Monday, 18 August 2025

स्क्रीन के बाद अब ओटीटी पर #Maareesan और #ThalaivanThalaivii का टकराव !



कॉलीवूड के बॉक्स ऑफिस पर २५ जुलाई २०२५ को दिलचस्प द्वंद्व जन्मा था।  बॉक्स ऑफिस पर दो फ़िल्में टकरा रही थी। यह ड्रामा थ्रिलर शैली का रोमांटिक एक्शन कॉमेडी शैल वाली फिल्मों से टकराव था। यह दो प्रतिभाशाली अभिनेताओं का टकराव था ही। 





२५ जुलाई को बॉक्स ऑफिस पर, फहद फ़ाज़िल और वाडीवेलु अभिनीत तमिल फिल्म मॉरीसन प्रदर्शित हुई थी। यह फिल्म अम्नेसिअ के मरीज के साथ एक चोर की रोड ट्रिप की कहानी थी। चोर का इरादा था कि रास्ते में वह इस व्यक्ति से पैसे चुरा लेगा। किन्तु, क्या वह व्यक्ति सचमुच अम्नेसिअ का मरीज था! इस फिल्म का निर्देशक सुधीश शंकर ने किया था। यह फिल्म ठीकठाक कारोबार कर पाने में सफल हुई थी।  





ठीक इसी दिन, एक अन्य तमिल रोमकॉम एक्शन फिल्म थलैवन थलेवी प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म का निर्देशन पण्डिराज ने किया था। फिल्म में शीर्षक भूमिका विजय सेतुपति और नित्या मेनन ने की थी। इस फिल्म का कथानक दो जिद्दी प्रेमी जोड़े की  है,जो जूनून और संघर्ष से परस्पर जुड़े है। उनका यही अशांत जुड़ाव उनमे गहरे भावनात्मक रिश्ते पैदा करता है। यह फिल्म तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और हिंदी भाषा में प्रदर्शित हुई थी। मॉरीसन बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हुई थी। 





अब यह दोनों फिल्मे ओटीटी प्लेटफार्म पर भी टकराने जा रही है। इन दोनों फिल्मों का टकराव भिन्न प्लेटफार्म के माध्यम से होगा।  मॉरीसन, जहाँ नेटफ्लिक्स इंडिया पर २२ अगस्त २०२५ से बहेगी, वही थलैवन थलेवी प्राइम वीडियो से स्ट्रीम होगी। समान  तथ्य यह हैं कि यह दोनों ही फ़िल्में तमिल के अतिरिक्त तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम के साथ साथ हिंदी में भी प्रदर्शित होंगी। 





तो दर्शकों के पास, २५ जुलाई को बढ़िया अवसर है दक्षिण के फिल्म उद्योग के दो प्रतिभाशाली अभिनेताओं फहद फ़ाज़िल और विजय सेतुपति के बीच अनोखे टकराव का घर बैठे आनंद लेने का। क्या तैयार है आप !

#ParamSundari #JanhviKapoor की #BhigiSaree



अभिषेक बच्चन के लिए दसवीं लिखने वाले लेखक, पटकथा लेखक और निर्देशक तुषार जलोटा की फिल्म परम सुंदरी, आजकल अपने गीतों के कारण चर्चा में आ रही है। इस फिल्म का सोनू निगम का गया परदेसिया गीत संगीत प्रेमियों के होंठो पर है।





अब एक अन्य गीत की चर्चा है। किन्तु, भिन्न कारणों से।  परम सुंदरी का यह गीत भीगी साड़ी से लोकप्रिय हो रहा है।  इस गीत को सचिन- जिगर ने संगीतबद्ध किया है तथा बोल अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे है। इस गीत को श्रेया घोषाल और अदनान सामी ने गाया है। 





परदे पर इस गीत को जान्हवी कपूर और सिद्धार्थ मल्होत्रा पर फिल्माया गया है। गीत का वीडियो रिलीज़ होने के बाद, यह गीत अन्य कारण से चर्चित हो रहा है। 






बारिश पर फिल्माये गए इस गीत में जान्हवी कपूर सफ़ेद झीनी साड़ी में सिद्धार्थ से चिपक कर थिरक रही है। उनके बदन से चिपकी साड़ी जान्हवी के सेक्सी होने की चुगली कर रही है। स्वयं जान्हवी भी अपने आमंत्रित करने वाले हाव भाव से इस कामुकता में इजाफा कर रहे है।





 
इसे देखते हुए सहसा जान्हवी की माँ श्रीदेवी की याद आ जाती है। श्रीदेवी, अपने समय  कोई  सेक्स बम थी। जीतेन्द्र के साथ फिल्म हिम्मतवाला में श्रीदेवी की कामुक जांघो के कारण उन्हें थंडर थइ वाली अभिनेत्री की संज्ञा दी गई थी। फिल्म मिस्टर इंडिया में उनका अनिल कपूर के साथ गीत काटे नहीं कटते दिन ये रात अत्यधिक कामुक बन बड़ा था।  इसी गीत में श्रीदेवी नीली झीनी शिफॉन साड़ी में कामुकता बिखेर रही थी। 






प्रश्न यह है कि श्रीदेवी की बेटी भी अपनी माँ जितनी कामुक है? भीगी साड़ी में तो कोई भी कामुक लगेगी।   किन्तु, आमंत्रित करने वाले जो हावभाव  ला सकती थी। वह किसी अन्य अभिनेत्री के बस   की बात नहीं थी।  यहाँ तक कि  रवीना टंडन भी टिप टिप बरसा पानी गीत में कम नंबर लाती दिखाई देती थी।  जान्हवी तो  इन दोनों अभिनेत्रियों की से अपील के आसपास तक नहीं।     

बॉक्स ऑफिस पर शोले को मात देने वाली जय संतोषी माँ !



शीर्षक चौंकाने वाला हो सकता है, किन्तु सत्य है।  १९७५ में आमने सामने १५ अगस्त को प्रदर्शित फिल्म शोले को आल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म माना जाता है। फिल्म में उस समय के शीर्ष के सितारे धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, संजीव कुमार और जया भादुड़ी बच्चन प्रमुख भूमिका में थे।  इस फिल्म से चरित्र अभिनेता जयंत के पुत्र अमजद खान का डेब्यू हुआ था।





  

इसमें को संदेह नहीं कि प्रारंभिक सप्ताह में फ्लॉप हो गई शोले ने बाद में बॉक्स ऑफिस पर डंका बजा दिया।  किन्तु, शोले की इस सफलता को थोड़ा फीका कर दिया जय संतोषी माँ ने।  निर्माता सतराम रोहरा और निर्देशक विजय शर्मा की माँ संतोषी माँ की अपनी भक्त पर कृपा का बखान करने वाली इस धार्मिक फिल्म में पुराने समय के धार्मिक फिल्मों से प्रसिद्द महिपाल, अनीता गुहा, बीएम व्यास, त्रिलोक कपूर, मनहर देसाई के साथ भारत भूषण,  कानन कौशल, आशीष कुमार, लीला मिश्रा, बेला बोस, आदि अपेक्षाकृत छोटे सितारे भिन्न भूमिकाये कर रहे थे। यद्यपि कभी इन कलाकारों का डंका बजा करता था। किन्तु,बदलते युग के साथ यह नैपथ्य में चले गए। 





एक अनुमान के अनुसार, जय संतोषी माँ के निर्माण में सतराम रोहरा ने, शोले के १५ करोड़ की तुलना में मात्रा ४ करोड़ ७५ लाख व्यय किये थे। किन्तु, फिल्म ने दर्शकों की अटूट भक्ति और श्रद्धा के बल पर बॉक्स ऑफिस पर ६७  करोड़ ८१ लाख का व्यवसाय किया था। यह व्यवसाय लागत की दृष्टि से शोले की तुलना में कही अधिक व्यवसाय करने वाला था।





जय संतोषी माँ का कथानक महर्षि नारद द्वारा संतोषी माँ की भक्त सत्यवती की देवी के प्रति श्रद्धा की परीक्षा लेने की थी। इस फिल्म ने तत्कालीन दर्शकों में संतोषी माँ के प्रति श्रद्धा और विश्वास को जन्म दिया।  देश के कोने कोने में संतोषी माँ के मंदिर खड़े हो गए।  महिलाएं उन्हें प्रसन्न करने के लिए व्रत रखने लगी। फिल्म में संतोषी माँ के प्रति दर्शको की श्रद्धा का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि जिस छविगृह में फिल्म लगी होती थी, वहां जाने वाला दर्शक सिनेमाघर की सीढ़ियों को प्रणाम कर अंदर जाता था। सिनेमाघरों के मालिकों ने छविगृह के बाहर हॉउसफुल के बोर्ड पर माला टांगनी शुरू कर दी थी। कुछ ने तो अस्थाई मंदिर भी बनवा दिए थे।




 

जय संतोषी माँ में, रामायण पर बनी फिल्मों की सीता के रूप में प्रसिद्द अनीता गुहा ने, संतोषी माँ की भूमिका की थी।  इस फिल्म के दर्शकों पर प्रभाव का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि दर्शक अनीता गुहा को सचमुच की संतोषी माँ मानने लगे थे। वह यदि कही बआहर दिख आजाती तो लोगों में उनके पैर छूने की होड़ लग जाती। 





फिल्म का संगीत सी अर्जुन ने दिया था। फिल्म के सभी गीत कवि प्रदीप ने लिखे थे। इन गीतों को  लता मंगेशकर की बहन उषा मंगेशकर के साथ साथ कवि प्रदीप, मन्ना डे और महेंद्र कपूर ने गाया था। उषा मंगेशकर के गाये दो गीत मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माँ की और मदद करो संतोषी माँ बड़े हिट हुए थे। महेंद्र कपूर और कवि प्रदीप के गाये यहां वहां जहाँ तहाँ मत पूछो कहाँ कहाँ गीत भी खूब पसंद किया गया था। संतोषी माँ की आरती वाला गीत तो मंदिरों में बजा करता था।





जय संतोषी माँ की सफलता से फिल्म से जुड़े सभी लोगों को बड़ा लाभ हुआ। उषा मंगेशकर आज भी इस फिल्म के गीतों के कारण याद की जाती है। फिल्म के संगीत ने फिल्म के निर्माता के अतिरिक्त इसे जारी करने वाली कंपनी, गायक गायिकाओं, फिल्म वितरकों और प्रदर्शकों को मालामाल कर दिया। लखनऊ के छविगृह जयहिंद में जय संतोषी माँ प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म से उन्हें इतना लाभ हुआ कि उन्होंने निकट में ही एक नया छविगृह जय भारत बना डाला। इस छविगृह के टॉप पर संतोषी माँ की मूर्ति उकेरी गई थी।





जय संतोषी माँ का रीमेक २००६ में किया गया था। १९७५ की जय संतोषी माँ के निर्माता सतराम रोहरा से परसेप्ट पिक्चर कंपनी ने पुनर्निर्माण के अधिकार खरीद लिए थे। २००६ की संतोषी माँ में १९७५ की फिल्म के मूल गीत मैं तो आरती उतारूँ रे,  मदद करो संतोषी माँ और यहाँ वहां कहाँ कहाँ भी पुनः शामिल किये गए थे। 

Saturday, 16 August 2025

पचास साल की राम तेरी गंगा मैली !



राजकपूर की निर्देशक के रूप में अंतिम फिल्म राम तेरी गंगा मैली १६ अगस्त १९८५ को प्रदर्शित हुई थी। अपने बेटे राजीव कपूर को बॉलीवुड में स्थापित  करने के लिए राजकपूर ने इस फिल्म  का निर्माण और निर्देशन किया था। राजकपूर ने फिल्म में एक बिलकुल नए चेहरे मन्दाकिनी को परदे पर उतारा था।





राम तेरी गंगा मैली बड़ी हिट फिल्म साबित हुई थी। इस फिल्म का बजट १.४४ करोड़ था।  किन्तु, फिल्म, मन्दाकिनी और उन पर फिल्माए गए कामुक दृश्यों के कारण बड़ी हिट हुई। इस  फिल्म,ने बॉक्स ऑफिस पर १९ करोड़ का कुल व्यवसाय किया था। उस समय इसे  इंडस्ट्री हिट का खिताब दिया गया। 




राजकपूर की यह फिल्म  घोषणा के साथ ही  विवादित हो गई।  आपत्ति यह थी कि फिल्म का शीर्षक राम को सम्बोधित करता था।  यह भी कि स्वामी विवेकानंद के शब्दों को एक घटिया फिल्म के लिए उपयोग किया जा रहा है। किन्तु, तमाम आपत्तियों के बाद भी राजकपूर ने न तो फिल्म का शीर्षक बदला, न ही मन्दाकिनी पर फिल्माए गए कामुक दृश्यों को हटाया। यह राजकपूर की सेंसर बोर्ड पर पकड़ थी कि मन्दाकिनी पर  फिल्माए गए तमाम कामुक दृश्य जैसे के तैसे रहने दिए गए। यहाँ तक कि फिल्म को यूनिवर्सल प्रमाणपत्र भी मिल गया। अर्थात फिल्म को अवयस्क भी बिना रोक के देख सकते थे।




राम तेरी गंगा मैली की नायिका मन्दाकिनी मेरठ की यास्मीन थी।  राजकपूर ने यास्मीन को मन्दाकिनी नाम दिया।  दूध जैसी काया वाली मन्दाकिनी, गंगा की भूमिका में फब रही थी।  राजकपूर की फिल्म पाकर सातवे आसमान पर मन्दाकिनी ने राजकपूर के निर्देश पर सफ़ेद झीनी साडी पहन कर झरने के नीचे खूब स्नान कर अपनी उभरी छातियों का दर्शन करवाया। फिल्म के एक दृश्य में तो वह पल्लू हटा कर बच्चे को स्तनपान करवा रही थी। मन्दाकिनी के इस बोल्ड दर्शन ने दर्शकों को आकर्षित करना ही था।




 
मन्दाकिनी को यह भूमिका खुशबू को हटा कर मिली थी। खुशबू आज की तमिल और तेलुगु फिल्मों की बड़ी स्टार बनने वाली अभिनेत्री थी।  बताते हैं कि राजकपूर की गंगा की पहली पसंद खुशबू थी। उस समय वह १४ साल की थी।  उनका फोटो सेशन राजकपूर को बहुत पसंद आया।  खुशबू को लेकर शूटिंग भी प्रारम्भ कर दी गई।  किन्तु, उस समय पहाड़ पर  बर्फ पड़ने लगी थी, इसलिए फिल्म के कलकत्ता में फिल्माए जाने वाले दृश्यों को पहले फिल्माने का निर्णय गया।






एक दृश्य में गंगा अपना पल्लू हटा कर बच्चे को दूध पिलाती है।  खुशबू को इस दृश्य पर कोई  आपत्ति नहीं थी। किन्तु, वह फिल्म की मांग के अनुसार नन्हे बच्चे को ठीक से पकड़ नहीं पा रही थी। यह देख कर राजकपूर ने शूटिंग रुकवा दी। खुशबू की जगह गंगा की खोज फिर की जाने  लगी।  इसके बाद फिल्म में यास्मीन आ गई।





फिल्म बड़ी हिट हुई थी। राजकपूर ने इस फिल्म का निर्माण अपने बेटे राजीव कपूर को स्टार बनाने के लिए  किया था।  क्योकि, राजीव की  पहली फिल्म एक जान है हम बुरी तरह से फ्लॉप हुई थी।  अब यह बात दूसरी है कि राम तेरी गंगा मैली की बड़ी  सफलता को इसके नायक  और नायिका राजीव कपूर और मन्दाकिनी भुना नहीं सके। दोनों का करियर लम्बा नहीं चल सका।





राम तेरी गंगा मैली से न केवल मन्दाकिनी बल्कि राजकपूर के मंझले बेटे रणधीर कपूर ने पहली बार अपने पिता के साथ फिल्म निर्माण का काम सम्हाला था। राम तेरी गंगा मैली के बाद रणधीर कपूर ने तीन अन्य फिल्मों  हीना, प्रेम ग्रन्थ और आ अब लौट चलें का निर्माण किया।  हीना का निर्देशन स्वयं रणधीर कपूर ने किया था।  प्रेम ग्रन्थ के निर्देशक राजीव कपूर और आ अब लौट चलें के निर्देशक ऋषि कपूर थे। जबकि रंधीर कपूर हीना से पूर्व आज और कल तथा धरम करम निर्देशित कर चुके थे।





राजकपूर को फिल्म राम तेरी गंगा मैली का विचार १९५९ में फिल्म जिस देश में गंगा बहती है के निर्माण के समय आया था।  शंकर जयकिशन के बाद, अपनी फिल्मों का संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से तैयार करवाने वाले राजकपूर ने, राम तेरी गंगा मैली के लिए संगीतकार के रूप में रविन्द्र जैन का चुनाव एक भजन कार्यक्रम के दौरान रविन्द्र जैन को एक राधा एक मीरा गाते हुए सुन कर किया ।  वह रविन्द्र जैन से बड़े प्रभावित हुए।  उन्होंने तत्काल रविंद्र जैन को अपनी इस फिल्म  का संगीतकार बना दिया।  साथ ही यह शर्त भी रखी कि फिल्म में एक भजन जरुर होगा।




सीमा पार के  रोमांस से बॉलीवुड से  परिचय करवाने वाले राजकपूर थे। वह राम तेरी गंगा मैली के बाद, के ए अब्बास की लिखी कहानी  हीना पर फिल्म बनाना चाहते थे। किन्तु,  पाकिस्तान में शूटिंग की अनुमति न मिलने पर, उन्होने इस कहानी पर फिल्म बनाने का कार्यक्रम टाल दिया।  इसके तीन साल बाद, रणधीर कपूर ने हीना को पुनः अपने हाथ में लिया।  फिल्म की हीना जेबा बख्तियार थी।  ऋषि कपूर की सह भूमिका में अश्विनी भावे थी। फिल्म १९९१ में प्रदर्शित हुई। 

Friday, 15 August 2025

गाँव और किसान की बात करती प्रेम कहानी का नया दौर !



अड़सठ साल पहले, १५ अगस्त १९५७ फिल्म नया दौर प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म में दिलीप कुमार और वैजयंतीमाला की सुपरहिट जोडी के साथ अजित, जॉन वॉकर,  चाँद उस्मानी, नज़ीर हुसैन, मनमोहन कृष्ण, लीला चिटनिस, प्रतिमा  देवी, डेज़ी ईरानी और राधाकृष्ण प्रमुख भूमिका  थे। फिल्म के निर्देशक बीआर चोपड़ा थे।  फिल्म का संगीत ओपी नय्यर ने दिया था।






यह फिल्म गांव और किसान की बात करती थी। फिल्म में प्रेम त्रिकोण था।  शंकर और कृष्णा एक ही लड़की रजनी से प्रेम करते थे ।  एक गलतफहमी के कारण दोनों के बीच दुश्मनी पैदा हो जाती है।  शंकर को बैलगाड़ी रेस में हारने के लिए कृष्णा लकड़ी के पल की बल्लियां काट देता है। इसी बीच उसकी गलतफहमी दूर हो जाती है। तब कृष्णा अपने दोस्त को बचाने के लिए टूट रही पुल को गिराने से बचाने के लिए अपना कंधा लगा देता है।  दोनों दोस्तों का मिलन हो जाता है।




नया दौर का निर्माण और निर्देशन बीआर चोपड़ा ने बीआर फिल्मस के अंतर्गत किया था।  यह इस बैनर की दूसरी फिल्म थी। इस बैनर से पहली फिल्म एक ही रास्ता बनाई गई थी। बीआर चोपड़ा को पूरी ईमानदारी से समाज सुधार वाली फिल्म बनाने के लिए जाना जाता। था।  साधना वैश्या पुनर्रुद्धार वाली फिल्म थी। गुमराह घर को बचाने का सन्देश देती थी।




नया दौर की नायिका के रूप में मधुबाला को लिया गया था।  मधुबाला को अनुबंध राशि भी दे दी गई थी। फिल्म की शूटिंग १५ दिनों तक अच्छी तरह से चली। इसके बाद, फिल्म का लंबा शिड्यूल भोपाल में रखा गया।  बीआर चोपड़ा ने  अनुबंध की राशि वापस न करने पर मधुबाला पर मुक़दमा कर दिया।  यह मुक़दमा लम्बे समय तक चला। जिसमे मधुबाला हार गई। इस बीच चोपड़ा ने मधुबाला की जगह वैजयंतीमाला को लेकर फिल्म पूरी कर प्रदर्शित भी कर दी। फिल्म बड़ी हिट हुई।  इस के बाद, बीआर चोपड़ा ने केस को वापस ले लिया।




नया दौर के निर्माण में, बीआर चोपड़ा ने १४ लाख खर्च किये थे।  फिल्म इतनी बड़ी सफल हुई कि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ३ करोड़ ७५ लाख का ग्रॉस कर लिया।





इस फिल्म को तमिल में डब का प्रदर्शित किया गया था।  यह १९५७ की दूसरी बड़ी हिट फिल्म थी। इस साल शीर्ष का कारोबार मेहबूब खान की नरगिस अभिनीत फिल्म मदर इंडिया ने किया था।  संयोग है कि मेहबूब खान ने मदर इंडिया के लिए दिलीप कुमार को साइन किया था।  दिलीप कुमार को अपनी भूमिका पसंद बीच थी। किन्तु वह चाहते थे कि  फिल्म में नरगिस को हटा दे। पर मेहबूब खान ने नरगिस को हटाने के स्थान पर दिलीप कुमार को  निकाल बाहर किया।  नरगिस के बिरजू सुनील दत्त बन गए।  जो बाद में नरगिस के पति बने। 




२००७ में नया दौर को रंगीन बना कर पुनः प्रदर्शित किया गया। किन्तु, रंगीन नया दौर दर्शकों को आकर्षित नहीं कर सकी।  कहा जाता है कि फिल्म को अच्छी तरह से प्रमोट नहीं किया  गया था। इसी साल दिलीप कुमार और मधुबाला की फिल्म मुगलेआज़म भी रंगीन बना कर प्रदर्शित की गई थी।





फ़िल्मकार सुबोध मुख़र्जी ने ही नहीं मदर इंडिया बनाने वाले मेहबूब खान और राजकपूर ने ने भी नया दौर के असामान्य कथानक को बॉक्स ऑफिस के लिए जहरीला बताया था।  किन्तु,बीआर चोपड़ा इस कथानक से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने इस कथानक पर नया दौर पूरी  भी कर डाली। 




नया दौर के, ओपी नय्यर द्वारा रचित सभी गीत बड़े सफल हुए।  इन गीतों के कारण ही नया दौर बड़ी हिट फिल्म बन पाई। किन्तु,  विडम्बना देखिए कि नया दौर के बाद, ओपी  नय्यर ने बीआर चोपड़ा के लिए कोई फिल्म नहीं की।

Thursday, 14 August 2025

नब्बे साल पहले अछूत कन्या से प्रेम किया था ब्राहमण युवक ने !



शाज़िया इक़बाल के निर्देशन में बनी ड्रामा फिल्मं धड़क २ बॉक्स ऑफिस पर ध्वस्त हो गई है। साठ करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म मुश्किल से २५ करोड़ का आंकड़ा भी नहीं पार कर पाई है। वह भी तब जबकि यह देश की कथित जाति व्यवस्था के ज्वलंत प्रश्न कोई उकेरती है।










स्पष्ट है कि छोटे जाति के लडके से बड़ी जाति की लड़की का रोमांस फिल्म के कथानक की तरह दर्शकों को भी पसंद नहीं आया। यहाँ तक कि उन जातियों को भी नहीं, जो इस जाति-व्यवस्था के शिकार बताये जाते है।






धड़क २ की असफलता के लिए कौन उत्तरदाई है ? ऊंची जात या निचली जात  ! या फिर लेखक और निर्देशक।  कदाचित दोनों ही।  क्योंकि, इस फ़िल्म को निर्देशक शाज़िया के साथ राहुल भाडवेलकर ने लिखा है। वास्तव में यह फिल्म मारी सेल्वाराज लिखित और निर्देशित तमिल फिल्म परियेरुम पेरुमल पर आधारित है। तमिल फ़िल्मकार ऊंची जाति के लोगों पर आक्षेप करने वाली फ़िल्में बनाते रहते है। किन्तु, बॉलीवुड में अभी ऐसा कोई चलन नहीं बना है।  क्यों नहीं ? धड़क २ इसका प्रमाण है।






इधर कुछ सालों से, बॉलीवुड द्वारा बनाई गई फिल्मों में धड़क, शूद्र द राइजिंग, आर्टिकल १५, खाप, आरक्षण, मसान, आदि फ़िल्में प्रेरित और पूर्वाग्रह से युक्त फ़िल्में लगती है। इनकी ईमानदारी पर प्रश्नचिन्ह तब लग जाता है, जब इन फिल्मों को नीची जाति वाले दर्शकों द्वारा भी नहीं देखी जाती। 






ऐसे समय में, बम्बईया फिल्मों के पुराने दौर में जाना होगा।  क्योंकि, इस दौर में गिनी चुनी फिल्मे ही सही, जातिगत भेदभाव पर पूरी ईमानदारी से बनी। इसी ईमानदार प्रयास का परिणाम था कि यह इक्कादुक्का फिल्में दर्शकों द्वारा उस दौर में बीच स्वीकार भी की गई, जब जाति प्रथा के विरुद्ध कड़े कानून नहीं बने थे ।






ऎसी ही एक फिल्म थी अछूत कन्या। बॉम्बे टॉकीज की निर्माता हिमांशु राय की फ्रेंज़ ऑस्टिन द्वारा निर्देशित हिंदी फिल्म अछूत कन्या में दलित कन्या और ब्राह्मण युवक की दुखांत प्रेम कहानी थी। फिल्म में अछूत कन्या की भूमिका ब्राह्मण जाति की देविका रानी ने की थी।  फिल्म के सवर्ण नायक अशोक कुमार भी सवर्ण जाति के थे।  इसके बावजूद यह एक ईमानदार प्रयास फिल्म थी।  कोई ९० साल पहले प्रदर्शित इस फिल्म ने १९३६ में तहलका मचा दिया था। फिल्म की कड़ी आलोचना हुई थी। किन्तु, बहुतों को सोचने का अवसर भी दिया था। इसके बाद, देश में सुधारवादी युग की शुरुआत हुई। इसीलिए इस फिल्म को सुधारवादी फिल्म के रूप में याद किया जाता है। 






जाति व्यवस्था पर एक अन्य फिल्म सुजाता १९५९ में प्रदर्शित हुई थी। यह फिल्म रोमांस की चासनी में लिपटी दलित युवती सुजाता से एक ब्राह्मण युवा अधीर के प्रेम की कहानी थी। सुजाता की भूमिका नूतन ने और अधीर सुनील दत्त बने थे। इस फिल्म के निर्देशक बिमल रॉय थे।  फिल्म को नब्येंदू घोष, सुबोध घोष  और पॉल महेंद्र ने लिखा था।  फिल्म में शशिकला, ललिता पवार, तरुण बोस, सुलोचना और असित सेन की प्रमुख भूमिकाएं थी।





सुजाता की विशेषता थी कि जहाँ अछूत कन्या में अछूत कस्तूरी को अपने प्रेमी प्रताप को बचाने के लिए सामने से आती ट्रेन को रोकने के प्रयास में अपनी जान देनी पड़ती थी, वही सुजाता में अधीर के परिवार वाले सुजाता द्वारा रक्त दान से प्रभावित हो आकर उसे अपनी बहू बनाने के लिए तैयार हो जाते थे।






स्पष्ट है कि अछूत कन्या से लेकर सुजाता तक की २३ साल लम्बी यात्रा में हिंदी फिल्मकारों ने इतनी हिम्मत जुटाई  कि वह अपनी अछूत कन्या सुजाता को ब्राह्मण अधीर के घर की बहू बनवा पाने में सफल हुए।







इस दृष्टि से, अंकुर और निशांत भी प्रशंसनीय फिल्में है। ग्रामीण पृष्ठभूमि वाली श्याम बेनेगल की यह फ़िल्में ऊंची जाति के जमींदार के विरुद्ध आवाज उठाती है। वही, सत्यजीत रे की सद्गति, आक्रोश, पार, आदि फिल्मे दलितों की दुर्दशा गंभीरता से उठाती है।







आजकल, धड़क २, आर्टिकल १५, आरक्षण, जैसी फ़िल्में इसलिए सफल नहीं हो पा रही है कि यह समस्या को समझ कर कहानी का विषय बनाने के स्थान पर सवर्णों को आरोपित करने का प्रयास लगती है। 

Wednesday, 13 August 2025

भारत में फ्लॉप सनी देओल की कसम, बांगलादेश में हिट फूल और पत्थर !



बेताब  फिल्म से बॉलीवुड में प्रवेश करने वाले अभिनेता सनी देओल, हिट और फ्लॉप के दंश से जूझते रहे है। १९८३ में, बेताब बड़ी हिट फिल्म साबित हुई।  लेकिन, उनकी १९८४ में प्रदर्शित सोहनी महिवाल, सनी और मंजिल मंजिल फ्लॉप हो गई।  १९८५ में राहुल रवैल की फिल्म अर्जुन ने सनी देओल का सिक्का जमाया। किन्तु, इसके बाद ज़बरदस्त, सवेरे वाली गाड़ी, सल्तनत और समंदर  फ्लॉप हो गई।






सनी के साथ हिट और फ्लॉप फिल्मों का सिलसिला चलता रहा। २००१ में तो अभूतपूर्व हुआ था।  सनी देओल की १५ जून २००१ को प्रदर्शित फिल्म ग़दर एक प्रेम कथा, आमिर खान की फिल्म लगान को बुरी तरह से पछाड़ कर आल टाइम हिट फिल्म साबित हुई थी। किन्तु, इसके बाद सब कुछ नकारात्मक ही हुआ। उनकी यह रास्ते हैं प्यार के और इंडियन, ग़दर के हैंगओवर में बह गई।  किन्तु, उनके लिए दुःस्वप्न साबित हुई फिल्म कसम। इस डाकू फिल्म की असफलता को सनी देओल आज याद भी नहीं करना चाहते। 





वास्तव में कसम फिल्म अजीबोगरीब पेंच में फंसती निकलती रही।  यह फिल्म पहले तो शीर्षक बदलाव में फसी रही। फिल्म का निर्माण पत्थर और पायल शीर्षक के साथ हुआ था। इस बीच, सनी देओल के पिता धर्मेंद्र की डाकू फिल्म पत्थर और पायल प्रदर्शित हो गई। अब फिल्म का शीर्षक बदला जाना बहुत आवश्यक हो गया था। फिल्म का नाम बदल कर काल करम और विधाता रखा गया।  यह नाम जमा नहीं तो इसे बदल कर काली शंकर कर दिया गया।  अंत में फिल्म कसम शीर्षक के साथ प्रदर्शित हुई।    





बिंदिया और बन्दूक जैसी सुपरहिट फिल्म निर्देशित कर अपने फिल्म जीवन का प्रारम्भ करने वाले शिबू मित्र ने, खून की कीमत, ज़ोरो, शंकर दादा, आखिरी गोली, राखी की सौगंध, पांच कैदी, इंसाफ मैं करूंगा, दुर्गा, माँ कसम, सीतापुर की गीता, इलज़ाम, आग ही आग, पाप की दुनिया, कसम वर्दी की, आखिरी गुलाम, वीरता, आदि बड़ी हिट फिल्मे बनाई थी। किन्तु, कसम की बुरी असफलता ने उन्हें निर्देशन से संन्यास लेने के लिए  विवश कर दिया।





कसम के संगीतकार कल्याणजी आनंदजी थे।  किन्तु, उनके फिल्म को छोड़ देने के बाद इसका संगीत कल्याणजी के बेटे विजय शाह उर्फ़ विजु शाह ने दिया।





कसम ने सोनू वालिया और नीलम का करियर भी समाप्त कर दिया। नीलम की यह अंतिम फिल्म थी।  सोनू वालिया को २००८ में प्रदर्शित जय संतोषी माँ में देखा गया था। नीलम की अंतिम फिल्म वास्तव में हम साथ साथ है (१९९९) थी. किन्तु, कसम के विलम्ब से प्रदर्शित होने के कारण यह फिल्म नीलम की अंतिम फिल्म नहीं बन सकी।





शिबू मित्रा ने, १९८७ में सनी देओल, चंकी पांडेय और नीलम के साथ पाप की दुनिया जैसी बड़ी हिट फिल्म बनाई थी।  किन्तु, वह इसी तिकड़ी के साथ कसम में बुरी तरह से असफल  हुए। यहाँ दिलचस्प तथ्य यह है कि फिल्म पाप की दुनिया के क्लाइमेक्स में चंकी पांडेय की  मौत हो जाती है, जबकि कसम में सनी देओल गोली का शिकार हो जाते है। कदाचित सनी का यो मारा जाना दर्शकों को पसंद नहीं आया था। 





कसम को भिन्न शीर्षक के साथ १९९० में प्रारम्भ किया गया था। इस फिल्म में सनी देओल को मेहमान भूमिका ही करनी थी। समय और शीर्षक बदलने के साथ साथ फिल्म में सनी देओल की भूमिका की लम्बाई बढ़ती गई। अंत में फिल्म सनी देओल की कसम के रूप में प्रदर्शित हुई।





इस फिल्म को बंगलादेश में बांगला भाषा में सहयोगी सितारों के बदलाव के साथ फूल और पत्थर शीर्षक से प्रदर्शित किया गया था।  इस फिल्म को यू ट्यूब पर देखा जा सकता है। दिलचस्प तथ्य यह है कि जहाँ हिंदी कसम बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हुई थी, बांगला  में डब फूल और पत्थर हिट साबित हुई। 

घिसे पिटे कथानक की असफलता पत्थर और पायल !



हिंदी फिल्म दर्शकों का, १९८६ में  फिल्म नगीना से इच्छाधारी नागिन का परिचय करवाने निर्देशक हरमेश मल्होत्रा ने १९६९ में प्रदर्शित फिल्म बेटी का निर्माण कर बॉलीवुड को अपनी शैली से परिचित कराया था।  नंदा और संजय खान अभिनीत फिल्म बेटी एक पारिवारिक ड्रामा फिल्म थी।  फिर विनोद खन्ना, योगिता बाली और प्राण के साथ अपराध फिल्म निर्देशित की। आज के दिन १३ अगस्त १९७४ को डाकू फिल्म पत्थर और पायल प्रदर्शित हुई थी।





इस फिल्म के कलाकारों में धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, विनोद खन्ना, अजित, राजेंद्रनाथ, जयश्री टी, इफ़्तेख़ार, शेट्टी और सप्रू थे। फिल्म के चार गीतों का संगीत कल्याणजी आनंदजी ने दिया था। गीत इंदीवर, गुलशन बावरा और वर्मा मलिक ने लिखे थे। इन गीतों को आशा भोसले और लता मंगेशकर ने गाया था। इनमे से लता मंगेशकर का गाया और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया गीत काफी लोकप्रिय हुआ था।





स्वप्न सुंदरी हेमा मालिनी और हीमैन धर्मेंद्र ने भप्पी सोनी निर्देशित फिल्म तुम हसीं मैं जवान (१९७०) से पहली बार जोड़ी बनाई थी। अगली फिल्म शराफत ने इस जोड़ी कोई सुपरडुपर हिट बना दिया। इस जोड़ी की बाद में प्रदर्शित फिल्मे नया ज़माना, सीता और गीता, राजा जानी और जुगनू बड़ी हिट साबित हुई।





किन्तु, दोस्त के बाद, पत्थर और पायल ही ऎसी फ़िल्में थी, जो लगातार बढ़िया कारोबार नहीं कर सकी। पत्थर और पायल के निर्माण में एक करोड़ खर्च हुए थे। किन्तु, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस अपर मात्र तीन करोड़ ५० लाख का कारोबार ही जुटा सकी।





पत्थर और पायल, धर्मेंद्र और विनोद खन्ना की दूसरी फिल्म थी।  इस फिल्म में मेरा गांव मेरा देश के बाद, दूसरी बार विनोद खन्ना डाकू की भूमिका कर रहे थे। इस फिल्म के दौरान इन दोनों में गहरी दोस्ती हो गई। किन्तु, जल्द ही इस दोस्ती में दरार आ गई, जब दोनों में अमृता सिंह को लेकर तकरार हो गई। 





पत्थर और पायल शीर्षक से तीन फिल्मे बन जाती।  यह तीनों फिल्मे देओल पिता पुत्र की होती।  १९७४ की हरमेश मल्होत्रा की फिल्म पत्थर और पायल के बाद, सन २००० में केबी तिलक के निर्देशन में दूसरी पत्थर और पायल प्रदर्शित हुई।  यह दोनों फिल्मे डाकू फिल्मे थी।  तीसरी पत्थर और पायल धर्मेंद्र के बेटे सनी देओल को लेकर बनाई जानी थी। किन्तु, धर्मेंद्र की दूसरी पत्थर और पायल प्रदर्शित हो जाने के बाद, सनी देओल की फिल्म को कसम शीर्षक से बनाया गया। शिबू मित्रा निर्देशित कसम के केंद्र में भी डाकू कथानक ही था।

फिलहाल देश में #Coolie से १७ करोड़ और वर्ल्ड वाइड ७० करोड़ से पिछड़ती #War2



बॉक्स ऑफिस पर, कल से प्रारम्भ होने जा रहा तमिल फिल्म कुली और बॉलीवुड फिल्म वॉर २ की प्रतिद्वंद्विता दिलचस्प होती जा रही है। फिलहाल तो बॉक्स ऑफिस पर अग्रिम बुकिंग पर तमाम निगाहें हैं।  आज समाप्त होने तक कौन फिल्म भारतीय बॉक्स ऑफिस और विश्व के बॉक्स ऑफिस पर अपना सिक्का जमाती है।





जहाँ तक अभी तक का समाचार है रजनीकांत की तमिल फिल्म कुली ने, वर्ल्ड वाइड बॉक्स ऑफिस पर बॉलीवुड की हृथिक रोशन और जूनियर एनटीआर अभिनीत फिल्म वॉर २ पर ७०  करोड़ की बढ़त ले ली है।  कुली ने अग्रिम बुकिंग में ८५ करोड़ का व्यवसाय कर लिया है।  आशा की जा रही है कि यह फिल्म पूरे विश्व में १०० करोड़ की अग्रिम कमाई के साथ खुलेगी। 





भारत के बॉक्स ऑफिस पर, प्रारम्भ में वॉर २ से पिछड़ने के बाद, कुली ने अपनी जगह बनानी शुरू कर दी है।  पहले वॉर २ ने हिंदी पेटी के सभी सिंगल स्क्रीन, दो स्क्रीन और तीन स्क्रीन सिनेमाघरों को घेर लिया था।  कुली के लिए एक दो शो ही छोड़े थे।





किन्तु, प्रत्येक बीतते दिन के साथ समीकरण बदल रहे है।  बताते हैं कि कुली के शो बढाए जा रहे है। प्रारम्भ में यह अनुमान किया जा रहा था कि कुली की हिंदी पेटी में आठ करोड़ का प्रारम्भ होगा। किन्तु अब यह आंकड़े १३ करोड़ पर आ गए है। ट्रेड उम्मीद लगा रहा है कि १४ अगस्त को इसमें सुधार  होगा।





प्रदर्शकों का कहना है कि टियर २ और टियर ३ के छविग्रहों में कुली की मांग अधिक है। इसलिए शो बढ़ाने की बात की जा रही है। किन्तु, कितने शो बढ़ेंगे यह कल मालूम पड़ेगा। पता चला है कि बुक माय शो में कुली के शो बढ़ रहे है।





दक्षिण की बात की जाये तो कुली के तेलुगु संस्करण ने, वॉर २ के तेलुगु संस्करण पर बढ़त बना ली है। 





मनोरंजन साइट बॉलीवुड हंगामा ने दिलचस्प स्थिति बयान की है। इसके अनुसार मुंबई जी २ से विख्यात गेटी गैलेक्सी थिएटर में एक हजार सीटों वाले गेटी और ८०० सीटों वाले गैलेक्सी थिएटर ने पठान, टाइगर २ और सिकंदर को सभी शो दे दिए थे। इसी के अनुसार जी ७ के १८ सौ सीट वाले गेटी-गैलेक्सी को वॉर २ को दे दिया गया। कुली के हिंदी संस्करण को २३८ सीटों वाले जैमिनी थिएटर को चार शो प्रतिदिन दे दिए गए थे।





किन्तु, अब कुली को ३ बजे और ९.३० बजे के शो जैमिनी में और मैटिनी और शाम  के शो ग्लैक्सी में दे दिए गए। अब वॉर २ के चार शो गेटी में होंगे और बाकी के दो शो गैलेक्सी और जैमिनी में बाँट दिए गए है। बताते हैं।  बताते हैं कि अग्रिम बुकिंग में कुली की जबरदस्त मांग को देखते हुए, वितरक इस मैनेजमेंट से अधिक शो की मांग कर सकते है। 





कुछ दिलचस्प तथ्य। कुली ने रामचरण की फिल्म गेम चेंजर के अग्रिम बुकिंग के आंकड़ों कोई पछाड़ दिया है। यह फिल्म सप्ताहांत में १०० करोड़ का आंकड़ा बहुत पहले क्रॉस कर चुकी है।





 

अग्रिम बुकिंग की दृष्टि से सैकनिल्क एंटरटेनमेंट के आंकड़े दिलचस्प है। भारतीय बॉक्स ऑफिस पर रजनीकांत की कुली के तमिल संस्करण ने २२ करोड़, ८९ लाख, ८९ हजार ९९८, हिंदी संस्करण ने ७७ लाख २० हजार ०८६, तेलुगु संस्करण ने तीन करोड़, ५५ लाख, ६१ हजार ८५५ और कन्नड़ संस्करण ने पांच लाख ८६ हजार ६८६ के टिकट बेच लिए थे। इस प्रकार से पहले दिन कुली की कुल अग्रिम बुकिंग २७ करोड़ २९ लाख की हुई है। 





उधर, हृथिक रोशन, जूनियर एनटीआर और नागार्जुन की फिल्म वॉर २ हिंदी के अतिरिक्त तेलूग और तमिल में, २डी, आईमैक्स, आदि प्रभाव के साथ प्रदर्शित की जा रही है। इस फिल्म का हिंदी संस्करण ६ करोड़ ४३ लाख ८२ हजार ०३६, तेलुगु संस्करण ३ करोड़, ४९ लाख, ८८ हजार ७४५ तथा तमिल संस्करण ९ लाख ५१ हजार ६७७ की विशुद्ध बुकिंग कर चुका है। इस प्रकार से वॉर २ का पहले दिन १० करोड़ ०३ लाख का नेट कर चुकी है। 





इस प्रकार से, कुली के मुकाबले वॉर २ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन लगभग १७ करोड़ से पिछड़ रहा है। दोनों फिल्मों के इस कलेक्शन में वॉर २ को हिंदी पेटी से और कुली को तमिल पेटी से संरक्षण मिल रहा है। यह तो बॉक्स ऑफिस कलेक्शन है सोचता है क्या,  आगे आगे देखिये होता है क्या ?

Tuesday, 12 August 2025

फर्स्ट फ्राइडे जिंक्स की ईजाद करने वाली बुलंदी और मेला !



आज  कथा बॉक्स ऑफिस पर टकराव की।  बड़े सितारों की भीड़भाड़ वाली बड़े बजट की दो फिल्में।  स्टारकास्ट की दृष्टि से बॉलीवुड फिल्म उद्योग कोई पूरा विश्वास था कि यह दोनों फिल्मे टकराव के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर बड़ा व्यवसाय करेंगी।  लेकिन, दोनों ही फिल्मे बॉक्स ऑफिस पर धराशाई हुई। 





पहली फिल्म थी अनिल कपूर की दोहरी भूमिका वाली फिल्म बुलंदी।  टी रामाराव की इस फिल्म का बजट सात करोड़ था। फिल्म में अनिल कपूर के अतिरिक्त रजनीकांत, रेखा, रवीना टंडन, शक्ति कपूर, अरुणा ईरानी, रंजीत, हरीश और परेश रावल विभिन्न भूमिकाओं में थे। जबकि, धर्मेश दर्शन के निर्देशन में मेला का बजट १८ करोड़ का था। इस फिल्म में आमिर खान अपने भाई फैसल खान कोई बॉलीवुड में ज़माने के लिए कर रहे थे। फिल्म में ट्विंकल खन्ना, नवनीत निशान, तन्वी आज़मी, जॉनी लीवर, आदि की प्रमुख भूमिकाएं थी।  दोनों ही फिल्मों की पृष्ठभूमि ग्रामीण थी। यह दोनों ही फिल्मे बॉक्स ऑफिस पर मुंह के बल गिरी।





मेला ३२० परदों पर प्रदर्शित हुई थी। फिल्म का कुल व्यवसाय १८ करोड़ का हुआ। जबकि, बुलंदी २३० परदों पर प्रदर्शित हो कर कुल छह करोड़ का व्यवसाय ही कर सकी।  यह दोनों फ़िल्में २००० की फ्लॉप फिल्मों में सम्मिलित है। इन फिल्मों की असफलता ने बॉक्स ऑफिस पर फर्स्ट फ्राइडे जिंक्स अर्थात किसी साल के पहले शुक्रवार को प्रदर्शित फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल होती है, के भय को जन्म दिया।  यह जिंक्स रानी  मुख़र्जी की फिल्म नो वन किल्ड जेसिका के प्रदर्शित होने तक जारी रहा।





इन दोनों ही फिल्मों की विशेष बात यह थी कि यह दोनों ही फ़िल्में करिश्मा कपूर को दी गई थी।  किन्तु, किन्ही वजहों से वह मेला और बुलंदी नहीं कर सकी।  बाद में उनकी यह भूमिका ट्विंकल खन्ना और रवीना टंडन को मिल गई।करिश्मा कपूर की मेला में भूमिका सोनाली बेंद्रे और बुलंदी की रवीना टंडन को गई थी। इनके मना करने के बाद ट्विंकल फिल्म में आई। 





बुलंदी में अनिल कपूर और परेश रावल ने दोहरी भूमिका की थी। अनिल कपूर. युद्ध और किशन कन्हैया के बाद, तीसरी बार दोहरी भूमिका कर रहे थे। जबकि, परेश रावल, अंदाज अपना अपना के बाद दूसरी बार दोहरी भूमिका कर रहे थे। 





फिल्म में रजनीकांत और अनिल कपूर पहली बार एक साथ काम कर रहे थे। यह रजनीकांत की अंतिम हिंदी फिल्म थी। जबकि रेखा और रवीना टंडन खिलाडियों का खिलाडी के बाद, दूसरी बारे परदे पर आमने सामने थी। 





मेला की खल भूमिका टीनू वर्मा ने की थी। किन्तु, उनसे पूर्व यह भूमिका आदित्य पंचोली के पास गई थी।  किन्तु, उन्होंने इसलिए मना कर दिया कि फिल्म में विलेन कोई अधनंगा रहना है। 




 

१९९५ में, सनी देओल, संजय दत्त, शिल्पा शेट्टी और नम्रता शिरोड़कर के साथ फिल्म जानवर की घोषणा की गई थी।  भाई-भाई के टकराव वाली जानवर सिरे न चढ़ सकी। बाद में इस फिल्म को मेला शीर्षक के साथ आमिर खान, फैसल खान और ट्विंकल खन्ना  के साथ बनाया गया।





मेला की विफलता के साथ एक दिलचस्प प्रेम प्रसंग जुड़ा हुआ है। इस फिल्म के निर्माण के दौरान अक्षय कुमार ने ट्विंकल कपाड़िया के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा था। किन्तु, बॉलीवुड में अपना करियर बनाने किस सोच में ट्विंकल ने यह शर्त रख दी कि यदि मेला फ्लॉप हो गई तो वह अक्षय से शादी कर लेंगी।  मेला फ्लॉप हुई और अगले ही साल ट्विंकल कपाड़िया, मिसेज ट्विंकल खन्ना बन गई। 

भ्रष्ट व्यवस्था पर चोट! जाने भी दो यारों !!



भारतीय फिल्म विकास निगम की फिल्म जाने भी दो यारों, आज ही के दिन १२ अगस्त १९८३ को प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म में, भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित और सशक्त हस्ताक्षरो का जमघट था।  फिल्म का निर्देशन कुंदन शाह ने किया था। यह कुंदन शाह की पहली निर्देशित फिल्म थी। फिल्म  विकास निगम ने इस फिल्म के निर्माण के लिए ८ से ९ लाख का बजट उपलब्ध कराया था।




भ्रष्टाचार पर चोट करने वाले व्यंग्यात्मक हास्य फिल्म जाने भी दो यारों की कहानी की विशेषता थी कि यह फिल्म एक मृत शरीर के माध्यम से पूरी व्यवस्था को नंगा कर देती थी। दिलचस्प तथ्य यह था कि इस मृत शरीर के रूप में सतीश शाह ने गजब का साहस दिखाया था।  वह मृत शरीर के रूप में पूरी फिल्म में स्थिर बने रहे। 





इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, विवेक वासवानी, भक्ति बर्वे, सतीश शाह, पंकज कपूर, नीना गुप्ता, सतीश कौशिक, अशोक बान्थिया, राजेश पुरी,आदि रोचक चरित्र कर रहे थे।  फिल्म की कहानी और पटकथा कुंदन शाह और सुधीर मिश्रा ने लिखी थी। फिल्म के संवाद में रंजीत कपूर और सतीश शाह का योगदान  था।





जाने भी दो यारों का महाभारत का प्रसंग आज भी सबसे मजाकिया प्रसंगों में गिना जाता है। इस महाभारत की विशेषता थी कि दुर्योधन नहीं चाहता कि द्रौपदी का चीर हरण हो। जबकि, युधिष्ठिर उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित करता है। इस महाभारत में अकबर भी कूद पड़ता है और साड़ी में लिपटी द्रौपदी (वास्तव में म्युनिसिपल कमिश्नर का मृत शरीर) को ले जाता है। 





फिल्म के दो प्रमुख प्रेस फोटोग्राफर चरित्रों को नसीरुद्दीन शाह और विवेक वासवानी ने किया था। फिल्म में इन दोनों के नाम प्रसिद्द फिल्म निर्देशकों विनोद चोपड़ा और सुधीर मिश्रा के नाम पर थे। फिल्म में भक्ति बर्वे खबरदार पत्रिका चलाने वाली बनी थी। विनोद चोपड़ा महाभारत दृश्य में शकुनि बने थे। पंकज कपूर और ओमपुरी बिल्डर तनेजा और आहूजा बने थे। सतीश शाह म्युनिसिपल कमिश्नर की भूमिका कर रहे थे।





बयालीस साल पहले प्रदर्शित फिल्म जाने भी दो यारों का भ्रष्टाचार आज भी सामायिक है। इस फिल्म में भ्रष्ट बिल्डर, राजनेता, पत्रकार और नौकरशाही को दिखाया गया था। यह फिल्म विनोद और सुधीर के चरित्रों के माध्यम से असहाय जनता को दिखाया गया था।





इस फिल्म का क्लाइमेक्स का अदालत का दृश्य काफी चोट देने वाला था। यह दृश्य न्याय व्यवस्था के अंधेपन को बताने वाला था, जहाँ पैसा और पावर जीतता है और आम आदमी कोई इसका शिकार होना पड़ता है।





इस फिल्म की कुछ विशेष बातें।  फिल्म के एक दृश्य में के नया बना पुल गिर जाता है।  इस दृश्य के लिए, उस समय मुंबई के नए बने भायखला पल के गिरने की फुटेज इस्तेमाल की गई थी।  फिल्म के दो बिल्डरों तरनेजा और आहूजा के नाम, उस समय के विख्यात बिल्डर रहेजा की उधारी थे।  भक्ति बर्वे की पत्रकार शोभा, उस समय की गॉसिप मैगजीन चलाने वाली शोभा डे पर छींटाकसी थी। पुलिस वालों के कोड वर्ड अल्बर्ट पिंटो सईद मिर्जा की फिल्म अल्बर्ट पिंटू को गुस्सा क्यों आता है से लिए गये थे। फिल्म के सीक्वेंस में माया दर्पण और उसकी रोटी के पोस्टर दीवाल पर चिपके दिखाई देते थे। 

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एक ओर, स्वतंत्रता दिवस सप्ताह की पूर्व संध्या पर, जहाँ देश के छविगृहों में, अखिल भारतीय फिल्म कुली से, बॉलीवुड की तमिल और तेलुगु में भी प्रदर्शित होने जा रही फिल्म वॉर २ का बॉक्स ऑफिस पर टकराव होगा।  वही दूसरी ओर घर बैठे दर्शकों के लिए विभिन्न ओटीटी प्लेटफार्म पर कुछ विशेष फिल्मे और सीरीज स्ट्रीम होने लगेंगी। आइये बात करते है, ऎसी ही तीन फिल्मों और वेब  सीरीज की। 







ज़ी ५ पर जानकी बनाम स्टेट ऑफ़ केरल - प्रवीण नारायणन द्वारा निर्देशित कोर्ट रूम ड्रामा फिल्म जानकी बनाम स्टेट ऑफ़ केरल का प्रसारण ज़ी ५ पर १५ अगस्त २०१५ से होने लगेगा। सुरेश गोपी की परदे पर वापसी वाली यह फिल्म महिलाओं की रक्षा के कानूनों के निरंतर उपेक्षा की समस्या को जस्टिस वर्मा की रिपोर्ट का हवाला देती है।  इस फिल्म में अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली जानकी की भूमिका अनुपमा परमेश्वरन ने की है। यह मलयालम फिल्म हिंदी, तेलुगु, तमिल और कन्नड़ भाषाओँ में भी देखी जा सकेगी। 






नेटफ्लिक्स इंडिया पर सारे जहाँ से अच्छा- स्वतंत्रता दिवस के पूर्व किसी देश भक्ति की सीरीज को स्ट्रीम किया जाना स्वभाविक है। सारे जहाँ से अच्छा ऎसी ही देशभक्तिपूर्ण वेब श्रृंखला है। इस सीरीज में प्रतीक गाँधी भारतीय जासूस की भूमिका की है। रॉ एजेंट विष्णु शंकर, पाकिस्तान के अंदर घुस कर आतंकवादी गतिविधियों की समाप्त करता है।  इस सीरीज में सनी हिंदुजा आईएसआई एजेंट मुर्तज़ा मलिक की भूमिका कर रहे है।अन्य भूमिकाओं में रजत कपूर, कृतिका कामरा, अनूप सोनी और तिलोत्तमा सोम है। यह सीरीज कल १३ अगस्त से नेटफ्लिक्स इंडिया पर स्ट्रीम होने लगेगी। 






प्राइम वीडियो पर अँधेरा - जहाँ एक ओर दूसरे ओटीटी प्लेटफॉर्मों पर देशभक्ति या कोर्ट रूम ड्रामा होगा, वही प्राइम वीडियो पर भय का अँधेरा होगा।  जी हाँ, प्राइम वीडियो पर, १४ अगस्त २०२५ से गौरव देसाई द्वारा रचित और राघव डार द्वारा निर्देशित अन्धेरा स्ट्रीम होगी। इस फिल्म की पृष्ठभूमि मुंबई की है। फिल्म में यह देखना रुचिकर होगा कि एक निडर पुलिस वाला आत्मा से ग्रस्त मेडिकल छात्र की कैसी रक्षा करता है! इस फिल्म में मराठी फिल्म अभिनेत्री प्रिया बापट मुख्य भूमिका में है। अन्य भूमिकाओं में सुरवीन चावला, प्राजक्ता कोली, करणवीर मल्होत्रा, वत्सल सेठ, प्रवीण डबास और प्रणय पचौरी है।








ज़ी ५ पर तेहरान- इस स्वतंत्रता दिवस पर बॉलीवुड अभिनेता जॉन अब्राहम देशभक्तिपूर्ण थ्रिलर तेहरान में देश की सीमाओं से परे मिशन पर जाते है। इस मिशन में अब्राहम का व्यक्तिगत भी है। ट्रेलर से ऐसा प्रतीत होता है कि यह फिल्म १९७० के इजराइली संकट के दौरान तेहरान में गए अमेरिकी राष्ट्रपति को मार डालने के घटनाक्रम से प्रेरित है, जिसमे  आतंकी इरादों को जॉन अब्राहम का चरित्र निष्फल कर देता है।  तेहरान में, जॉन अब्राहम का साथ नीरू बाजवा, मधुरिमा तुली और मिस वर्ल्ड मानुषी  छिल्लर अपनी पूरी शक्ति से दे रही है। यह फिल्म १४ अगस्त से ज़ी ५ पर स्ट्रीम होने लगेगी। फिल्म के निर्देशक अरुण गोपालन है। 

Monday, 11 August 2025

#Animal की नक़ल की झलक #Baaghi4



निर्माता साजिद नाडियाडवाला की फिल्म बागी ४ की झलकियां आज इस फ्रैंचाइज़ी फिल्म के प्रशंसक दर्शकों के समक्ष है। बागी ४ के लिए, साजिद नाडियाडवाला निर्माता के अतिरिक्त कहानीकार और पटकथा लेखक की भूमिका में भी है। इस फिल्म के निर्देशक ए हर्षा है।





फिल्म का टीज़र खून से सने हुए हिंसक चेहरों से पटा हुआ है। फिल्म में संजय दत्त और टाइगर श्रॉफ जैसे अभिनेता ही रक्तरंजित नहीं है, बल्कि २०२१ की मिस यूनिवर्स हरनाज़ संधू और पंजाबी फिल्मों की हीर सोनम बाजवा भी खून से सनी हुई क़त्ल करती दिखाई गई है। हास्यास्पद बात यह है कि संजय दत्त तो संजय दत्त,  हरनाज़ भी धारदार हथियार से सामने वाले पर वार कर उसे ऊपर तान देती है।  कुछ ऎसी ही हिंसक दशा सोनम बाजवा की भी है।






कहानी पर रणबीर कपूर की संदीप रेड्डी वंगा निर्देशित फिल्म एनिमल की छाप है।  साजिद ने पटकथा लिखने में एनिमल के दृश्य साफ़ साफ़ कॉपी किये है। टीज़र का हर दृश्य एनिमल की चुगली करता है।  इसमें कोई नयापन है तो वह यह कि फिल्म की हसीनाएं भी कातिल है। कोई भी मुस्कुरा नहीं रही, हिंसक गुर्राहट दर्शकों की तरफ फेंक रही है।






फिल्म के पोस्टर तो एनिमल की चुगली करते ही है, टीज़र में जारी गीत मरजाना भी एनिमल के प्राक के गए सारी दुनिया जला देंगे की नक़ल है।





फिल्म बागी ४ से हरनाज संधू और निर्देशक ए हर्षा का बॉलीवुड से पहला परिचय हो रहा है। फिल्म ५ सितम्बर २०२५ को प्रदर्शित हो रही है। 

#BoxOffice पर भी #MahavatarNarsimha



भगवान विष्णु के अवतारों में से एक नरसिंह अवतार पर  पौराणिक फिल्म महावतार नरसिंह  ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता का ध्वज फहराना प्रारम्भ कर दिया है।  आश्विन कुमार की पहली निर्देशित एनीमेशन फिल्म ने बॉलीवुड की बड़ी बड़ी फिल्मो के ग्रॉस को  पछाड़ना प्रारम्भ कर दिया है।






हिंदी, तमिल, तेलूग, मलयालम और कन्नड़ भाषाओँ में बनाई गई फिल्म महावतार नरसिंह के  हिंदी संस्करण ने पहले १०० करोड़ क्लब में प्रवेश कर, एक अन्य एनीमेशन फिल्म हनुमान के कारोबार को पीछे धकेला।  अब तीसरा सप्ताहांत समाप्त होते ही, यह फिल्म २०० करोड़ का ग्रॉस कर पाने में सफल हो  गई है।





क्लीम प्रोडक्शंस और होमबोले फिल्मस की यह फिल्म तीसरे सप्ताहांत में हिंदी में १२६.९ करोड़, तेलुगु में ३५.१५ करोड़, कन्नड़ में ४.९४ करोड़, तमिल में २.२४ करोड़ और मलयालम में ४२ लाख का विशुद्ध कारोबार कर १६९.६५ करोड़ का कल विशुद्ध व्यवसाय कर चुकी है।  इस फिल्म का ग्रॉस अर्थात कुल व्यवसाय २०० करोड़ को पार कर चूका है।





महावतार नरसिंह ने, हिंदी पेटी के दर्शकों को सबसे अधिक आकर्षित किया है। इस फिल्म के हिंदी संस्करण ने प्रदर्शन के पहले दिन, अन्य भाषाओँ की तुलना में सबसे अधिक १.३५ करोड़ का विशुद्ध व्यवसाय किया था।  इसके बाद, प्रत्येक दिन व्यतीत होने के साथ ही फिल्म का व्यवसाय निखरता चला गया। फिल्म ने अपने प्रदर्शन के १७ वे दिन तीसरे  रविवार को १८ करोड़ का महा व्यवसाय कर सबको चौंका दिया। 





महावतार नरसिंह, द लायन किंग और मुफसा द लायन  किंग के बाद, तीसरी एनीमेशन फिल्म है, जिसने १०० करोड़ का विशुद्ध  व्यवसाय किया। ऎसी आशा की जा रही है कि यह फिल्म स्वतंत्रता दिवस सप्ताहांत में धुंआधार व्यवसाय करेगी। 





यहाँ बताते चलें कि बॉक्स ऑफिस पर ३०० करोड़ क्लब में प्रवेश करने वाले रोमांस फिल्म सैयारा ने अपने तीसरे सप्ताह में २८.२५ करोड़ का विशुद्ध व्यवसाय किया था, ठीक  उसी समय महावतार नरसिंह ने दूसरे सप्ताह में ७३.४ करोड़ का  व्यवसाय किया।




 

इसके बाद, तीसरे शुक्रवार, शनिवार और रविवार को महावतार नरसिंह ने क्रमशः ५.२५ करोड़, १६.२५ करोड़ और १८ करोड़ का व्यवसाय किया।  जबकि, इन दिनों में सैयारा का व्यवसाय  २ करोड़, ३.७५ करोड़ और ४ करोड़ मात्र ही रहा। 

कितने होंठों से जाम छीन लेने वाली फिल्म मेरी जंग !



दिलीप कुमार पर फिल्माए गए गीत पीते पीते जाम बदल जाते है,  चालीस साल पहले आज के दिन ११ अगस्त १९८५ को प्रदर्शित फिल्म मेरी जंग पर सटीक बैठता है।  यह एक ऐसी फिल्म थी, जिसे घोषणा से लेकर पूरा होने तक कई होंठों से जाम छिने और दूसरे होंठों तक पहुंचे। आज फिल्म मेरी जंग के प्यासे रह गए और जाम पी गए होंठों के बारे में बताते हैं। 





फिल्म निर्माता एनएन सिप्पी, शायद राजेंद्र कुमार की १९६९ में प्रदर्शित स्पाई फिल्म शतरंज से प्रेरित हो कर फिल्म शतरंज का निर्माण करना चाहते थे। क्योंकि, वह  इस फिल्म के एसोसिएट निर्माता भी थे।  एनएन सिप्पी ने इस फिल्म के निर्देशन की कमान रमेश सिप्पी को सौंपी थी।  इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, अमजद खान और अनिल कपूर मुख्य  भूमिकाओं में थे। इस फिल्म की घोषणा १९८२ में हुई थी। चूंकि फिल्म एक वकील की कहानी थी, अमिताभ को इस लिए लिया गया कि उन्होंने इसके  पहले कभी वकील की भूमिका नहीं की थी।  





इसी दौरान अमिताभ बच्चन कुली के सेट पर गंभीर रूप से घायल हो गए।  चोट से  उन्हें १९८४ में  राजीव गाँधी की तरफ से, इलाहाबाद की लोकसभा सीट  से कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ने का आमंत्रण आया।  दोस्त की पुकार पर अमिताभ बच्चन शतरंज की फ़िल्मी बिसात छोड़ कर राजनीति की बिसात मोहरे चलने आ गए। 





शतरंज से  अमिताभ बच्चन के निकलने के बाद बड़े परिवर्तन हुए। जाम एक होंठ से दूसरे होंठ लगने लगे। सबसे पहले, शतरंज का नाम बदल कर मेरी जंग कर दिया गया। फिल्म के निर्देशक रमेश सिप्पी के स्थान पर सुभाष घई बना दिए गए। सुभाष घई के निर्देशक जीवन का प्रारम्भ  एनएन सिप्पी निर्मित फिल्म कालीचरण से हुआ था।  मेरी जंग, सुभाष घई की, सिप्पी के लिए  दूसरी और अंतिम फिल्म थी। इस फिल्म के बाद, सुभाष घई ने कभी दूसरे  निर्माता की फिल्म निर्देशित नहीं की। 





इसके बाद, मेरी जंग में कलाकारों के बदलाव का सिलसिला प्रारम्भ हो गया।  फिल्म शतरंज में खल भूमिका कर रहे अनिल कपूर, अमिताभ बच्चन के स्थान पर फिल्म के नायक बना दिए  गए। इस फिल्म ने अनिल कपूर के करियर को नया मोड़ दिया। अनिल कपूर आज भी इसका श्रेय अमिताभ बच्चन के फिल्म  शतरंज छोड़ने को देते है।






शतरंज की नायिका जयाप्रदा थी। क्योंकि, जयाप्रदा के हिंदी फिल्म  जीवन का प्रारम्भ सिप्पी की फिल्म सरगम से हुआ था। किन्तु, जयाप्रदा, अमिताभ  बच्चन पर आसक्त थी। वह अमिताभ बच्चन के लिए ही फिल्म कर रही थी। इसलिए जैसे ही अमिताभ बच्चन ने शतरंज छोड़ी , जयाप्रदा ने भी बाजी छोड़ दी। जयाप्रदा के स्थान पर फिल्म में अनिल कपूर की नायिका मीनाक्षी शेषाद्रि बना दी गई।





जहाँ, शतरंज से मेरी जंग बनते ही फिल्म मेरी जंग के नायक और नायिका में बदलाव हुआ, इसके खलनायक भी बदल गए।  अमजद खान की जगह अमरीश पुरी आ गए।  अनिल कपूर की भूमिका पुराने ज़माने के हास्य अभिनेता जगदीप के बेटे जावेद जाफरी को मिल गई।  उनका फिल्म में बोल बेबी बोल पर ब्रेक डांस सुपरहिट हो गया। किन्तु, फिल्म मेरी जंग के हिट होने का लाभ जावेद को नहीं मिला। यद्यपि बीआर इशारा ने अपनी हॉरर थ्रिलर फिल्म वह फिर आएगी में एक ब्रेक डांस पहला पहला प्यार जानम तेरे लिए जावेद पर ही फिल्माया था। 





जावेद जाफरी को मेरी जंग से पहले फिल्म डिस्को डांसर में एक डिस्को डांसर की भूमिका का अवसर मिला था।  किन्तु, जावेद जाफरी नहीं चाहते थे कि वह नायक मिथुन चक्रवर्ती से कमतर हीरो की  भूमिका करें।  बाद में यह भूमिका करण राजदान ने की।





मेरी जंग के लिए नूतन और अमरीश पुरी को सह अभिनेत्री और सह अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था।  इस फिल्म के एक गीत झूम ले को संगीतकार लक्ष्मीकांत के साथ सुभाष घई ने गाया था। मेरी जंग लेखक जावेद अख़बार की सुभाष घई के लिए इकलौती फिल्म थी।






फिल्म में जावेद जाफरी के साथ ब्रेक डांस करने वाली अभिनेत्री खुशबू को बॉलीवुड में अपेक्षित सफलता नहीं मिली। किन्तु, वह दक्षिण की फिल्मों के बहुत सफल हुई। प्रशंसकों द्वारा  उनके नाम के मंदिर भी बनाये गए। 

अंकुश के चार क्रोधित युवा !



एन चंद्रा के नाम से प्रसिद्द फिल्म निर्देशक चंद्रशेखर नार्वेकर की निर्देशित पहली फिल्म अंकुश थी। यह फिल्म २१ जुलाई १९८६ को प्रदर्शित हुई थी।  इस फिल्म को मात्र १२ लाख के बजट से बनाया गया था।  फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ९५ लाख का ग्रॉस किया था।  यह एक ऐसी सुपरहिट फिल्म  थी, जिसके सभी एक्टर काफी हद तक नए थे। 





फिल्म का कथानक मुंबई की चॉल पर आधारित था।  जहाँ एक माँ अपनी बेटी के साथ रहती थी।  चार बेकार और निराश युवाओं का उनसे संपर्क हुआ।  वह दोनों माँ बेटी से बहुत प्रभावित हुए।  एक दिन लड़की के साथ क्रूर बलात्कार होता है।  यह घटना उन चारों को अंदर तक हिला देती है।  वह बदले की आग में जलने लगते है।  इसके बाद चारों बलात्कारी युवा को पकड़ कर उसकी हत्या कर देते है। 





इस फिल्म की विशेषता  थी, इसका ईंमानदार कथानक।  यद्यपि  एन चंद्रा की यह कहानी गुलजार की फिल्म मेरे अपने से प्रेरित लगती है ।  विशेष रूप से नाना पाटेकर का चरित्र विनोद खन्ना की झलक देता  था।  फिर भी, यह फिल्म अछूते अभिनय और ईमानदार प्रयास के कारण दर्शकों का दिल छू पाने में सफल रही। 





इस फिल्म में माँ बेटी  की भूमिका आशालता और निशा सिंह ने की थी।  चार बेकार युवा नाना पाटेकर, सुहास पलसीकर, मदन जैन और अर्जुन चक्रवर्ती थे।  फिल्म की अन्य भूमिकाओं में राज जुत्शी, महावीर शाह, चरण राज, माला जग्गी, राबिया अमीन और राजा बुंदेला थे। 





लगभग चालीस साल पहले प्रदर्शित इन फिल्मों के कलाकारों के विषय में जानकारी करना चाहें तो कुछ विशेष नहीं मिलता।  यहाँ तक कि नाना पाटेकर को छोड़ कर निशा सिंह, सुहास पलसीकर, मदन जैन और अर्जुन चक्रवर्ती के बारे में भी।  इन छह मुख्य चरित्र अभिनेताओं में केवल नानां पाटेकर ही अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय है। 





फिल्म के निर्देशक एन चंद्रा ने, अंकुश के बाद प्रतिघात, तेज़ाब, हमला, नरसिम्हा, युगांधर, तेजस्विनी, बेकाबू, वजूद, शिकारी, स्टाइल और एक्सक्यूज़ मी जैसी सफल फिल्मों का निर्देशन किया।  किन्तु, २००९ में यह मेरा इंडिया बनाने के बाद, वह नैपथ्य में चले गए।  २०१४ में उनके द्वारा नई  स्टारकास्ट के साथ सुपरहिट तेज़ाब का सीक्वल बनाये जाने का समाचार था।  किन्तु,  आज ११ साल बीतने के बाद भी इसकी को खबर नहीं है। 





अंकुश में नाना पाटेकर के अतिरिक्त मदन जैन (शशि) ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया था।  उन्होंने बाद में भी विजेता, क्रांति, पेज  ३,संघर्ष, आदि जैसी  कई फिल्मों में काम किया।  किन्तु, वह कभी बड़ी फिल्मो के नायक बनने लायक नहीं समझे गए। वह अंतिम बार, शेखर सुमन और उनके बेटे अध्ययन सुमन की फिल्म हार्टलेस (२०१४) में दिखाया दिए थे। 





जब, सुहास पलसीकर (लाल्या) पहली बार अंकुश में दर्शकों के समक्ष आये, तब उनकी खूब चर्चा हुई थी।  क्योंकि, वह साठ के दशक की फिल्मों के चरित्र अभिनेता नाना पलसीकर के बेटे थे।  वह अंकुश की सफलता  के बाद, प्रतिघात, चांदनी बार, मंथन, आदि चर्चित फिल्मों  में दिखाई दिए।  किन्तु, उन्हें कभी भी उन पर केंद्रित भूमिकाएं नहीं मिली। उनकी विगत प्रदर्शित फिल्म बस्ता २०२१ थी। 




अर्जुन चक्रवर्ती (अर्जुन) बांगला फिल्मों से आये थे। उन्हें अधिक फिल्मे बांगला में ही मिली। फिर भी, एक दिन अचानक में भाई की भूमिका के अतिरिक्त ,अनोखा मोती, रवीना टंडन की सीरीज साहब बीवी गुलाम ही उनकी उल्लेखनीय फिल्मे और सीरीज थी। 





अंकुश का कथानक जिस चरित्र अनिता पर केंद्रित था, उसकी अभिनेत्री निशा सिंह ने अपने अभिनय से  समीक्षकों और दर्शकों को तो प्रभावित अवश्य किया। किन्तु, वह इसे फिल्मों में बदल नहीं पाई। निशा सिंह को इसके बाद, फिल्म  बात बन जाये और श्याम बेनेगल की सीरीज भारत एक खोज में  संयुक्ता की भूमिका से ही पहचाना गया। इस समय वह कहाँ हैं  और क्या कर रही है, सोशल मीडिया पर इसका पता नहीं चलता।  

Sunday, 10 August 2025

बॉक्स ऑफिस पर भड़क नहीं रही #NTRJr और #HrithikRoshan की #War



फ्लॉप विक्रम वेधा तथा २५० करोड़ के बजट में बनी  ३४४ करोड़ के साधारण व्यवसाय वाली फिल्म  फाइटर देने वाले हृथिक रोशन की  ३०० करोड़ के बजट से निर्मित ४६६ करोड़  का ग्रॉस करने वाली फिल्म टाइगर ३ के निर्माता यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की फिल्म वॉर २ का, आर आर आर अभिनेता और तेलुगु सुपरस्टार जूनियर एनटीआर की उपस्थिति के बाद बीच टेम्पो नहीं बन पा रहा है।





सैकनिल्क के अनुसार, हिंदी के अतिरिक्त तेलुगु और तमिल में १४ अगस्त २०२५ को प्रदर्शित होने जा रही फिल्म वॉर २ ने, बुकिंग खुलने के बाद सभी भाषाओँ में नवीनतम ७३.७३ लाख के १८५०९ टिकट बेचे है। यदि, ब्लॉक बुकिंग को सम्मिलित कर लिया जाए तो यह आंकड़े २.८५ करोड़ तक ही पहुंचते है।





इसके मुकाबले, १४ अगस्त को ही प्रदर्शित हो रही रजनीकांत की तमिल के अतिरिक्त हिंदी, तेलुगु और कन्नड़ में कुल ११.०८ करोड़ के ५ लाख ३४ हजार ३७४ टिकट बेच लिए है। इनमे ब्लॉक बुकिंग की धनराशि सम्मिलित की जाए तो यह आंकड़ा १७.११ करोड़ तक जा पहुंचता है। 





इन आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जहाँ वॉर २ ने  तमिल पर्दों पर १,८७,४७६ करोड़ के टिकेटबेचे  है, वही कुली ने १० करोड़, ९५ लाख से अधिक के टिकट बेच लिए है। तेलुगु आंकड़ों की तुलना कुली १ लाख ८७ हजार ९९५ के विरुद्ध वॉर २ के १ लाख ४० हजार के टिकेटों से की जा सकती है। 





स्पष्ट है कि वॉर २ किसी भी क्षेत्र में रंग नहीं जमा पा रही है।  अन्यथा, स्वतंत्रता दिवस सप्ताहांत  में प्रदर्शित होने जा रही फिल्म का आंकड़ा कही बहुत अधिक होना चाहिए।  अभी यह कहना उपयुक्त नहीं होगा कि वॉर २ परदे पर रंग नहीं जमा पाएगी।  क्योंकि, फिल्म को प्रदर्शित होने में चार दिन शेष है। बुकिंग बढ़ सकती है और स्पॉट बुकिंग पर बीच बहुत कुछ निर्भर करेगा। 





कदाचित इसे देखते हुए ही वॉर २ के निर्माता ने वॉर २ की ३५ सेकंड की झलकियां जारी की है, जिनमे फिल्म के दो नायक हृथिक रोशन और जूनियर एनटीआर एक दूसरे को समाप्त कर देने की मुद्रा में चुनौती दे रहे है।  किन्तु, यह झलकियां बीच बहुत फायदेमंद होती प्रतीत नहीं हो रही है।





इसलिए, अब सभी निगाहें १४ अगस्त को, विशेष रूप से हिंदी और तेलुगु पेटी में लगी होंगी, जहाँ के दर्शकों के हृथिक रोशन और एनटीआर जूनियर सुपरस्टॉर है। क्या इन दो सुपर सितारन के बीच की वॉर बॉक्स ऑफिस पर रंग जमा पाएगी ? 

देवानंद के बेटे सुनील आनंद की फ्लॉप फिल्म आनंद और आनंद !



फिल्म निर्माता, निर्देशक और अभिनेता देव आनंद निर्मित और निर्देशित फिल्म आनंद और आनद १० अगस्त १९८४ को प्रदर्शित हुई थी।  सामान्य रूप से, देव आनद अपनी फिल्मों की कहानियों के सह लेखक अवश्य हुआ करते थे।  किन्तु, आनंद और आनंद पहली ऐसी फिल्म थी, जिसके सह लेखक देवानंद नहीं थे।  फिल्म आनंद और आनंद को लेखक सूरज सनीम ही थे।





फिल्म आनंद और आनद कई कारणों से विशिष्ट बन गई थी।  इस फिल्म से, देवानंद अपने पुत्र सुनील आनंद का हिंदी दर्शकों से परिचय कराना चाह रहे थे।  अपनी निर्मित फिल्मों के द्वारा नई अभिनेत्रियों का बॉलीवुड से परिचय करवाने वाले देवानंद ने अपने पुत्र का परिचय एक नए चहरे के साथ ही किया था। यह चेहरा था नताशा सिन्हा का।





नताशा सिन्हा कलकत्ता में १९८० में हुई एक प्रतिभा खोज प्रतियोगिता का परिणाम थी।  उन्होंने अभिनेता इन्दर ठाकुर के साथ इस प्रतियोगिता को जीता था।  इंदिरा ठाकुर कोई फिल्म नदिया के पार से पहले मौका मिल गया।  वह एक विमान दुर्घटना में ३२ साल की आयु में स्वर्ग सिधार गए थे। नताशा सिन्हा को १९८४ में देवानंद ने अवसर दिया। किन्तु, वह और इन्दर ठाकुर बॉलीवुड में सफल न हो सके। 





आनंद और आनंद की मूल कथा भाई बहनों के प्यार की थी। यद्यपि इसी फिल्म से सुनील आनंद का दर्शकों से परिचय कराना था।  फिल्म में देवानंद का साथ उनकी खोज टीना मुनीम थी। किन्तु, बाद में देवानंद ने फिल्म का कथानक रोमांटिक बना दिया।





इसका नुकसान फिल्म को झेलना पड़ा। दर्शक फिल्म को दर्शक देश परदेश, लूटमार और मनपसंद की टीना मुनीम और देवानंद की रोमांटिक जोड़ी के कारण देखना चाहते थे। किन्तु, सुनील आनंद और नताशा सिन्हा की नई जोड़ी के कारण दर्शकों को बहुत निराशा हुई।  फिल्म बुरी तरह से असफल हुई।





आनंद और आनंद नवोदित सुनील आनंद के लिए वॉटरलू फिल्म साबित हुई।  इस फिल्म के आबाद सुनील ने दो फिल्मे कार थीफ और मैं तेरे लिए भी की। किन्तु, यह दोनों फिल्मे भी  असफल हुई।सुनील ने फिल्म मास्टर से निर्देशन के क्षेत्र में भाग्य आजमाया।  किन्तु, असफल रहे।





आनंद और आनंद से, सुनील आनंद और नताशा सिन्हा के साथ गायक अभिजीत भट्टाचार्य की आवाज का भी दर्शकों से परिचय कराया जाना था।  अभिजीत को देवानंद जैसे निर्माता और आर डी बर्मन जैसे संगीत निर्देशक के साथ अवसर मिल रहा था। इसलिए, उनके साथ शर्त रखी गई थी कि आनंद और आनंद के रिलीज़ होने से पहले वह किसी दूसरी फिल्म में नहीं जाएंगे।  किन्तु, अभिजीत ने दूसरी फिल्म के लिए गया ही, फिल्म आनंद और आनंद कसे पहले ही रिलीज़ भी हो गई।  इसके बाद, बॉलीवुड ने अभिनीत पर सात साल का प्रतिबन्ध लगा दिया।





आनंद और आनंद में पहली बार देवानंद और बिस्वजीत एक साथ आये थे।  यह राजबब्बर की देवानंद के साथ पहली फिल्म थी। जबकि, यह फिल्म राखी गुलजार की देवानंद के साथ अंतिम फिल्म बन गई। बताते हैं कि इस फिल्म में स्मिता पाटिल ने पहली बार पाश्चात्य वस्त्र पहने थे। 





फिल्म की एक अन्य विशेषता यह थी कि साठ और सत्तर के दर्शक के रोमांटिक नायक बिस्वजीत फिल्म में खल भूमिका कर रहे थे।  इस फिल्म में राजबब्बर ने एक अभिनेत्री के साथ काफी बोल्ड दृश्य किये थे। इस फिल्म में, किशोर कुमार और अभिजीत ने अपने गायक जीवन का इकलौता गाना साथ गया था।