साठ के दशक में, जब फिल्म निर्माता शशधर मुख़र्जी ने अपने बेटे जॉय मुख़र्जी को हिंदी फिल्मों का नायक बनाने का निश्चय किया तो अपनी पूर्व की फिल्मों की तरह कथानक रोमांटिक रखने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने लेखक आगा जानी कश्मीरी को एक लव त्रयी फिल्मों की कथा लिखने को कहा।
इस लव इन ट्राइलॉजी में पहली फिल्म लव इन शिमला थी। इस फिल्म के नवोदित नायक जॉय मुख़र्जी के लिए नया चेहरा साधना को लिया गया। फिल्म में, अजरा, शोभना समर्थ और दुर्गा खोटे अन्य भूमिकाओं में थे। यह फिल्म सुपरहिट हुई। यह फिल्म अंग्रेजी फिल्म जेन स्टेप्स आउट से प्रेरित थी।
लव इन शिमला की सफलता के बाद जॉय मुख़र्जी बॉलीवुड के चॉकलेटी नायक बन गए। उन्होंने एक मुसाफिर एक हसीना, ज़िद्दी, फिर वही दिल लाया हूँ, आदि रोमांटिक फिल्मों में साधना, आशा पारेख और सायरा बानू जैसी हसीन चेहरा अभिनेत्रियों के साथ काम किया। उनकी लव इन ट्राइलॉजी की दूसरी फिल्म लव इन टोक्यों का निर्माण और निर्देशन प्रमोद चक्रवर्ती ने किया था। किन्तु, लव ट्राइलॉजी की तीसरी फिल्म लव इन बॉम्बे अपने आप में इतिहास बन गई।
आर्थिक परिस्थितियां कुछ ऎसी बनी कि तीसरी लव त्रयी को प्रदर्शित होने में ४० साल लग गए। लव त्रयी की तीसरी फिल्म लव इन बॉम्बे का निर्माण और निर्देशन स्वयं जॉय मुख़र्जी ने किया था। हिंदी फिल्मों के रोमांटिक अभिनेता जॉय मुख़र्जी को ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्हें अपने लिए स्वयं फिल्म बनानी चाहिए और निर्देशित भी करनी चाहिए। इस सोच का परिणाम पहली फिल्म हमसाया थी, जो १९६८ में प्रदर्शित हुई। जॉय की दोहरी भूमिका वाली फिल्म हमसाया अच्छे संगीत तथा माला सिन्हा और शर्मीला टैगोर की बड़ी स्टारकास्ट के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी।
इस बड़ी असफलता के बाद भी, जॉय मुख़र्जी ने अपने पिता के लव इन ट्राइलॉजी की तीसरी फिल्म का निर्माण और निर्देशन करने का निर्णय लिया। १९७१ ने त्रयी की तीसरी फिल्म लव इन बॉम्बे का निर्माण प्रारम्भ हुआ। लव इन बॉम्बे का निर्माण ३० लाख से ३५ लाख के बजट से हुआ था। यह आज के हिसाब से ३५० करोड़ के अनुमानित था।
फिल्म को इतनी महंगी होना ही था। क्योंकि, फिल्म की नायिका वहीदा रहमान थी। फिल्म में, जॉय मुख़र्जी ने अपने चचेरे भाइयों अशोक कुमार और किशोर कुमार को भी सम्मिलित किया था। रहमान भी महत्वपूर्ण भूमिका में लिए गए थे। शंकर जयकिशन का संगीत था। गीत मोहम्मद रफ़ी, किशोर और आशा भोंसले ने गाये थे।
किन्तु, तब तक जॉय मुख़र्जी का सितारा अस्त हो चुका था। उनकी अभिनीत फ़िल्में दिल और मोहब्बत, आग और दाग, एहसान, इंस्पेक्टर, मुजरिम, कहीं आर कहीं पार, एक बार मुस्कुरा दो, हैवान, आदि बॉक्स ऑफिस पर धराशाई हो रही थी। यहाँ तक कि उनकी अपने भाई शोमू मुख़र्जी के लिए निर्देशित तीसरी फिल्म छलिया बाबू भी फ्लॉप हो गई। परिणामस्वरूप, जॉय मुख़र्जी निर्देशित और अभिनीत फिल्म लव इन बॉम्बे को प्रदर्शित करने कोई भी वितरक आगे नहीं आया। लव इन बॉम्बे कोल्ड स्टोरेज तक सीमित हो गई।
फिल्म लव इन बॉम्बे, जॉय मुख़र्जी के २०१२ में निधन के बाद प्रदर्शित की उनके पुत्र टॉय मुख़र्जी ने। टॉय भी असफल अभिनेताओं में गिने जाते है। एक दिन उन्हें किसी काम से कोल्ड स्टोरेज जाना पड़ा। वहां उन्हें फिल्म के नेगेटिव देखें का अवसर मिला। वह अच्छी दशा में थे। टॉय ने, फिल्म की सफाई, ध्वनि सुधार और रंग सुधार कर फिल्म को प्रदर्शित किये जाने योग्य बनाया। अंततः, जॉय मुख़र्जी निर्देशित और अभिनीत अंतिम फिल्म लव इन बॉम्बे, २ अगस्त २०१३ को छविगृहों में प्रदर्शित हुई और जॉय मुख़र्जी की अंतिम डिजास्टर फिल्म बन गई।
नोट - इस फिल्म को यूट्यूब पर देखा जा सकता है।













