कल्कि की शूटिंग के दौरान दीपिका की प्रभास से अच्छी ज़मने लगी थी। तभी तो वह प्रभास की फिल्म स्पिरिट में प्रभास की नायिका बना दी गई थी। अब यह बात दूसरी है कि दीपिका पादुकोण ने, शूटिंग की प्रतिदिन की लम्बी समयावधि को देखते हुए, फिल्म छोड़ दी।




 

सुपरनैचरल हॉरर या हॉरर कॉमेडी फिल्मे दर्शकों की अत्यधिक पसंद आती है। उदाहरण है कि नायिका श्रद्धा कपूर पर केंद्रित फिल्ल्म स्त्री २ अपनी हॉरर कॉमेडी शैली के कारण ही, अपने निर्माताओं को शाहरुख़ खान की फिल्म जवान की टक्कर का कारोबार दे पाने में सफल हुई।  अन्य फिल्म मुँज्या के केंद्र में तो कोई जीवित प्राणी तक नहीं था। यह फिल्म अपने वीएफएक्स चरित्र को हॉरर शैली के कारण ही १०० करोड़ का व्यवसाय  दिला पाने में सफल हुई।





 

एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय सिनेमा में सुपरनैचुरल तत्व महत्त्व पा रहे है। इस प्रकार की फिल्मों के निर्माण में १५ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह फ़िल्में अब एक्शन ड्रामा फिल्मों के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। द राजसाब में तो आधुनिक वीएफएक्स तकनीक का प्रयोग कर बनाया गया है। फिल्म के जारी कुछ चित्र इस प्रभाव के फलस्वरूप भय, भूत और हास्य का अनोखी त्रिवेणी प्रतीत होते है।





 

 द राजासाब में, प्रभास की निधि अग्रवाल के साथ जोड़ी पहली बार बन रही है। उनका परदे पर पहला परिचय, टाइगर श्रॉफ की फिल्म मुन्ना माइकल (२०१७) से हुआ था। किन्तु फिल्म फ्लॉप हुई थी। इसके बाद, निधि को बॉलीवुड से कोई फिल्म नहीं मिली। किन्तु ,वह दक्षिण में अत्यधिक सफल हुई।  इसी का परिणाम है कि वह द राजसाब में प्रभास की नायिका है। इस अवसर को वह चूकना नहीं चाहती। इसलिए वह द राजासाब के संवादों की डबिँग स्वयं कर रही है। निधि जानती हैं कि द राजासाब की सफलता उन्हें भिन्न भाषाओँ की फिल्मों के दर्शकों से प्रभावशाली परिचय करवा पाएगी।




 

यदि, प्रभास की हॉरर कॉमेडी फिल्म द राजासाब, संक्रांति २०२६ को प्रदर्शित होगी तो इसको अपने से वरिष्ठ और तेलुगु फिल्म अभिनेता चिरंजीवी के फिल्म जीवन की १५७वी फिल्म मन शंकर वारा प्रसाद गारू से प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना होगा। इस ड्रामा फिल्म के निर्देशक अनिल रविपुड़ी है। फिल्म में चिरंजीवी की नायिका नयनतारा है।  कैथरीन ट्रेसा की भूमिका भी पर्याप्त महत्वपूर्ण है। चिरंजीवी की यह फिल्म पारिवारिक दर्शकों को ध्यान में रख कर निर्मित की गई है और इसीलिए संक्रांति पर प्रदर्शित की जा रही है। 

#LokahChapter1 की सुपर हीरो #KalyaniPriyadarshan



ओणम २०२५, मलयालम फिल्मों, विशेष रूप से अभिनेत्री कल्याणी प्रियदर्शन के लिए महत्वपूर्ण है। इस वर्ष ओणम पर, कल्याणी की फिल्म फ़िल्में प्रदर्शित हो रही है। पहली फिल्म, निर्देशक डोमिनिक अरुण की फंतासी सुपरहीरो फिल्म है।  यह फिल्म २८ अगस्त को प्रदर्शित होगी। दूसरी फिल्म मोहनलाल के साथ ओडम कुथिरा चादुम कुथिरा रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है। सुपरहीरो फिल्म लोक चैप्टर १ चंदा की सुपर पावर पाने वाली चंदा कल्याणी ही है। 




मलयालम फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन और फिल्म अभिनेत्री लिसी की ५ अप्रैल १९९३ को चेन्नई में जन्मी बेटी कल्याणी प्रियदर्शन का चलचित्र जगत से प्रथम परिचय साबू सिरिल के लिए फिल्म कृष ३ के सह निर्माण निर्देशक के रूप में काम कर हुआ।  कदाचित, सुपर हीरो से उनका पहला परिचय यही से हुआ।





कल्याणी का कैमरा से पहला परिचय निखिल अक्किनेनी की रोमांटिक एक्शन फिल्म हेलो से हुआ। यद्यपि, विक्रम कुमार द्वारा निर्देशित हेलो को बॉक्स ऑफिस पर औसत सफलता मिली।  किन्तु, कल्याणी को अपने स्वाभाविक अभिनय के लिए समालोचकों की प्रशंसा मिली। इस भूमिका के लिए कल्याणी को सर्वश्रेष्ठ महिला पदार्पण के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार और २०१७ की शीर्ष तेलुगु फिल्म अभिनेत्रियों की सूची में जगह दिलाई। इसके बाद, कल्याणी को मलयालम के अतिरिक्त तमिल और तेलुगु फ़िल्में मिलती चली गई।




मलयालम फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन की बेटी कल्याणी को, प्रियदर्शन के प्रिय अभिनेता मोहनलाल के बेटे प्रणव मोहनलाल के साथ पहली फिल्म मारक्कर लायन ऑफ़ द अरेबियन में मिला। प्रणव के साथ अभिनय करने का दूसरा अवसर फिल्म वर्षांगलक्कु शेषम में मिला। इस फिल्म में उन्होंने प्रणव की पूर्व प्रेमिका की भूमिका की थी। 





उन्होंने रोमांटिक एक्शन फिल्म हीरो (२०२१) और धनुष द्वारा निर्देशित रायन (२०२४) के साथ तमिल सिनेमा में प्रवेश किया. तेलुगु फिल्मों में, वह टाइम-लूप थ्रिलर मनाडू (२०२१) और कॉमेडी-ड्रामा ब्रो डैडी (२०२२) में दिखाई दीं । यह फिल्में भिन्न शैली वाली फ़िल्में थी।





कल्याणी अब तक अखिल के अतिरिक्त सई धरमतेज, सर्वानंद, शिवकार्तिकेयन, दुलकर सलमान, सीलाम्बरासन, पृथ्वीराज सुकुमारन, आदि अभिनेताओं के साथ अभिनय कर चुकी है। उन्हें पिता पुत्र मोहनलाल और प्रणव मोहनलाल के साथ फिल्म मराक्कर में अभिनय करने का अवसर मिला।    

Monday, 25 August 2025

#Mohanlal और # MalavikaMohanan की पारिवारिक ड्रामा फिल्म #Hridayapoorvam



फिल्म एल २ इम्पुराण के एंटी हीरो कुरैशी अब्राम अभिनेता मोहनलाल इस बार पारिवारिक चरित्र बालाकृष्णन कर रहे है। फिल्म होगी निर्देशक सत्यम अन्तिकड की हृदयपूर्वम। इस फिल्म में मोहनलाल का साथ मालविका मोहनन होंगी। यह फिल्म २८ अगस्त को प्रदर्शित होने जा रही है।






हृदयपूर्वम की दर्शकों के बीच चर्चा मोहनलाल के प्रशंसकों के बीच है। जो दर्शक मोहनलाल के प्रशंसक नहीं, किन्तु उनकी फिल्म की प्रतीक्षा अवश्य करते है। उनकी यह प्रतीक्षा फिल्म को दर्शकों के समर्थन की होती है। यदि दर्शक फिल्म देख कर फिल्म को पसंद करते है तो इसका प्रभाव ऐसे दर्शकों को छविगृहों में खींच कर लाता है। यही कारण है कि निर्माताओं का ध्यान मलयालम पेटी पर ही केंद्रित है।





मोहनलाल की फिल्म ओणम के पर्व पर प्रदर्शित हो रही है। किन्तु, बॉक्स ऑफिस बिल्कुल खाली नहीं है।  इस दिन कल्याणी प्रियदर्शन और नसलेन की महिला सुपरहीरो फिल्म लोक, कल्याणी प्रियदर्शन की ही फहद फ़ाज़िल के साथ रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ओडम कुथिरा  छादम कुथिरा और एक्शन रोमकॉम मैंने प्यार किया प्रदर्शित हो रही है। यह सभी फिल्मे थोड़ा हट कर शैली में है। इसलिए, इन फिल्मों की शैली के दर्शक इनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।





यही पर मोहनलाल अन्य पर भारी पड़ जाते है। वह जहाँ भिन्न शैली की करते है। जिनमे अपराध, राजनीतिक थ्रिल और एक्शन होते है। वही वह पारिवारिक फिल्मों में भी सफल होते है।  ध्यान से देखें तो पाते हैं कि दृश्यम श्रंखला फिल्मों का केबल ऑपरेटर जॉर्ज कुट्टी भी परिवार को बचाने के लिए ही हत्या करता है। सत्यम के साथ उनकी पिछली फिल्म की सफलता इसका प्रमाण है। 

#AkshayKumar और #SaifAliKhan हैं #Priyadarshan की फिल्म के #Haiwan



बॉलीवुड फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने एक तीर से दो शिकार कर डाले। उन्होंने विगत २३ अगस्त को अपने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट कुछ इस तरह डाली-




 

"हम सब है थोड़े से शैतान। कोई ऊपर से संत, कोई अंदर से हैवान। स्टार्टिंग द शूट ऑफ़ हैवान टुडे विथ माय अब्सल्यूट फवौरिट कप्तान ऑफ़ द शिप प्रियदर्शन सर। सैफ के साथ १८ साल बाद काम करते हुये, बहुत अच्छा लग रहा है। लेट्स गेट्स द हैवानियत रोलिंग."





 

अपनी नई फिल्म हैवान की शूटिंग प्रारम्भ होने की घोषणा करने के साथ साथ उन्होंने अपनी आने वाली फिल्म जॉली एलएलबी ३ का अपनी डीपी में भी लगे हाथ उपयोग कर प्रचार कर डाला।





 

निर्देशक और लेखक सुभाष कपूर द्वारा २०१३ में प्रारम्भ की गई जॉली एलएलबी की तीसरी कड़ी १९ सितम्बर २०२५ को प्रदर्शित होने जा रही है। इस तीसरी कड़ी से वह एक बार फिर पहली जॉली के जॉली अरशद वारसी से कोर्ट रूम में आमने सामने होंगे।





 

कुछ ऐसा ही, प्रियदर्शन की फिल्म हैवान के साथ भी है। प्रियदर्शन की, अक्षय कुमार के साथ विगत प्रदर्शित फिल्म खट्टा मीठा थी। यह फिल्म २०१० में प्रदर्शित हुई थी। इसके बाद, पिछले साल अक्षय कुमार ने प्रियदर्शन की हॉरर कॉमेडी फिल्म भूत बंगला में अभिनय किया। यह फिल्म अभी प्रदर्शित नहीं हुई है। इस प्रकार से अक्षय कुमार चौदह साल बाद प्रियदर्शन की एक के बाद एक दो फिल्मों भूत बंगला और हैवान में अभिनय कर रहे है।




 

हैवान में सैफ अली खान, पहली बार प्रियदर्शन के साथ फिल्म कर रहे है। किन्तु, वह और अक्षय कुमार १८ साल बाद फिर एक साथ आ रहे है। मैं खिलाडी तू अनाड़ी के खिलाडी अक्षय कुमार और अनाड़ी सैफ अली खान की विगत प्रदर्शित फिल्म यशराज बैनर की फ्लॉप फिल्म टशन थी। इस असफ़लता के बाद सैफ और अक्षय फिर एक साथ किसी फिल्म में नहीं दिखाई दिए।





हैवान में कौन संत है, कौन हैवान है इस पर दर्शकों की दिलचस्पी हो सकती है। पता चला है कि हैवान के हैवान सैफ अली खान है तथा संत अक्षय कुमार है। यह फिल्म प्रियदर्शन की ही २०१६ में प्रदर्शित मलयालम एक्शन थ्रिलर फिल्म ओप्पम की रीमेक है। इस फिल्म में मोहनलाल ने एक अंधे चौकीदार की भूमिका की थी। हैवान में यह भूमिका सैफ अली खान के हिस्से आई है। जबकि अक्षय कुमार सीरियल किलर की भूमिका कर रहे है।





ओप्पम का निर्देशन प्रियदर्शन ने ही किया था। उनकी फिल्म का अंधा चौकीदार कान और नाक की संवेदनशीलता के सहारे सीरियल किलर को पकड़ाता है। फिल्म में सीरियल किलर एक जज द्वारा निर्दोष होने के बाद भी सजा देने के कारण, उन सभी लोगों को एक एक कर मारता है, जो इस केस से जुड़े है। 





मलयालम फिल्म में अंधे चौकीदार और सीरियल किलर की भूमिकाये मोहनलाल और समुथिरकणी ने की थी। मोहनलाल और समुथिकरणी, दोनों ही प्रतिभाशाली अभिनेता है और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के अतिरिक्त कई अन्य पुरस्कार जीत चुके है। इस दृष्टि से अभिनय की दृष्टि से सैफ और अक्षय खिलाड़ी तो नहीं, अनाडी अवश्य साबित होते है। अब यह प्रियदर्शन पर निर्भर करेगा कि वह इन अभिनेताओं के अंदर से कितनी प्रतिभा खींच निकाल पाते है ! 







नवीनतम समाचार यह है कि ओप्पम के अंधे चौकीदार रीमेक फिल्म हैवान में, मेहमान भूमिका करेंगे। सूत्र बताते हैं कि यह भूमिका चौंकाने वाली होगी। 

Sunday, 24 August 2025

राष्ट्रीय सहारा २४ अगस्त २०२५


 

जेल में #Darshan, सोशल मीडिया पर #IdreNemdiyaagIrbek



कन्नड़ दर्शकों में चैलेंजिंग स्टार या डीबॉस की उपाधि से सुशोभित अभिनेता दर्शन थुगुदीपा, इस समय रेणुकास्वामी हत्याकांड में जेल में बंद हैं। किन्तु, उनकी दिसंबर में प्रदर्शित होने जा रही एक्शन थ्रिलर फिल्म द डेविल का पहला गीत इद्रे नेमदियाग इरबेक पर सोशल मीडिया पर व्यूज बटोरता जा रहा है। इससे, दर्शन के प्रशंसक दर्शकों में नए उत्साह का संचार हो रहा है।





बी अजनीश लोकनाथ द्वारा रचित  गीत को दीपक ब्लू और अनिरुद्ध शास्त्री ने स्वरबद्ध किया है।  यदि इस गीत को सुना जाये तो उत्साह का संचार होता है। यही कारण है कि इस गीत के माध्यम से दर्शन की वापसी के अनुमान लगाए जा रहे है। 





 दर्शन की यह फिल्म उनकी गिरफ़्तारी, फिर जमानत और फिर गिरफ़्तारी के बीच पूरी हुई है।  फिल्म की शूटिंग बेंगलुरु के अतिरिक्त राजस्थान और बैंकाक की सुन्दर वादियों में की गई है। बैंकाक में फिल्म के दो गीत भी फिल्माए गए थे। 





दर्शन की एक्शन और एनर्जी से भरपूर इस फिल्म में दर्शन की रोमांटिक जोड़ी रचना राय के साथ बनाई गई है। उनके साथ सह भूमिकाओं में तुलसी, अच्युत कुमार, श्रीनिवास प्रभु, शोभराज के अतिरिक्त बॉलीवुड अभिनेता महेश मांजरेकर खल भूमिका कर रहे है। फिल्म के लेखक- निर्देशक प्रकाश वीर है। बताया जा रहा है कि इस फिल्म का कथानक दर्शन के जीवन से काफी कुछ प्रेरित है। कदाचित दर्शकों की सहानुभूति पाने के लिए !






दर्शन के प्रशंसक दर्शक चाहते है कि फिल्म की रिलीज़ पर दर्शन भी उनके साथ हों। पता नहीं ऐसा हो पायेगा कि नहीं। किन्तु, फिल्म के पहले गीत के जारी हो जाने के बाद, यह तो तय है कि फिल्म १२ दिसंबर २०२५ को अवश्य प्रदर्शित होगी। 

Thursday, 21 August 2025

#Chiranjveevi की फंतासी फिल्म #Vishwambhara २०२६ की गर्मियों में !

 


तेलुगु दर्शकों में, मेगा स्टार के  विशेषण से सुशोभित अभिनेता चिरंजीवी के जन्मदिन २२ अगस्त को उनकी फिल्म विश्वम्भरा की झलकियां दिखाई जानी  थी।  इस घोषणा के बाद, चिरंजीवी के प्रशंसक दर्शक बहुत उत्साहित थे। किन्तु, अब उनके उत्साह में पानी फिर गया लगता है। 





यह घोषणा की गई है कि विश्वम्भरा जनवरी २०२६ में प्रदर्शित नहीं हो सकेगी।  ऐसा तीसरी बार हुआ है कि विश्वम्भरा के प्रदर्शन की तिथि को परिवर्तित किया गया है।  घोषणा के अनुसार चिरंजीवी की फिल्म अब २०२६ की गर्मियों में अप्रैल में प्रदर्शित होगी।  





विश्वम्भरा के प्रदर्शन को स्थगित किये जाने का यह कारण बताया जा रहा है कि फिल्म का वीएफएक्स पर काफी काम बचा हुआ है। निर्माता बिलकुल नहीं चाहते कि उनकी फिल्म में किसी प्रकार की कमी रह जाए।





फिल्म निर्माण संस्था यूवी क्रिएशन्स की यह फिल्म एक सामाजिक फंतासी फिल्म बताई जा रही है। इसके फंतासी दृश्यों को काफी महत्त्व दिया जा रहा है। फिल्म के निर्देशक मालिदी वशिष्ठ है। फिल्म में चिरंजीवी की नायिका तृषा कृष्णा है। फिल्म का संगीत आर आर आर के ऑस्कर विजेता संगीतकार एमएम कीरावनी है।





यहाँ, विश्वम्भरा के बारे में दो महत्वपूर्ण शंकाएं है। जैसा कि घोषणा की गई थी, क्या विश्वम्भरा की झलकियां, कल चिरंजीवी के जन्मदिन २२ अगस्त को प्रदर्शित की जाएँगी।  यदि ऐसा हुआ तो फिल्म के प्रदर्शन को स्थगित किये जाने के बाद भी  प्रशंसक दर्शकों में उत्साह बना रहेगा। इसके बाद, उनका उत्साह कुछ अधिक ही हो जाएगा। 





दूसरी शंका है फिल्म का बजट।  बताते हैं कि फिल्म की घोषणा २०१८ में हुई थी। फिल्म को २०२५ में संक्रांति के अवसर पर प्रदर्शित होना था। आज, जबकि इसका प्रदर्शन अप्रैल २०२६ हो गया है। क्या यह फिल्म चिरंजीवी की सफल फिल्म बन पाएगी।  यह चिंता इसलिए की विश्वम्भरा का बजट २०१८ की तुलना में ३० प्रतिशत तक बढ़ गया है।





यहाँ स्पष्ट करते चलें कि चिरंजीवी के पास फिल्मों की कमी नहीं। २०२६ में प्रदर्शित  होने के लिए उनकी दो फिल्में मेगा १५७ और चिरु ओडेला पहले से ही तय है।  किन्तु, उनकी विगत प्रदर्शित फिल्म भोला शंकर बॉक्स ऑफिस पर पानी तक नहीं मांग सकी थी। 

Wednesday, 20 August 2025

बॉक्स ऑफिस पर यश चोपड़ा की सितारों वाला काला पत्थर !



उन दिनों, निर्देशक यश चोपड़ा धूल का फूल, वक़्त, आदमी और इंसान, इत्तेफ़ाक़, दाग, जोशीला, दीवार, कभी कभी और त्रिशूल की निरंतर सफल से जोश में थे। उन्हें लगा कि वह किसी भी विषय पर फिल्म बनाएंगे, दर्शकों को पसंद आनी ही आनी है। सो जोश में आ कर उन्होंने सितारों की भीड़ जुटा कर फिल्म काला पत्थर बना डाली।





काला पत्थर, वास्तविक दुर्घटना पर लिखी गई फिल्म थी। चासनाला में २७ दिसंबर १९७५ को एक खान दुर्घटना हुई थी। इस दुर्घटना में खान के अंदर फंसे ३७२ खादान श्रमिकों की दुखद मृत्यु हो गई थी। इसी दुर्घटना पर सलीम जावेद ने सितारों की भीड़ वाली फिल्म लिख डाली थी, जो इस लेखक द्वय की आदत के अनुसार सतही कथानक थी। 





इस कथानक पर फिल्म में अमिताभ बच्चन, संजीव कुमार, शत्रुघ्न सिन्हा, शशि कपूर, नीतू सिंह, परवीन बाबी, राखी, परीक्षित साहनी, प्रेम चोपड़ा, आदि उस समय के सफलतम अभिनेता अभिनेत्रियों की भीड़ जुटाई गई थी।  फिल्म को सलीम जावेद की सफलतम जोड़ी ने लिखा था। फिल्म का संगीत राजेश रोशन ने दिया था।  किन्तु, यशराज फिल्म्स और त्रिमूर्ति फिल्म्स के सहकार  से बनी काला पत्थर बॉक्स ऑफिस पर काला पत्थर साबित हुई। 





काला पत्थर, जैसा कि शीर्षक से पता चलता है, काला पत्थर अर्थात कोयला पर बनी फिल्म थी । इस फिल्म के केंद्र में खदान के अंदर हुई एक दुर्घटना और उसके अंदर फंसे मजदूरों को निकालने का साहसिक मानवीय प्रयास था। फिल्म में सशक्त कलाकार थे। इसलिए इस प्रकार की फिल्मों में स्वभाविकता की कोई कमी नहीं थी। किन्तु, इसके बावजूद  यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर काला पत्थर साबित हुई। 





काला पत्थर के असफलता के कारण क्या थे? निस्संदेह फिल्म की असफलता का बड़ा कारण फिल्म की ढीली और सुस्त पटकथा थी। इस प्रकार की फिल्मों में मनोरंजन की बहुत गुंजाईश नहीं होती।  दर्शकों  को फिल्म के कथानक के रोमांच से ही बाँधा जा सकता है।  सलीम जावेद की जोड़ी, ऐसा रोमांच पैदा कर पाने में असफल रही थी।  





फिल्म की कहानी में को नयापन नहीं था। नेवी ऑफिस पूर्व अमिताभ बच्चन इस अपराध बोध में जी रहा है कि उसने अपने डूबते जहाज को छोड़ कर, लोगों को मौत के मुंह जाने दिया था।  शशि कपूर कोयला खदान इंजीनियर बने थे। शत्रुघ्न ने सिन्हा को उनके खलचरित्र से बाँधा गया था।  परवीन बाबी प्रेस रिपोर्टर, नीतू सिंह पान वाली बन कर ग्लैमर बिखेर रही थी।अब यह बात दूसरी है कि यह दोनों असफल हुई।  किन्तु, यह उबाऊ कथानक की असफलता अधिक थी। 





वास्तविकता यह है कि  बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का काला पत्थर साबित होना, यश चोपड़ा की कल्पनाशीलता की असफलता थी।  वह फिल्म में ऐसा कुछ नहीं दे पाए, जो उनकी  पूर्व की फिल्मों की तरह दर्शकों को लीक से हटकर विषय के बाद बीच मनोरंजन देता था। यह भी कहाँ जा सकता है कि यश चोपड़ा अपनी मानसकिता के शिकार हुए थे।





उनकी फिल्मों को ध्यान से देखे तो कहीं न कही अवैध सम्बन्ध महत्वपूर्ण होते थे।  धर्मपुत्र की माला सिन्हा और राजेंद्र कुमार के अवैध संबंधों की धूल का फूल से लेकर त्रिशूल तक अवैध संतान चरित्र बना हुआ था। ऐसे कथानक पर वह रोमांस, संगीत और भावनाओं के टकराव का मिश्रण कर सफल फिल्म बना ले जाते थे।  काला पत्थर में यह सब नहीं था।





काला पत्थर की असफलता के लिए कहा जाता है कि यह समय से पहले की कल्ट फिल्म थी।  किन्तु, यश चोपड़ा ने, जब धूल का फूल में अवैध बच्चा पैदा करने वाली महिला को नायिका बनाया था, तब भी ऐसी नायिका समाज को स्वीकार्य नहीं थी। दाग, त्रिशूल, आदि फिल्मों के लिए भी ऐसा कहा जा सकता है।  इसलिए यह असफलता मानसिकता की असफलता थी।  यश चोपड़ा अवैध चरित्रों को केंद्र में रख कर ही सहूलियत महसूस करते थे।  इस प्रकार के मानस वाले निर्देशक जब लीक से हट कर फिल्म बनाएंगे तो वह काला पत्थर ही साबित होगी। 

Tuesday, 19 August 2025

#Yash की #Toxic में रुक्मिणी (#RukminiVasanth) का वसंत



गीतू मोहनदास के निर्देशन में यश की फिल्म टॉक्सिक अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन अप्स में ग्लैमर की भीड़ जुटने लगी है। इस गुजरे जमाने के गोवा के समुंदर और संगीत लहरियों के पीछे ड्रग माफिया के इस कथानक में ग्लैमर की तो बहुता आवश्यकता है।






गीतू मोहनदास ने इस आवश्यकता को देखते हुए कन्नड़ फिल्म अभिनेत्री रुक्मिणी वसंत को टॉक्सिक यश की ग्लैमर गर्ल के रूप में  सम्मिलित कर लिया है। रक्षित शेट्टी की सप्त सागरदाचे एलो के साथ अपने सौंदर्य और प्रतिभा का अनोखा परिचय करवाने वाली रुक्मिणी अब स्थापित नाम बन गई है। फिल्म बीरबल से कन्नड़ दर्शकों से परिचय पाने वाली रुक्मिणी अब तमिल और तेलुगु फिल्मों में भी अपनी पकड़ बना चुकी है।






एआर मुरुगादॉस की फिल्म मद्रासी में शिवकार्तिकेयन की नायिका बनने के बाद. होम्बले फिल्म्स द्वारा अपनी हिट कांतारा की प्रीक्वेल फिल्म कांतारा पार्ट १ में ऋषभ शेट्टी की नायिका बना दिया है। इन दो अभी से चर्चित हो रही फिल्मों की नायिका बनने के बाद, उनका यश की टॉक्सिक से जुड़ना उनके फिल्म करियर की दृष्टि से अमृत जैसा है। 





गीतू मोहनदास की फिल्म टॉक्सिक में यश और अक्षय ओबेरॉय के पुरुष चरित्रों को फिल्म में महिला शक्ति का सामना करना पड़ेगा। इस फिल्म में पहले करीना कपूर के आने का समाचार था। किन्तु, करीना कपूर ने फिल्म में यश की बहन की भूमिका करने से मना कर देने के बाद इस भूमिका के लिए नयनतारा को ले लिया गया।  नयनतारा के बाद, फिल्म में तारा सुतरिया, किआरा अडवाणी और हुमा कुरैशी को भी सम्मिलित कर लिया गया है।





यश की फिल्म टॉक्सिक अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन अप्स की शूटिंग अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने के लिए कन्नड़ के साथ साथ अंग्रेजी में भी  की गई है। इस फिल्म को भारतीय भाषाओँ में हिंदी,  तमिल, तेलुगु और मलयालम भाषाओँ के अतिरिक्त दुनिया की कई अन्य भाषाओँ  में भी प्रदर्शित किया जाएगा।  यह फिल्म १९ मार्च २०२६ को प्रदर्शित की जाएगी। 

#LokeshKanagraj की गैंगस्टर फिल्म के वृद्ध गैंगस्टर #Rajanikanth और #KamalHaasan



जब, २०२३ में, दक्षिण के निर्देशक एटली की फिल्म जवान सुपरहिट हो गई थी। उसके ठीक बाद, उन्होंने एक बॉलीवुड कॉलीवूड फिल्म की घोषणा की थी।   एटली बॉलीवुड बादशाह के बाद अपनी इस फिल्म में बॉलीवुड के दबंग अभिनेता सलमान खान  को एक दक्षिण के बड़े सितारे के साथ लेकर फिल्म बनाना चाहते थे। शेर खान नाम की इस फिल्म को २०२५ में प्रारम्भ होना था।





इस फिल्म के बारे में, लम्बे समय तक यही समाचार आते रहे थे कि फिल्म में सलमान खान का साथ कौन अभिनेता होगा।  कभी अल्लू अर्जुन, तो कभी कमल हासन या रजनीकांत का नाम हवा में तैरता रहा।  किन्तु, अंतिम समय तक स्टारकास्ट तय नहीं हो सकी।  अब जबकि, अगस्त व्यतीत हो रहा है, समाचार आ गया है कि एटली की सलमान खान के साथ फिल्म भारीभरकम बजट के कारण बंद कर दी गई है। तमिल फिल्म निर्देशक एआर मुरुगादॉस  के साथ सलमान खान की फिल्म  सिकंदर की बड़ी असफलता से ऐसा होना ही था। 






अब समाचार एक अन्य बड़ी फिल्म का है। इस फिल्म में  बॉलीवुड का कोई सितारा होगा या नहीं, स्पष्ट नहीं है। किन्तु, कॉलीवूड के दो बड़े और वरिष्ठ अभिनेताओं के नामों को अंतिम रूप दे दिए जाने की सूचना है।  कुली जैसी पूरी विश्व में सफल फिल्म बनाने वाले लोकेश कनगराज को यह सफलता मिलनी ही थी। 





लोकेश कनगराज की यह फिल्म वृद्ध हो चुके दो गैंगस्टरों की कहानी होगी।  फिल्म के दो गैंगस्टर चरित्रों के लिए ही कॉलीवूड के दो बड़े अभिनेताओं के नाम तय हो चुके है। अभी अभी मणिरत्नम की फिल्म ठग लाइफ में रंगराया शक्तिवेल की भूमिका में असफल हो चुके कमल हासन लोकेश की फिल्म के एक गैंगस्टर होंगे।  दूसरे गैंगस्टर, लोकेश की फिल्म कुली के कुली देवा रजनीकांत होंगे।  






लोकेश कनगराज की फिल्म का निर्माण कमल हासन की राजकमल फिल्म्स द्वारा किया जाएगा। यह एक भारीभरकम बजट वाली फिल्म होगी।  इस फिल्म से रजनीकांत और कमल हासन ४६ साल बाद एक साथ आएंगे। १९७९ में इन दोनों को मलायलम और तमिल भाषा की फिल्म अलावूदीनुम अर्पुदा विलाक्कुम में अंतिम बार देखा गया था।   रजनीकांत और कमल हासन ने अपने फिल्म जीवन में कई गैंगस्टर चरित्र किये है। देखने की बात होगी कि यह दोनों परदे पर एक दूसरे को गैंगस्टर को कैसी चुनौती दे पाते है!




लोकेश कनगराज के, कमल हासन और  रजनीकांत के साथ गैंगस्टर फिल्म बनाने की घोषणा के बाद यह  निश्चित  हो गया है कि लोकेश की कार्ति के साथ २०१९ में प्रदर्शित सुपरहिट फिल्म कैथी के सीक्वल कैथी २ का निर्माण फिलहाल के लिए प्रारम्भ नहीं होगा। यह दूसरी बार होगा कि लोकेश कार्ति की फिल्म को बाद के लिए टाल देंगे।  इसके पहले उन्होंने कुली के लिए कैथी २ की शूटिंग स्थगित कर दी थी।  

#Akhanda2 में पूनः अध्यात्मिक यात्रा पर #NandamuriBalakrishna



तेलुगु फिल्म अभिनेता नान्दीमुरि बालकृष्ण की एक्शन ड्रामा फिल्म अखण्डा २ अब २५ सितम्बर को प्रदर्शित नहीं होगी।  इस फिल्म को ५ दिसंबर तक के लिए टाल दिया गया है।  यह फिल्म बलैया के सम्बोधन से पहचाने जाने वाले नन्दीमुरि बालकृष्ण की २०२१ में प्रदर्शित तेलुगु भाषा की फंतासी एक्शन ड्रामा फिल्म अखण्डा की सीक्वल फिल्म है।  फिल्म अखण्डा में बालकृष्ण की मुरली कृष्ण और अखण्डा की दोहरी भूमिका थी।  फिल्म के निर्माण में साठ करोड़ व्यय हुए थे, जबकि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर १५० करोड़ का कुल व्यवसाय किया था। 






बोयापति श्रीनू निर्देशित फिल्म अखण्डा में मुरली कृष्ण दुष्ट शक्ति वरदराजुलू के आक्रमण का सामना करना पड़ता है।  मुरली उसे पराजित करने के लिए कोई कसर नहीं  चाहता।  वह सच्चा शिव भक्त है। इसलिए उसे शिवशक्ति मिलना तो स्वभाविक है।  मुरली कृष्णा की वरदराजुलू को पराजित करने की यात्रा यही समाप्त नहीं हुई थी। अब अखण्डा की यात्रा समाज के बच्चों की निश्छलता के प्रकृति से जुड़ाव के माध्यम से समाज में सुधार करना चाहता है।





अखण्डा २ बलैया की महंगी फिल्मों में से एक है। जहाँ, अखण्डा के निर्माण में ६० करोड़ व्यय हुए थे, वही अखण्डा २ का निर्माण २०० करोड़ के बजट से किया गया है।  इस फिल्म की सह भूमिकाओं में संयुक्त मेनन, शाश्वत चटर्जी, सर्वदमन बनर्जी, आदि के नाम उल्लेखनीय है। इस फिल्म के साथ विशेष बात यह है कि इस फिल्म से बजरंगी भाईजान फिल्म में पाकिस्तानी लड़की की मुन्नी वयस्क हो कर जननी की भूमिका में दिखाई देंगी।






अखण्डा २ के  ५ दिसंबर तक टाले जाने का लाभ तेलुगु सुपरस्टार पवन कल्याण की गैंगस्टर एक्शन फिल्म ओजी/ दे कॉल हिम ओजी को तेलुगु परदे पर बिना किसी स्पर्द्धा के बॉक्स ऑफिस पर कमाई करने का अवसर मिलेगा। फिलहाल हिंदी पेटी में भी ओजी को विक्रम भट्ट की हॉरर फिल्म हॉन्टेड ३ डी घोस्ट्स ऑफ़ द पास्ट का ही सामना करना है। 





किन्तु, अखण्डा २ के लिए ५ दिसंबर को हिंदी पेटी में रणवीर सिंह की स्पाई फिल्म धुरंधर का सामना करना होगा।  इसके अतिरिक्त विशाल भारद्वाज की शाहिद कपूर के साथ अनाम फिल्म भी प्रदर्शित हो सकती है । किन्तु, ऐसा प्रतीत होता है कि बालकृष्ण और निर्देशक बोयापति श्रीनू को तेलुग दर्शकों और हिंदी पेटी के शिवभक्तों पर भरोसा है।  

Monday, 18 August 2025

#MaddockFilms की फिल्म #VampiresOfVijaynagar #Thamba या #Thama?




विगत वर्ष, निर्माता दिनेश विजन के मैडॉक फिल्म्स ने, जब स्त्री २ और मुँज्या की सफलता के बाद, आगामी हॉरर कॉमेडी फिल्म की घोषणा की थी, तब इसका शीर्षक वैम्पायरस ऑफ़ विजयनगर, फिल्म की शैली बयान करने वाला था।  इस फिल्म का निर्देशन मुँज्या के निर्देशक आदित्य सरपोतदार ही कर रहे थे।





इस फिल्म में, बाला के बाद, अभिनेता आयुष्मान खुराना दूसरी बार मैडॉक फिल्म्स की फिल्म में काम कर रहे है। उन्हें इस फिल्म में आयुष्मान खुराना के चरित्र अलोक को इंसानियत की आखिरी उम्मीद बताया जा रहा है। इस फिल्म में उनकी वेशभूषा वैम्पायर किलर वाली लग रही है। 





फिल्म का सबसे दिलचस्प चरित्र नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी का है।  वह फिल्म में सैकड़ों वर्षों से जीवित अजर अमर वैम्पायर बने है। ट्रेलर में उनका चरित्र उत्सुकता पैदा करता है।  पूरी फिल्म उन्ही के चरित्र पर केंद्रित लगती है।






इस फिल्म में दक्षिण की सुपर सितारा अभिनेत्री रश्मिका मंदना की आयुष्मान खुराना के साथ दिलचस्प जोड़ी बनाई जा रही है। यह जोड़ी इसलिए दिलचस्प है कि फिल्म चाहे दक्षिण की हो या बॉलीवुड की, रश्मिका की भूमिका सशक्त और दिलचस्प होती है। फिल्म के ट्राइले में वह एक सूटकेस को जमीन से निकाल कर, खींचते हुए कहीं ले जा रही है। 






इसी फिल्म में परेश रावल की भूमिका भी है।  फिल्म में वह क्या भूमिका कर रहे है, अभी ज्ञात नहीं है।  किन्तु, परेश के कद के अनुसार यह महत्वपूर्ण ही लगती है। इस फिल्म का ट्रेलर कल प्रदर्शित होने वाला है। संभव है कि उस समय परेश रावल की भूमिका पर थोड़ा अधिक प्रकाश डाला जाए। 





अब जबकि यह फिल्म दिवाली २०२५ पर प्रदर्शित होने जा रही है, फिल्म का शीर्षक बदला जा चुका है।  इस फिल्म को थाम्बा शीर्षक के साथ प्रदर्शित किया जा रहा है। पता चला है कि इस फिल्म को एकाधिक सीक्वल के साथ बनाया जायेगा।  इस के लिए नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी के वैम्पायर चरित्र को आगे भी ले जाया जायेगा। 

स्क्रीन के बाद अब ओटीटी पर #Maareesan और #ThalaivanThalaivii का टकराव !



कॉलीवूड के बॉक्स ऑफिस पर २५ जुलाई २०२५ को दिलचस्प द्वंद्व जन्मा था।  बॉक्स ऑफिस पर दो फ़िल्में टकरा रही थी। यह ड्रामा थ्रिलर शैली का रोमांटिक एक्शन कॉमेडी शैल वाली फिल्मों से टकराव था। यह दो प्रतिभाशाली अभिनेताओं का टकराव था ही। 





२५ जुलाई को बॉक्स ऑफिस पर, फहद फ़ाज़िल और वाडीवेलु अभिनीत तमिल फिल्म मॉरीसन प्रदर्शित हुई थी। यह फिल्म अम्नेसिअ के मरीज के साथ एक चोर की रोड ट्रिप की कहानी थी। चोर का इरादा था कि रास्ते में वह इस व्यक्ति से पैसे चुरा लेगा। किन्तु, क्या वह व्यक्ति सचमुच अम्नेसिअ का मरीज था! इस फिल्म का निर्देशक सुधीश शंकर ने किया था। यह फिल्म ठीकठाक कारोबार कर पाने में सफल हुई थी।  





ठीक इसी दिन, एक अन्य तमिल रोमकॉम एक्शन फिल्म थलैवन थलेवी प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म का निर्देशन पण्डिराज ने किया था। फिल्म में शीर्षक भूमिका विजय सेतुपति और नित्या मेनन ने की थी। इस फिल्म का कथानक दो जिद्दी प्रेमी जोड़े की  है,जो जूनून और संघर्ष से परस्पर जुड़े है। उनका यही अशांत जुड़ाव उनमे गहरे भावनात्मक रिश्ते पैदा करता है। यह फिल्म तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और हिंदी भाषा में प्रदर्शित हुई थी। मॉरीसन बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हुई थी। 





अब यह दोनों फिल्मे ओटीटी प्लेटफार्म पर भी टकराने जा रही है। इन दोनों फिल्मों का टकराव भिन्न प्लेटफार्म के माध्यम से होगा।  मॉरीसन, जहाँ नेटफ्लिक्स इंडिया पर २२ अगस्त २०२५ से बहेगी, वही थलैवन थलेवी प्राइम वीडियो से स्ट्रीम होगी। समान  तथ्य यह हैं कि यह दोनों ही फ़िल्में तमिल के अतिरिक्त तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम के साथ साथ हिंदी में भी प्रदर्शित होंगी। 





तो दर्शकों के पास, २५ जुलाई को बढ़िया अवसर है दक्षिण के फिल्म उद्योग के दो प्रतिभाशाली अभिनेताओं फहद फ़ाज़िल और विजय सेतुपति के बीच अनोखे टकराव का घर बैठे आनंद लेने का। क्या तैयार है आप !

#ParamSundari #JanhviKapoor की #BhigiSaree



अभिषेक बच्चन के लिए दसवीं लिखने वाले लेखक, पटकथा लेखक और निर्देशक तुषार जलोटा की फिल्म परम सुंदरी, आजकल अपने गीतों के कारण चर्चा में आ रही है। इस फिल्म का सोनू निगम का गया परदेसिया गीत संगीत प्रेमियों के होंठो पर है।





अब एक अन्य गीत की चर्चा है। किन्तु, भिन्न कारणों से।  परम सुंदरी का यह गीत भीगी साड़ी से लोकप्रिय हो रहा है।  इस गीत को सचिन- जिगर ने संगीतबद्ध किया है तथा बोल अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे है। इस गीत को श्रेया घोषाल और अदनान सामी ने गाया है। 





परदे पर इस गीत को जान्हवी कपूर और सिद्धार्थ मल्होत्रा पर फिल्माया गया है। गीत का वीडियो रिलीज़ होने के बाद, यह गीत अन्य कारण से चर्चित हो रहा है। 






बारिश पर फिल्माये गए इस गीत में जान्हवी कपूर सफ़ेद झीनी साड़ी में सिद्धार्थ से चिपक कर थिरक रही है। उनके बदन से चिपकी साड़ी जान्हवी के सेक्सी होने की चुगली कर रही है। स्वयं जान्हवी भी अपने आमंत्रित करने वाले हाव भाव से इस कामुकता में इजाफा कर रहे है।





 
इसे देखते हुए सहसा जान्हवी की माँ श्रीदेवी की याद आ जाती है। श्रीदेवी, अपने समय  कोई  सेक्स बम थी। जीतेन्द्र के साथ फिल्म हिम्मतवाला में श्रीदेवी की कामुक जांघो के कारण उन्हें थंडर थइ वाली अभिनेत्री की संज्ञा दी गई थी। फिल्म मिस्टर इंडिया में उनका अनिल कपूर के साथ गीत काटे नहीं कटते दिन ये रात अत्यधिक कामुक बन बड़ा था।  इसी गीत में श्रीदेवी नीली झीनी शिफॉन साड़ी में कामुकता बिखेर रही थी। 






प्रश्न यह है कि श्रीदेवी की बेटी भी अपनी माँ जितनी कामुक है? भीगी साड़ी में तो कोई भी कामुक लगेगी।   किन्तु, आमंत्रित करने वाले जो हावभाव  ला सकती थी। वह किसी अन्य अभिनेत्री के बस   की बात नहीं थी।  यहाँ तक कि  रवीना टंडन भी टिप टिप बरसा पानी गीत में कम नंबर लाती दिखाई देती थी।  जान्हवी तो  इन दोनों अभिनेत्रियों की से अपील के आसपास तक नहीं।     

बॉक्स ऑफिस पर शोले को मात देने वाली जय संतोषी माँ !



शीर्षक चौंकाने वाला हो सकता है, किन्तु सत्य है।  १९७५ में आमने सामने १५ अगस्त को प्रदर्शित फिल्म शोले को आल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म माना जाता है। फिल्म में उस समय के शीर्ष के सितारे धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, संजीव कुमार और जया भादुड़ी बच्चन प्रमुख भूमिका में थे।  इस फिल्म से चरित्र अभिनेता जयंत के पुत्र अमजद खान का डेब्यू हुआ था।





  

इसमें को संदेह नहीं कि प्रारंभिक सप्ताह में फ्लॉप हो गई शोले ने बाद में बॉक्स ऑफिस पर डंका बजा दिया।  किन्तु, शोले की इस सफलता को थोड़ा फीका कर दिया जय संतोषी माँ ने।  निर्माता सतराम रोहरा और निर्देशक विजय शर्मा की माँ संतोषी माँ की अपनी भक्त पर कृपा का बखान करने वाली इस धार्मिक फिल्म में पुराने समय के धार्मिक फिल्मों से प्रसिद्द महिपाल, अनीता गुहा, बीएम व्यास, त्रिलोक कपूर, मनहर देसाई के साथ भारत भूषण,  कानन कौशल, आशीष कुमार, लीला मिश्रा, बेला बोस, आदि अपेक्षाकृत छोटे सितारे भिन्न भूमिकाये कर रहे थे। यद्यपि कभी इन कलाकारों का डंका बजा करता था। किन्तु,बदलते युग के साथ यह नैपथ्य में चले गए। 





एक अनुमान के अनुसार, जय संतोषी माँ के निर्माण में सतराम रोहरा ने, शोले के १५ करोड़ की तुलना में मात्रा ४ करोड़ ७५ लाख व्यय किये थे। किन्तु, फिल्म ने दर्शकों की अटूट भक्ति और श्रद्धा के बल पर बॉक्स ऑफिस पर ६७  करोड़ ८१ लाख का व्यवसाय किया था। यह व्यवसाय लागत की दृष्टि से शोले की तुलना में कही अधिक व्यवसाय करने वाला था।





जय संतोषी माँ का कथानक महर्षि नारद द्वारा संतोषी माँ की भक्त सत्यवती की देवी के प्रति श्रद्धा की परीक्षा लेने की थी। इस फिल्म ने तत्कालीन दर्शकों में संतोषी माँ के प्रति श्रद्धा और विश्वास को जन्म दिया।  देश के कोने कोने में संतोषी माँ के मंदिर खड़े हो गए।  महिलाएं उन्हें प्रसन्न करने के लिए व्रत रखने लगी। फिल्म में संतोषी माँ के प्रति दर्शको की श्रद्धा का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि जिस छविगृह में फिल्म लगी होती थी, वहां जाने वाला दर्शक सिनेमाघर की सीढ़ियों को प्रणाम कर अंदर जाता था। सिनेमाघरों के मालिकों ने छविगृह के बाहर हॉउसफुल के बोर्ड पर माला टांगनी शुरू कर दी थी। कुछ ने तो अस्थाई मंदिर भी बनवा दिए थे।




 

जय संतोषी माँ में, रामायण पर बनी फिल्मों की सीता के रूप में प्रसिद्द अनीता गुहा ने, संतोषी माँ की भूमिका की थी।  इस फिल्म के दर्शकों पर प्रभाव का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि दर्शक अनीता गुहा को सचमुच की संतोषी माँ मानने लगे थे। वह यदि कही बआहर दिख आजाती तो लोगों में उनके पैर छूने की होड़ लग जाती। 





फिल्म का संगीत सी अर्जुन ने दिया था। फिल्म के सभी गीत कवि प्रदीप ने लिखे थे। इन गीतों को  लता मंगेशकर की बहन उषा मंगेशकर के साथ साथ कवि प्रदीप, मन्ना डे और महेंद्र कपूर ने गाया था। उषा मंगेशकर के गाये दो गीत मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माँ की और मदद करो संतोषी माँ बड़े हिट हुए थे। महेंद्र कपूर और कवि प्रदीप के गाये यहां वहां जहाँ तहाँ मत पूछो कहाँ कहाँ गीत भी खूब पसंद किया गया था। संतोषी माँ की आरती वाला गीत तो मंदिरों में बजा करता था।





जय संतोषी माँ की सफलता से फिल्म से जुड़े सभी लोगों को बड़ा लाभ हुआ। उषा मंगेशकर आज भी इस फिल्म के गीतों के कारण याद की जाती है। फिल्म के संगीत ने फिल्म के निर्माता के अतिरिक्त इसे जारी करने वाली कंपनी, गायक गायिकाओं, फिल्म वितरकों और प्रदर्शकों को मालामाल कर दिया। लखनऊ के छविगृह जयहिंद में जय संतोषी माँ प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म से उन्हें इतना लाभ हुआ कि उन्होंने निकट में ही एक नया छविगृह जय भारत बना डाला। इस छविगृह के टॉप पर संतोषी माँ की मूर्ति उकेरी गई थी।





जय संतोषी माँ का रीमेक २००६ में किया गया था। १९७५ की जय संतोषी माँ के निर्माता सतराम रोहरा से परसेप्ट पिक्चर कंपनी ने पुनर्निर्माण के अधिकार खरीद लिए थे। २००६ की संतोषी माँ में १९७५ की फिल्म के मूल गीत मैं तो आरती उतारूँ रे,  मदद करो संतोषी माँ और यहाँ वहां कहाँ कहाँ भी पुनः शामिल किये गए थे। 

Saturday, 16 August 2025

पचास साल की राम तेरी गंगा मैली !



राजकपूर की निर्देशक के रूप में अंतिम फिल्म राम तेरी गंगा मैली १६ अगस्त १९८५ को प्रदर्शित हुई थी। अपने बेटे राजीव कपूर को बॉलीवुड में स्थापित  करने के लिए राजकपूर ने इस फिल्म  का निर्माण और निर्देशन किया था। राजकपूर ने फिल्म में एक बिलकुल नए चेहरे मन्दाकिनी को परदे पर उतारा था।





राम तेरी गंगा मैली बड़ी हिट फिल्म साबित हुई थी। इस फिल्म का बजट १.४४ करोड़ था।  किन्तु, फिल्म, मन्दाकिनी और उन पर फिल्माए गए कामुक दृश्यों के कारण बड़ी हिट हुई। इस  फिल्म,ने बॉक्स ऑफिस पर १९ करोड़ का कुल व्यवसाय किया था। उस समय इसे  इंडस्ट्री हिट का खिताब दिया गया। 




राजकपूर की यह फिल्म  घोषणा के साथ ही  विवादित हो गई।  आपत्ति यह थी कि फिल्म का शीर्षक राम को सम्बोधित करता था।  यह भी कि स्वामी विवेकानंद के शब्दों को एक घटिया फिल्म के लिए उपयोग किया जा रहा है। किन्तु, तमाम आपत्तियों के बाद भी राजकपूर ने न तो फिल्म का शीर्षक बदला, न ही मन्दाकिनी पर फिल्माए गए कामुक दृश्यों को हटाया। यह राजकपूर की सेंसर बोर्ड पर पकड़ थी कि मन्दाकिनी पर  फिल्माए गए तमाम कामुक दृश्य जैसे के तैसे रहने दिए गए। यहाँ तक कि फिल्म को यूनिवर्सल प्रमाणपत्र भी मिल गया। अर्थात फिल्म को अवयस्क भी बिना रोक के देख सकते थे।




राम तेरी गंगा मैली की नायिका मन्दाकिनी मेरठ की यास्मीन थी।  राजकपूर ने यास्मीन को मन्दाकिनी नाम दिया।  दूध जैसी काया वाली मन्दाकिनी, गंगा की भूमिका में फब रही थी।  राजकपूर की फिल्म पाकर सातवे आसमान पर मन्दाकिनी ने राजकपूर के निर्देश पर सफ़ेद झीनी साडी पहन कर झरने के नीचे खूब स्नान कर अपनी उभरी छातियों का दर्शन करवाया। फिल्म के एक दृश्य में तो वह पल्लू हटा कर बच्चे को स्तनपान करवा रही थी। मन्दाकिनी के इस बोल्ड दर्शन ने दर्शकों को आकर्षित करना ही था।




 
मन्दाकिनी को यह भूमिका खुशबू को हटा कर मिली थी। खुशबू आज की तमिल और तेलुगु फिल्मों की बड़ी स्टार बनने वाली अभिनेत्री थी।  बताते हैं कि राजकपूर की गंगा की पहली पसंद खुशबू थी। उस समय वह १४ साल की थी।  उनका फोटो सेशन राजकपूर को बहुत पसंद आया।  खुशबू को लेकर शूटिंग भी प्रारम्भ कर दी गई।  किन्तु, उस समय पहाड़ पर  बर्फ पड़ने लगी थी, इसलिए फिल्म के कलकत्ता में फिल्माए जाने वाले दृश्यों को पहले फिल्माने का निर्णय गया।






एक दृश्य में गंगा अपना पल्लू हटा कर बच्चे को दूध पिलाती है।  खुशबू को इस दृश्य पर कोई  आपत्ति नहीं थी। किन्तु, वह फिल्म की मांग के अनुसार नन्हे बच्चे को ठीक से पकड़ नहीं पा रही थी। यह देख कर राजकपूर ने शूटिंग रुकवा दी। खुशबू की जगह गंगा की खोज फिर की जाने  लगी।  इसके बाद फिल्म में यास्मीन आ गई।





फिल्म बड़ी हिट हुई थी। राजकपूर ने इस फिल्म का निर्माण अपने बेटे राजीव कपूर को स्टार बनाने के लिए  किया था।  क्योकि, राजीव की  पहली फिल्म एक जान है हम बुरी तरह से फ्लॉप हुई थी।  अब यह बात दूसरी है कि राम तेरी गंगा मैली की बड़ी  सफलता को इसके नायक  और नायिका राजीव कपूर और मन्दाकिनी भुना नहीं सके। दोनों का करियर लम्बा नहीं चल सका।





राम तेरी गंगा मैली से न केवल मन्दाकिनी बल्कि राजकपूर के मंझले बेटे रणधीर कपूर ने पहली बार अपने पिता के साथ फिल्म निर्माण का काम सम्हाला था। राम तेरी गंगा मैली के बाद रणधीर कपूर ने तीन अन्य फिल्मों  हीना, प्रेम ग्रन्थ और आ अब लौट चलें का निर्माण किया।  हीना का निर्देशन स्वयं रणधीर कपूर ने किया था।  प्रेम ग्रन्थ के निर्देशक राजीव कपूर और आ अब लौट चलें के निर्देशक ऋषि कपूर थे। जबकि रंधीर कपूर हीना से पूर्व आज और कल तथा धरम करम निर्देशित कर चुके थे।





राजकपूर को फिल्म राम तेरी गंगा मैली का विचार १९५९ में फिल्म जिस देश में गंगा बहती है के निर्माण के समय आया था।  शंकर जयकिशन के बाद, अपनी फिल्मों का संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से तैयार करवाने वाले राजकपूर ने, राम तेरी गंगा मैली के लिए संगीतकार के रूप में रविन्द्र जैन का चुनाव एक भजन कार्यक्रम के दौरान रविन्द्र जैन को एक राधा एक मीरा गाते हुए सुन कर किया ।  वह रविन्द्र जैन से बड़े प्रभावित हुए।  उन्होंने तत्काल रविंद्र जैन को अपनी इस फिल्म  का संगीतकार बना दिया।  साथ ही यह शर्त भी रखी कि फिल्म में एक भजन जरुर होगा।




सीमा पार के  रोमांस से बॉलीवुड से  परिचय करवाने वाले राजकपूर थे। वह राम तेरी गंगा मैली के बाद, के ए अब्बास की लिखी कहानी  हीना पर फिल्म बनाना चाहते थे। किन्तु,  पाकिस्तान में शूटिंग की अनुमति न मिलने पर, उन्होने इस कहानी पर फिल्म बनाने का कार्यक्रम टाल दिया।  इसके तीन साल बाद, रणधीर कपूर ने हीना को पुनः अपने हाथ में लिया।  फिल्म की हीना जेबा बख्तियार थी।  ऋषि कपूर की सह भूमिका में अश्विनी भावे थी। फिल्म १९९१ में प्रदर्शित हुई।